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#जीएसटीएकवर्षः छोटी सी अवधि में ही जगाई बड़ी उम्मीदें, कमाई में 12 लाख हजार करोड़ का उछाल

Sun, 01 Jul 2018 05:43 AM IST
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 01 Jul 2018 05:43 AM IST
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 gst has increased government income by 12 lakh thousand crore rupees

अप्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में सबसे बड़े सुधार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली के एक साल पूरे होने वाले हैं और इस छोटी सी अवधि में ही इसने बहुत बड़ी उम्मीद जगाई है। इससे न सिर्फ सरकार का राजस्व बढ़ा, बल्कि कारोबारियों का भी कारोबार आसान हुआ और उन्हें बही-खाते से फुर्सत मिल गई। हालांकि, इसमें कुछ खामियां भी हैं, जिसे सुधारने की जरूरत है, चाहे वह जीएसटी नेटवर्क से जुड़ा मुद्दा हो या निर्यातकों के रिटर्न का।  

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प्रणाली में सुधार की आवश्यकता
छोटे कारोबारियों के लिए काम करने वाले जीएसटी पेशेवर सहदेव बहादुर का कहना है कि अभी भी प्रणाली में सुधार की बेहद जरूरत है। अभी तक सिस्टम में पता नहीं चलता कि कारोबारी ने जो रिटर्न दाखिल किया है, उसमें इनपुट टैक्स क्रेडिट मिल रहा है या नहीं। साथ ही, हर चरण में जो वैल्यू एडिशन होता है, उसमें सरकार का जीएसटी मारा जा रहा है।
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रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया में दिक्कतें  
जीएसटी विशेषज्ञ चार्टर्ड अकाउंटेंट सुधीर हालाखंडी का कहना है कि जीएसटी रिटर्न संबंधी प्रक्रिया अव्यवहारिक एवं जटिल है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि जुलाई 2017 के लिए ही मुख्य रिटर्न अर्थात् जीएसटीआर-2 एवं जीएसटीआर-3 अभी तक नहीं भरवाए जा सके हैं। सरकार को भी बिल टू बिल बिक्री की सूची मांगने की जगह डीलर टू डीलर सूची मांगनी चाहिए। इससे भी प्रक्रिया बहुत सरल हो जाएगी। 

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अभी भी कारोबारियों पर विश्वास नहीं 

 gst has increased government income by 12 lakh thousand crore rupees

सुधीर हालाखंडी का कहना है कि रिटर्न मासिक के बजाय एकल त्रैमासिक की व्यवस्था होनी चाहिए। सरकार चाहे तो मासिक चालान बनाते समय ही इनपुट-आउटपुट की राशि भरवा कर अंतिम कर निकलवा ले, ताकि डीलरों को मासिक जीएसटीआर-3बी से छुटकारा मिल जाए।

उनका कहना है कि सरकार अभी भी कारोबारियों पर विश्वास नहीं कर रही है, क्योंकि रिटर्न की अधिक संख्या एवं जानकारी की जटिलता कारोबारियों पर अविश्वास का परिचायक है। हालांकि, सच्चाई यह है कि अधिकतर कारोबारियों का कर चोरी से कोई संबंध नहीं है। इसलिए इसका सरलीकरण आवश्यक है।

रिफंड व्यवस्था से निर्यातक असंतुष्ट 
जीएसटी रिफंड को लेकर कारोबारियों, खासकर निर्यातकों में भारी असंतोष है। निर्यातकों के संगठन फिओ के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता का कहना है कि जीएसटी की वजह से निर्यातकों का रिफंड समय से नहीं मिल पा रहा है।

इस वजह से उन्हें वर्किंग कैपिटल के लिए भी उधार लेना पड़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है, वह अलग। हालांकि कारोबारियों की समस्या के समाधान के लिए सरकार ने दो बार रिफंड पखवाड़े का आयोजन किया है, लेकिन इसके वांछित परिणाम नहीं दिख रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि सरकार इसके लिए कोई स्वचालित प्रणाली का विकास करे। 

सरलीकरण दिशा में हो रहा काम 
जीएसटी परिषद के सदस्य और बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने एक बार संवाददाताओं से बातचीत में स्वीकार किया था कि जीएसटी रिटर्न प्रक्रिया में सरलीकरण की गुंजाइश है और परिषद इस दिशा में काम कर रहा है। हो सकता है कि जीएसटी परिषद की अगली बैठक के दौरान इस बारे में कोई फैसला हो जाए। 

वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि देश में जीएसटी तगड़े स्वरूप में लागू हुआ और साल भर में इसने सही तरीके से काम करना शुरू कर दिया। जबकि दुनिया के अन्य देशों में इसे सफल होने में कई साल लगे। एक दक्षिण एशियाई देश में तो इसे वापस भी लेना पड़ा, लेकिन यहां ऐसी नौबत नहीं आने वाली। इसमें अब दिनों-दिन सुधार ही होगा। 

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