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अभी नहीं घटेगा पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क, केंद्र सरकार ने राज्यों से वैट कम करने का किया आह्वान

Fri, 01 Jun 2018 11:23 AM IST
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 01 Jun 2018 11:23 AM IST
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government not to cut excise duty on petrol-diesel, will ask states to cut vat
आसमान छूते पेट्रोल-डीजल के दाम को कम करने के लिए केंद्र सरकार फिलहाल उत्पाद शुल्क में किसी तरह की कटौती पर विचार नहीं कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस समय राजकोषीय हालात ऐसे नहीं हैं कि इन ईंधनों पर कर में कटौती की जाए।
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हालांकि, केरल सरकार ने वैट में एक रुपया प्रति लीटर की कटौती का फैसला कर लिया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इस समय सिर्फ पेट्रोल-डीजल पर लगाए गए कर से सरकार को साल में करीब ढाई लाख करोड़ रुपये का राजस्व मिल रहा है।
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इस समय जिस तरह से ढांचागत संरचना के निर्माण के साथ साथ लोक कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च हो रहा है, उसे देखते हुए राजस्व के नए स्रोत खोजने की आवश्यकता है, न कि पुराने स्रोतों को कम करने की। इसके अलावा, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली पर राज्यों को सहमत करने के लिए उनके राजस्व में कमी की सूरत में पांच साल तक आमदनी की भरपाई भी केंद्र सरकार ही करेगी। 
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एक रुपया घटाने से 13,000 करोड़ का नुकसान  
अधिकारी का कहना है कि यदि पेट्रोल या डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में एक रुपये की भी कमी की जाए, तो राजस्व में प्रति वर्ष 13,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। मान लिया जाए कि डीजल पर दो रुपये और पेट्रोल पर दो रुपये की एक्साइज ड्यूटी कम की जाती है, तो पूरे वर्ष में सरकार के राजस्व में करीब 52,000 करोड़ रुपये की कमी हो जाएगी।

जब इन दोनों ईंधनों पर सब्सिडी दी जाती थी, तब यह बिल करीब 60 हजार करोड़ रुपये का होता था। मतलब सिर्फ दो रुपये की कटौती से सब्सिडी बजट पुराने स्तर पर पहुंच जाएगा। 

उत्पाद शुल्क में सिर्फ एक बार कटौती 

government not to cut excise duty on petrol-diesel, will ask states to cut vat

जब केंद्र में मोदी सरकार बनी, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में गिरावट का रुख था। लेकिन सरकार ने पेट्रोल एवं डीजल की कीमत घटाने के बजाय 15 महीने में दोनों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में नौ बार बढ़ोतरी कर दी।

इस तरह से डीजल पर प्रति लीटर 13.57 रुपये, जबकि पेट्रोल पर 11.77 रुपये का बोझ बढ़ गया। हालांकि, जब कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम एक बार फिर से बढ़ने लगे, तो अक्तूबर 2017 में दोनों ईंधनों पर प्रति लीटर दो रुपये का उत्पाद शुल्क ही घटाया गया है। 

राज्य करे पहल 
केंद्र सरकार का कहना है कि पेट्रोल और डीजल पर सिर्फ केंद्र ही नहीं, बल्कि राज्य सरकारें भी काफी वैट वसूलती हैं। फिलहाल वह कर कम करे। इस दिशा में केरल ने बेहतर कदम उठाया है और अन्य राज्य भी ऐसा करे। पीपीएसी के मुताबिक, राज्यों में इस समय पेट्रोल पर अधिकतम 39.78 फीसदी (महाराष्ट्र में) और डीजल पर अधिकतम 28.47 फीसदी (आंध्र प्रदेश में) वैट वसूला जा रहा है। दिल्ली में पेट्रोल पर 27 फीसदी जबकि डीजल पर 17.27 फीसदी वैट है।  

कुछ दिनों में खुद घटेगी कीमतें 
केंद्रीय वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में नरमी आनी शुरू हो गई। अगले कुछ दिनों में यहां भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें अपने आप नरम हो जाएंगी।

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