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सरकार ने दी राहत: महंगाई रोकने के लिए चीनी निर्यात पर लगाई रोक, खाने के तेल के आयात पर टैक्स में छूट

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Wed, 25 May 2022 12:26 AM IST
सार

छूट से घरेलू कीमतों को कम करने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इससे उपभोक्ताओं को काफी राहत मिलेगी।

तेल आयात में छूट
तेल आयात में छूट - फोटो : pixabay
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विस्तार

बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सरकार ने गेहूं की तरह अब चीनी निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा, एक बार फिर पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती की जा सकती है।  



चीनी के निर्यात पर एक जून से पाबंदी
सरकार ने मंगलवार को चीनी के निर्यात पर एक जून से पाबंदी लगा दी, जिसका उद्देश्य घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता बढ़ाना और मूल्य वृद्धि को रोकना है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने कहा कि "चीनी सीजन 2021-22 (अक्टूबर-सितंबर) के दौरान देश में चीनी की घरेलू उपलब्धता और मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार अगले आदेश तक एक जून, 2022 से चीनी निर्यात को नियंत्रित करेगी। सरकार 100 एलएमटी (लाख मीट्रिक टन) तक चीनी निर्यात की अनुमति देगी।"

विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना में कहा, ‘‘चीनी (कच्ची, परिष्कृत और सफेद चीनी) का निर्यात एक जून, 2022 से प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है।’’

हालांकि, इसने कहा कि ये पाबंदी सीएक्सएल और टीआरक्यू के तहत यूरोपीय संघ और अमेरिका को निर्यात की जा रही चीनी पर लागू नहीं होगी। सीएक्सएल और टीआरक्यू के तहत इन क्षेत्रों में एक निश्चित मात्रा में चीनी का निर्यात किया जाता है। एक बयान में, सरकार ने कहा कि चीनी मौसम 2021-22 (अक्टूबर-सितंबर) के दौरान देश में चीनी की घरेलू उपलब्धता और मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए, उसने एक जून से चीनी निर्यात को विनियमित करने का निर्णय लिया गया है।

उसने कहा, ‘‘सरकार ने चीनी मौसम 2021-22 (अक्टूबर-सितंबर) के दौरान घरेलू उपलब्धता और मूल्य स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से 100 एलएमटी (लाख मीट्रिक टन) तक चीनी के निर्यात की अनुमति देने का निर्णय लिया है।’’


उसने कहा, ‘‘डीजीएफटी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, एक जून, 2022 से 31 अक्टूबर, 2022 तक, या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, चीनी के निर्यात की अनुमति चीनी निदेशालय, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की विशिष्ट अनुमति के साथ दी जाएगी।’’

बता दें कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। निर्यात के मामले में दूसरे नंबर पर है। ब्राजील सबसे ज्यादा चीनी निर्यात करता है। चीनी उद्योग संगठन इस्मा का कहना है कि चालू विपणन सीजन में रिकॉर्ड 90 लाख टन चीनी का निर्यात हो सकता है। अब तक 70 लाख टन का निर्यात हो चुका है और कुल 83 लाख टन के लिए करार हुआ है। पिछले साल 72 लाख टन निर्यात किया गया था। इससे पहले सरकार ने 16 मई को गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था।

सरकार ने तेल की घरेलू कीमतों को कम करने के लिए मंगलवार को कच्चे सोयाबीन और सूरजमुखी के तेल के सालाना 20 लाख मीट्रिक टन आयात पर सीमा शुल्क और कृषि बुनियादी ढांचे के विकास उपकर से छूट दी है। वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी के तेल के लिए प्रति वर्ष 20 लाख मीट्रिक टन का शुल्क मुक्त आयात दो वित्तीय वर्ष (2022-23, 2023-24) के लिए लागू होगा। छूट से घरेलू कीमतों को कम करने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। सीबीआईसी ने ट्वीट किया, इससे उपभोक्ताओं को काफी राहत मिलेगी।

सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती की थी 
पिछले हफ्ते तेल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती की थी और स्टील और प्लास्टिक उद्योग में इस्तेमाल होने वाले कुछ कच्चे माल पर आयात शुल्क भी माफ कर दिया था। इसके अलावा लौह अयस्क और लौह छर्रों पर निर्यात शुल्क बढ़ाया गया था। 

ईंधन से लेकर सब्जियों और खाना पकाने के तेल तक सभी वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ने थोक मूल्य मुद्रास्फीति को अप्रैल में 15.08 प्रतिशत के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर धकेल दिया और खुदरा मुद्रास्फीति आठ साल के उच्च स्तर 7.79 प्रतिशत पर पहुंच गई। उच्च मुद्रास्फीति ने रिजर्व बैंक को इस महीने की शुरुआत में बेंचमार्क ब्याज दर को 40 आधार अंक बढ़ाकर 4.40 प्रतिशत करने के लिए एक आपात बैठक आयोजित करने पर मजबूर कर दिया था।

2022-23 में सरकारी गेहूं खरीद 53 प्रतिशत घटकर 182 लाख टन पर
सरकार की गेहूं खरीद विपणन वर्ष 2022-23 में पिछले वित्तवर्ष की तुलना में अब तक 53 प्रतिशत घटकर 182 लाख टन रह गई है। इसका मुख्य कारण निर्यात के लिए निजी कारोबारियों द्वारा गेहूं की आक्रामक खरीदारी करना है। सरकारी सूत्रों ने यह जानकारी दी। रबी विपणन वर्ष अप्रैल से मार्च तक चलता है लेकिन अधिकांश खरीद जून तक समाप्त हो जाती है। पिछले विपणन वर्ष में अबतक की सर्वाधिक 433.44 लाख टन गेहूं की खरीद की गई थी।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत आवश्यकता को पूरा करने के लिए सरकारी उपक्रम भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य की खरीद एजेंसियां न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर इस अनाज की खरीद करती हैं। गेहूं उत्पादन में गिरावट और निर्यात में वृद्धि के कारण मौजूदा वर्ष के लिए गेहूं खरीद लक्ष्य को संशोधित कर 195 लाख टन कर दिया गया है, जो पहले 444 लाख टन था। सरकारी सूत्रों के अनुसार, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में सरकारी एजेंसियों द्वारा गेहूं की खरीद कम रही।

विपणन वर्ष 2022-23 में सरकार की गेहूं खरीद घटकर 96 लाख टन रह गई, जबकि एक साल पहले यह 132 लाख टन रही थी। इसी तरह हरियाणा में गेहूं की खरीद 84 लाख टन से घटकर 40 लाख टन रह गई, जबकि मध्य प्रदेश में इसी अवधि के दौरान खरीद पहले के 118 लाख टन से घटकर 42 लाख टन रह गई। उत्तर प्रदेश में विपणन वर्ष 2022-23 में गेहूं की खरीद तेज गिरावट के साथ 2.64 लाख टन रह गई, जो एक साल पहले की अवधि में 33 लाख टन रही थी। सूत्रों ने कहा कि राजस्थान के मामले में इसी अवधि में 16 लाख टन की तुलना में खरीद सिर्फ 1,010 टन की हुई। सूत्रों ने सरकार की खरीद में तेज गिरावट का की वजह निर्यात करने के लिए निजी कंपनियों द्वारा की गई आक्रामक खरीदारी को बताया। सरकार ने कीमतों पर नियंत्रण के लिए 13 मई को गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था।

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