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Gold: क्या सरकार सोने की हॉलमार्किंग को अनिवार्य करने जा रही है, उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने दिया जवाब

Fri, 06 Dec 2024 05:17 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 06 Dec 2024 05:17 PM IST
सार

Gold: नई दिल्ली में सीआईआई रत्न व आभूषण सम्मेलन को संबोधित करते हुए उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने जोर दिया कि लोगों को गुणवत्तापूर्ण व सटीक उत्पाद उपलब्ध कराकर उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने की आवश्यकता है। उन्होंने आगे क्या कहा आइए जानें।

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Govt contemplating to make hallmarking of gold bullion mandatory: Consumer Affairs Secy Nidhi Khare
सोने की हॉलमार्किंग - फोटो : PTI

विस्तार

उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के अनुसार सरकार सोने के बुलियन की हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। साथ ही, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के प्रयासों के तहत प्रयोगशाला में विकसित हीरों के लिए नियम भी तैयार की जा रही है।

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नई दिल्ली में सीआईआई रत्न व आभूषण सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोगों को गुणवत्तापूर्ण व सटीक उत्पाद उपलब्ध कराकर उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने की आवश्यकता है।
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खरे ने कहा, "रत्न व आभूषण क्षेत्र हमारी अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो निर्यात और रोजगार दोनों में महत्वपूर्ण योगदान देता है।" सचिव ने स्वर्ण आभूषणों और स्वर्ण कलाकृतियों की अनिवार्य हॉलमार्किंग के सफल कार्यान्वयन पर प्रकाश डाला, जो 23 जून, 2021 से शुरू हुआ।
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उन्होंने कहा कि 40 करोड़ से अधिक स्वर्ण आभूषणों को एक अद्वितीय एचयूआईडी के साथ हॉलमार्क किया गया है, जिससे बाजार में उपभोक्ताओं के लिए अधिक विश्वास और पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।

खरे ने कहा, "सोने के बुलियन की हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है और यह विभाग में विचाराधीन है।"

सचिव ने कहा, "समग्र विचार यह है कि हालांकि जौहरी वास्तव में सोना आयात कर रहे हैं, लेकिन कई बार वे स्वयं भी उस सोने की गुणवत्ता के बारे में सुनिश्चित नहीं होते हैं जो उन्हें प्राप्त हो रहा है या वे खरीद रहे हैं। इसलिए मेरा मानना है कि संपूर्ण मूल्य शृंखला की सत्यता, सटीकता, ईमानदारी और सच्चाई की पहचान किए जाने की आवश्यकता है।"

खरे ने कहा कि भारत के रत्न व आभूषण क्षेत्र का बाजार आकार 2030 तक 134 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2023 में लगभग 44 अरब अमेरिकी डॉलर रहा है।

सचिव ने कहा कि इसके अलावा, भारत विश्व स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा सोने का निर्यातक भी है, भारत के कुल निर्यात में इसका योगदान लगभग 3.5 प्रतिशत का होता है।

खरे ने कहा, "भारत सरकार इस क्षेत्र की क्षमता को पहचानती है और इसे निर्यात संवर्धन के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में नामित किया है।"
स्वर्ण आभूषणों की अनिवार्य हॉलमार्किंग के बारे में विस्तार से बताते हुए सचिव ने कहा कि पंजीकृत आभूषण विक्रेताओं की संख्या बढ़कर लगभग 1.95 लाख हो गई है, जबकि परख और हॉलमार्किंग केंद्रों (एएचसी) की संख्या लॉन्च होने के बाद से 1,600 से अधिक हो गई है।

खरे ने यह भी कहा कि उपभोक्ता मामले विभाग प्रयोगशाला में तैयार किए गए हीरों के लिए नियम बना रहा है, ताकि प्राकृतिक हीरे खरीदने वाले उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जा सके, क्योंकि प्राकृतिक हीरे काफी महंगे होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला में निर्मित हीरों की मांग बढ़ रही है।


खरे ने उद्योग से भारतीय आभूषणों को वैश्विक बाजारों में लोकप्रिय बनाने के लिए प्रयास करने का आह्वान किया। रत्न व आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के कार्यकारी निदेशक सब्यसाची रे ने कहा कि कच्चे माल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए स्वर्ण बुलियन की अनिवार्य हॉलमार्किंग की आवश्यकता है।

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