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11 सितंबर को बैंक हड़ताल: ब्रिक्स समिट के बीच चार दिन ठप रहेंगी बैंकिंग सेवाएं, क्या ग्राहकों को होगी परेशानी?

Thu, 10 Sep 2026 07:58 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 10 Sep 2026 07:58 PM IST
सार

11 सितंबर को बैंक यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सेवाएं प्रभावित होंगी। पांच-दिवसीय बैंकिंग और अन्य मांगों को लेकर यह हड़ताल बुलाई गई है, जिससे ग्राहकों को चार दिनों तक परेशानी हो सकती है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 

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Banking Services to be Impacted: Unions Call for Nationwide Strike on September 11
बैंक हड़ताल - फोटो : amarujala.com

विस्तार

देश की राजधानी में हो रहे ब्रिक्स समिट के बीच सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 11 सितंबर को बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहेंगी। इसके बाद भी इसका असर दिख सकता है। बैंक संघों ने पांच-दिवसीय बैंकिंग और अन्य लंबित मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इस हड़ताल के कारण देश के कई हिस्सों में बैंकिंग सेवाएं लगातार चार दिनों तक बाधित रह सकती हैं। 11 सितंबर शुक्रवार है, जिसके बाद अगले दो दिन बैंक अवकाश रहेंगे।

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कुछ राज्यों में 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के कारण भी अवकाश रहेगा। अधिकांश सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने अपने ग्राहकों को हड़ताल के संभावित प्रभाव के बारे में सूचित किया है। एसबीआई ने ग्राहकों को परामर्श दिया है कि बैंक ने सामान्य कामकाज सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं। हालांकि, हड़ताल के कारण बैंक के काम पर असर पड़ने की संभावना है।

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हड़ताल क्यों हो रही है?

बैंक कर्मचारी और अधिकारी संघों के निकाय यूएफबीयू ने यह हड़ताल बुलाई है। उनकी मुख्य मांग पांच-दिवसीय बैंकिंग को लागू करना है। यह मुद्दा लंबे समय से लंबित है और सरकार ने इस पर कोई प्रतिबद्धता नहीं दी है। मुख्य श्रम आयुक्त के समक्ष हुई सुलह बैठकों में भी कोई समाधान नहीं निकला। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन (एआईबीओसी) के महासचिव रूपम रॉय ने कहा कि सरकार और प्रबंधन की कार्रवाइयों के कारण संघों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ा है।

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ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?

हड़ताल के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में नकद निकासी और जमा जैसी सेवाएं प्रभावित होंगी। चूंकि 11 सितंबर शुक्रवार है और उसके बाद दो दिन बैंक अवकाश हैं, इसलिए कई जगहों पर लगातार चार दिनों तक बैंकिंग कामकाज ठप रह सकता है। इससे ग्राहकों को वित्तीय लेनदेन में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। एसबीआई ने भी अपने ग्राहकों को काम प्रभावित होने की संभावना के बारे में आगाह किया है।

अन्य प्रमुख मांगें क्या हैं?

पांच-दिवसीय बैंकिंग के अलावा, संघों की कुछ अन्य मांगें भी हैं। इनमें पेंशन का अद्यतन और सुधार शामिल है। सभी पेंशनभोगियों के लिए एक समान महंगाई भत्ता सूत्र की मांग भी की गई है। इसके साथ ही, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत कवर किए गए कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) में बदलने का विकल्प देने की मांग भी अनसुलझी है। 



नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉइज (एनसीबीई) के महासचिव एल चंद्रशेखर ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार के कार्यालयों, भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय जीवन बीमा निगम, भारतीय सामान्य बीमा निगम और नाबार्ड सहित कई अन्य संस्थानों में पहले से ही पांच-दिवसीय कार्य सप्ताह का पालन किया जाता है। शेयर बाजार, मुद्रा बाजार और विदेशी मुद्रा बाजार भी पांच-दिवसीय आधार पर काम करते हैं। यूएफबीयू ने 28 सितंबर से शुरू होने वाली तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल की भी धमकी दी है, जो अर्ध-वार्षिक समापन के साथ मेल खाएगी।

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