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क्या 2022 तक किसानों की आय दोगुनी कर पाएगी सरकार? जानिए बजट 2021 से क्या हैं उम्मीदें
Mon, 01 Feb 2021 08:19 AM IST
डिंपल अलवधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Mon, 01 Feb 2021 08:19 AM IST
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2021-22 के बजट में बढ़ सकता है कृषि ऋण का लक्ष्य
- फोटो : pixabay
किसान मोदी सरकार द्वारा बनाए गए नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों का आंदोलन कईं दिनों से जारी है। दोनों पक्षों के बीच बैठकें भी हुई। किसानों ने सरकार के प्रस्ताव को ठुकराते हुए आंदोलन जारी रखने का एलान किया है। वहीं दूसरी ओर सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के मकसद को ध्यान में रखते हुए कृषि ऋण का लक्ष्य 2021-22 के बजट में बढ़ाकर करीब 19 लाख करोड़ रुपये कर सकती है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। अगले वित्त वर्ष का बजट एक फरवरी को पेश किया जाएगा। चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने कृषि ऋण का लक्ष्य 15 लाख करोड़ रुपये रखा है।
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2020-21 के बजट में की थी ये घोषणा
सूत्रों ने कहा कि सरकार कृषि क्षेत्र के लिए हर साल कर्ज का लक्ष्य बढ़ाती रही है और इस बार भी 2021-22 के लिए लक्ष्य को बढ़ाकर करीब 19 लाख करोड़ रुपये किया जा सकता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020-21 का बजट पेश करते हुए कहा था कि, 'कृषि क्षेत्र को कर्ज देने के मामले में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) और सहकारी बैंक सक्रिय रहे हैं। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) पुनर्वित्त योजना का आगे और विस्तार किया जाएगा। वित्त वर्ष 2020-21 के लिये कृषि कर्ज का लक्ष्य 15 लाख करोड़ रुपये रखा गया है।'
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कृषि कर्ज प्रवाह में हुई वृद्धि
सूत्रों के अनुसार कृषि कर्ज प्रवाह में साल-दर-साल वृद्धि हुई है। जो भी लक्ष्य रखे गए, ऋण वितरण उससे अधिक ही रहा है। उदाहरण के लिए 2017-18 में किसानों को 11.68 करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया जबकि लक्ष्य 10 लाख करोड़ रुपये का ही था। इसी प्रकार, 2016-17 में 10.66 लाख करोड़ रुपये फसल ऋण वितरित किए गए। यह नौ लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य से कहीं अधिक था। सूत्रों के अनुसार, कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए कर्ज जरूरी है।
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ब्याज सहायता उपलब्ध कराती है सरकार
संस्थागत स्रोतों से कर्ज सुलभ होने पर किसानों को महाजनों और सूदखोर जैसे गैर-संस्थागत स्रोतों से कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती और अधिक ब्याज नहीं चुकाना पड़ता। सामान्य रूप से कृषि ऋण पर ब्याज नौ फीसदी रहता है लेकिन सरकार ब्याज सहायता उपलब्ध कराती है ताकि अल्पकाल के लिए खेती के लिए ऋण सस्ती दरों पर किसानों को उपलब्ध हो और कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिले। सरकार किसानों को दो फीसदी ब्याज सहायता उपलब्ध कराती है ताकि उन्हें छोटी अवधि के लिए तीन लाख रुपये तक का कर्ज प्रभावी रूप से सात फीसदी ब्याज पर मिल सके। इसके अलावा तीन फीसदी की सहायता उन किसानों को दी जाती है जो कर्ज का भुगतान समय पर करते हैं। इससे प्रभावी रूप से ब्याज चार फीसदी बैठता है।