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Nitin Gadkari: 'सरकार की नीतियों का लक्ष्य गरीबी कम करना और रोजगार सृजन करना है', बोले नितिन गडकरी

Mon, 07 Jul 2025 05:18 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 07 Jul 2025 05:18 PM IST
सार

Nitin Gadkari: सरकार की नीतियों का लक्ष्य गरीबी कम करना और रोजगार सृजन करना है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को यह बात कही। उन्होंने आर्थिक उदारीकरण के प्रति आगाह करते हुए कहा कि इससे धन कुछ लोगों के हाथों में केंद्रित हो सकता है। केंद्रीय मंत्री ने आगे क्या कहा, आइए जानें।

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Govt policies aimed at reducing poverty, creating jobs: Gadkari
नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री - फोटो : ANI

विस्तार

सरकार की नीतियों का लक्ष्य गरीबी कम करना और रोजगार सृजन करना है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को यह बात कही। उन्होंने आर्थिक उदारीकरण के प्रति आगाह करते हुए कहा कि इससे धन कुछ लोगों के हाथों में केंद्रित हो सकता है।

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उन्होंने सीए स्टूडेंट्स-2025 के राष्ट्रीय सम्मेलन में अपने संबोधन में कहा, "हमारा उद्देश्य एक ऐसा आर्थिक विकल्प तैयार करना है, जो गरीबी को खत्म करेगा, युवाओं के लिए रोजगार पैदा करेगा और धन सृजन को बढ़ावा देगा।" उन्होंने कहा कि "हमें ऐसे आर्थिक विकल्प की जरूरत है।"
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उन्होंने कहा कि पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली पिछली सरकारों ने आर्थिक उदारीकरण का ढांचा अपनाया था। मंत्री ने आगाह करते हुए कहा, "लेकिन आर्थिक उदारीकरण के साथ हमें यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अर्थव्यवस्था का केंद्रीकरण न हो। ऐसा नहीं होना चाहिए कि गरीबों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती जाए, जबकि संपत्ति कुछ लोगों के हाथों में केंद्रित होती जाए।"
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मंत्री ने कहा, "आर्थिक परिदृश्य में (पिछले दशक में) व्यापक परिवर्तन आया है और इस परिवर्तन में आपकी भूमिका महत्वपूर्ण है।" इस कार्यक्रम में गडकरी ने कृषि, विनिर्माण, कराधान और बुनियादी ढांचे के विकास में सार्वजनिक-निजी भागीदारी सहित कई मुद्दों पर बात की।

उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की उभरती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा, "सीए अर्थव्यवस्था के विकास इंजन हो सकते हैं। हमारी अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है। यह केवल आयकर रिटर्न दाखिल करने और जीएसटी जमा करने के बारे में नहीं है।"

बुनियादी ढांचे के विकास पर बात करते हुए गडकरी ने परिवहन क्षेत्र में अपनी पहल पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "मैंने ही सड़क निर्माण के लिए बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर प्रणाली शुरू की थी।" उन्होंने कहा कि सड़क विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं है। गडकरी ने कहा, "कभी-कभी मैं कहता हूं कि मेरे पास धन की कमी नहीं है, बल्कि मेरे पास काम की कमी है।"

उन्होंने कहा, "अभी हम टोल बूथों से करीब 55,000 करोड़ रुपये कमाते हैं और अगले दो साल में हमारी आय 1.40 लाख करोड़ रुपये हो जाएगी। अगर हम इसे अगले 15 साल तक मौद्रीकृत करते हैं तो हमारे पास 12 लाख करोड़ रुपये होंगे। नए टोल से हमारे खजाने में और पैसा आएगा।" मंत्री ने क्षेत्रीय सम्पर्क और निवेश बढ़ाने के उद्देश्य से बनाई गई परियोजनाओं के बारे में भी बात की।

उन्होंने कहा, "हम केदारनाथ में 5,000 करोड़ रुपये की लागत से रोपवे का निर्माण कर रहे हैं। ठेकेदार यह राशि खर्च करने और केंद्र सरकार को 800 करोड़ रुपये की रॉयल्टी देने के लिए तैयार है। जब उत्तराखंड सरकार ने हमसे रॉयल्टी साझा करने के लिए कहा, तो मैंने पूछा कि क्या वे घाटे में चल रही इकाइयों को भी रॉयल्टी साझा करेंगे।" घरेलू निवेश के बारे में गडकरी ने कहा कि उन्होंने विदेशी सहायता के बिना इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट) बांड के जरिए धन जुटाया है।


उन्होंने कहा, "मैं कनाडा या अमेरिका जैसे विदेशी देशों से धन स्वीकार नहीं कर रहा हूं। मैं देश के गरीब लोगों से जुटाए गए धन से सड़कें बनवाऊंगा।" उन्होंने कहा कि जो हिस्सा 100 रुपये था, वह अब बढ़कर 160 रुपये हो गया है और लोगों को लगभग 18 से 20 प्रतिशत रिटर्न मिलेगा।

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