HCG: गलत तरीके से ट्रायल करने के आरोपों पर एचसीजी की सफाई, कहा- परीक्षण में रोगी सुरक्षा पर देते हैं ध्यान
एचसीजी पर कंपनी की एथिक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति पी कृष्ण भट ने गलत तरीके से ट्रायल करने आरोप लगाए थे। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) को पत्र लिखकर एचसीजी में होने वाले क्लीनिकल ट्रायल्स की जांच की मांग की थी।
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स्वास्थ्य सेवा प्रदाता कंपनी हेल्थ केयर ग्लोबल एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एचसीजी) ने प्लांट में गलत तरीके से स्वास्थ्य सुविधाओं के गलत तरीके से क्लीनिकल ट्रायल करने के आरोपों पर सफाई दी है। कंपनी ने कहा कि हम अपनी एथिक कमेटी के अनुमोदन के आधार पर ट्रायल करते हैं। इसमें पूरी पारदर्शिता बरती जाती है और रोगी सुरक्षा पर पूरा ध्यान दिया जाता है।
हाल ही में एचसीजी पर कंपनी की एथिक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति पी कृष्ण भट ने गलत तरीके से ट्रायल करने आरोप लगाए थे। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) को पत्र लिखकर एचसीजी में होने वाले क्लीनिकल ट्रायल्स की जांच की मांग की थी।
इसके जवाब में एचसीजी ने कहा कि वह डीसीजीआई और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) सहित नियामक प्राधिकरणों के निर्देशों का सख्ती से पालन करती है। कंपनी ने कहा कि हमने भारत और अफ्रीका में कैंसर देखभाल में कंपनी के बारे में कुछ असत्यापित जानकारी देखी है। हम आश्वस्त करते हैं कि हम डीसीजीआई और आईसीएमआर सहित नियामक प्राधिकरणों के निर्धारित दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करते हैं।
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एचसीजी के संस्थापक और अध्यक्ष डॉ. बीएस अजय कुमार ने कहा कि हम अपनी एथिक कमेटी द्वारा अनुमोदित रोगी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अत्यंत पारदर्शिता के साथ सफलतापूर्वक बड़ी संख्या में ट्रायल कर रहे हैं। असाधारण देखभाल प्रदान करने की हमारी प्रतिबद्धता अटल है।
क्या है एचसीजी
एचसीजी भारत में एक अग्रणी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता है जो कैंसर देखभाल, तृतीयक देखभाल, बांझपन उपचार और उन्नत जांच और क्लीनिकल सेवाएं प्रदान करता है। इसकी चार संस्थाएं हैं: एचसीजी - कैंसर देखभाल में विशेषज्ञ, एचसीजी हॉस्पिटल - मल्टीस्पेशलिटी केयर के लिए, मिलन - प्रजनन केंद्र, और ट्रिएस्टा साइंसेज - डायग्नोस्टिक सेंटर।
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शिकायत में क्या कहा गया
कर्नाटक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सेवा के आयुक्त शिवकुमार केबी ने कंपनी के खिलाफ जांच की मांग करते हुए डीसीजीआई को लिखे पत्र में कहा कि विभिन्न क्लीनिकल ट्रायल के संचालन के संबंध में एचसीजी में मरीजों की सुरक्षा, नियामक अनुपालन और संस्थागत अखंडता पर गंभीर चिंताएं जताई गई हैं। इसमें अनियंत्रित हितों का टकराव और मरीज नामांकन भी शामिल है। इन चिंताओं को किसी और ने नहीं, बल्कि संस्थागत एथिक कमेटी के अध्यक्ष ने उठाया है, जिन्होंने बाद में इस्तीफा दे दिया है।