कॉपर प्राइस: 1994 के बाद तांबे में सबसे लंबी साप्ताहिक तेजी, 15 हजार डॉलर प्रति टन के पहुंचा करीब
1994 के बाद तांबे में सबसे लंबी तेजी दिख रही है। एलएमई की कीमतें 15,000 डॉलर के करीब पहुंच गई हैं। इससे एसी, फ्रिज, इलेक्ट्रॉनिक्स और घर बनाना होगा महंगा हो सकता है। जानिए कॉपर बाजार की इस रिकॉर्ड तेजी का कारण और पूरा विश्लेषण।
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लाल धातु यानी तांबे में लगी आग बुझने का नाम नहीं ले रही है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर बुधवार को तांबे का भाव 1.37 फीसदी की छलांग लगाकर 14,708.50 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया। तांबे में पिछले 10 हफ्तों से तेजी का दौर जारी है, जिससे यह 1994 के बाद से तांबे में दर्ज की गई सबसे लंबी साप्ताहिक तेजी बन गई है। घरेलू बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर भी भाव 1,412.15 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया। पिछले एक साल के दौरान एमसीएक्स पर तांबे का भाव 54.52 फीसदी बढ़ चुका है। 10 सितंबर, 2025 को एमसीएक्स पर तांबे का भाव 913.90 रुपये प्रति किलो था।
12 साल में पहली बार नकारात्मक उत्पादन
दुनिया की तांबा खदानें इस समय इतिहास के सबसे गहरे उत्पादन संकट से जूझ रही हैं। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इंडोनेशिया की ग्रासबर्ग खदान में भारी बाढ़ के चलते 2026 का उत्पादन एक-तिहाई घट चुका है, जिसकी 2028 से पहले बहाली संभव नहीं। दुनिया के सबसे बड़े तांबा उत्पादक चिली में उत्पादन 19 साल के निचले स्तर पर है, जबकि कांगो ने कंसंट्रेट के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है।
एआई बूम और स्वच्छ ऊर्जा की मांग
तांबा अब केवल बिजली के तारों की धातु नहीं रहा, यह एआई का नया ईंधन बन चुका है। दुनियाभर में बन रहे विशाल एआई डेटा सेंटर्स, सर्वर रैक्स, सोलर ग्रिड्स और ईवी बैटरियों में कॉपर की खपत अनियंत्रित गति से बढ़ी है।
अमेरिकी टैरिफ की दहशत और जमाखोरी
अमेरिका में 2027 से 15 फीसदी और 2028 से 30 फीसदी संभावित आयात टैरिफ की आहट से कंपनियों ने तांबे को अमेरिकी कॉमेक्स वेयरहाउसों में डंप करना शुरू कर दिया है। नतीजा यह है कि लंदन और शंघाई में तांबे का स्टॉक सूखकर कॉमेक्स के मुकाबले आधे से भी कम (3 लाख टन) रह गया है।
कहां तक जा सकते हैं दाम?
जीसीएल ब्रोकिंग के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी रिसर्च) अमित खरे का कहना है, आपूर्ति की किल्लत और मजबूत मांग को देखते हुए आने वाले एक वर्ष में तांबा 1,650 से लेकर 2,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक जा सकता है। अमेरिकी या वैश्विक महंगाई के आंकड़े आने पर बेस मेटल्स में हल्का सुधारात्मक करेक्शन आ सकता है, लेकिन व्यापक ट्रेंड पूरी तरह से तेजी का बना हुआ है।
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म सिटीग्रुप का अनुमान है कि अगर एआई और एनर्जी ट्रांजिशन की मांग ऐसी ही रही, तो तांबा 16,000 डॉलर से लेकर 20,000 डॉलर प्रति टन के स्तर तक जा सकता है।
क्या-क्या होगा महंगा?
तांबे की रिकॉर्ड तेजी आम आदमी के पूरे घरेलू बजट पर सीधा असर डालेगी। नए मकान के निर्माण और वायरिंग की लागत बढ़ेगी। वहीं कंप्रेसर, मोटर और कंडेनसर कॉइल महंगे होने से एसी, फ्रिज, पंखे और वॉशिंग मशीन के दाम भी चढ़ेंगे। स्मार्टफोन व लैपटॉप जैसे गैजेट्स भी महंगे होंगे।
इसके अलावा एक बड़ा खतरा क्वालिटी में मिलावट का है। लागत बचाने के लिए कंपनियां पंखों और बिजली उपकरणों में तांबे की जगह एल्युमिनियम वाइंडिंग का इस्तेमाल बढ़ा सकती हैं, जिससे उपकरण जल्दी खराब होते हैं बल्कि ज्यादा बिजली भी खींचते हैं।