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कोरोना के बावजूद चालू वित्त वर्ष में तीन फीसदी रह सकती है कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर
Thu, 30 Apr 2020 01:04 PM IST
डिंपल अलवधी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Thu, 30 Apr 2020 01:04 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
नीति आयोग ने चालू वित्त वर्ष में अच्छे मानसून की उम्मीद में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर तीन फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को कहा कि देश का कृषि क्षेत्र कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन के बावजूद, सुचारू रूप से काम कर रहा है। अन्य क्षेत्रों के विपरीत कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर पर संकट का अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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हमारे किसानों को धन्यवाद
मालूम हो कि कृषि और इसके संबद्ध क्षेत्रों की वृद्धि वर्ष 2019-20 में 3.7 फीसदी थी। तोमर ने कहा कि, 'वर्तमान लॉकडाउन स्थिति में, कृषि क्षेत्र सुचारू रूप से काम कर रहा है। खाद्यान्न, सब्जियों और डेयरी उत्पादों की कोई कमी नहीं है। लेकिन, कई अन्य क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। हमें अपने किसानों पर गर्व है। हमारे किसानों को धन्यवाद।'
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कृषि जीडीपी पर ज्यादा असर नहीं
आगे उन्होंने कहा कि अच्छी बारिश की उम्मीद को देखते हुए, लॉकडाउन का कुल कृषि जीडीपी पर इस साल ज्यादा असर नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने कृषि कार्य को लॉकडाउन के नियमों से मुक्त कर दिया है। तोमर ने कहा, 'पिछले साल के दौरान कृषि जीडीपी में वृद्धि 3.7 फीसदी थी। मुझे विश्वास है कि भविष्य में भी यह वृद्धि दर बहुत अधिक प्रभावित नहीं होगी।'
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वृद्धि दर के अनुकूल हैं ये सभी पहलू
इसके साथ ही नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने भी कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद वित्त वर्ष 2020-21 में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर तीन फीसदी रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि दक्षिण पश्चिम मानसून के बेहतर रहने का पूर्वानुमान, जलाशयों में पर्याप्त जल स्तर, खरीफ बुवाई के रकबे में वृद्धि, उर्वरक और बीजों के उठाव में वृद्धि - ये सभी पहलू, कृषि क्षेत्र के वृद्धि दर के अनुकूल हैं।
जीडीपी में कृषि का हिस्सा 15 फीसदी
उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति में कृषि क्षेत्र अपनी भूमिका निभाएगा और भारतीय अर्थव्यवस्था को सामान्य वृद्धि दर की राह पुन: प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि का हिस्सा 15 फीसदी का है और यह क्षेत्र देश की 1.3 अरब से ज्यादा आबादी के आधे से भी अधिक आबादी की आजीविका का स्रोत है।