SMILE: भिखारियों के पुनर्वास को लेकर सरकार ने बनाई खास रणनीति, केंद्र ने किया 'स्माइल' योजना में संशोधन
केंद्र ने भिखारियों के लिए अपने प्रमुख पुनर्वास योजना स्माइल को संशोधित किया है। इसका वार्षिक बजट 37 करोड़ रुपये रखा गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे आत्मनिर्भरता और सम्मानपूर्ण जीवन की ओर बढ़ें।
विस्तार
सरकार ने भिखारियों को सम्मानपूर्ण जीवन देने के लिए अपनी प्रमुख स्माइल योजना में संशोधन किया है। इसका वार्षिक बजट 37 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि संशोधित स्माईल योजना दंडात्मक दृष्टिकोण से हटकर अधिकार आधारित पुनर्वास मॉडल को अपनाती है। इसका उद्देश्य कमजोर वर्गों को संरचित सहायता प्रदान कर उन्हें मुख्यधारा में लाना है।
ये भी पढ़ें: घर में रखे पुराने सोने का आप कैसे उठा सकते हैं सबसे ज्यादा फायदा, जानिए कैसे
नई योजना चार स्तंभों पर आधारित
नई स्माइल (आजीविका और उद्यम के लिए हाशिए पर पड़े व्यक्तियों को सहायता) योजना चार स्तंभों पर आधारित है। इसमें सर्वेक्षण एवं पहचान, संपर्क एवं जागरूकता, बचाव एवं आश्रय, और समग्र पुनर्वास शामिल हैं। इन उपायों के माध्यम से देश के सबसे हाशिये पर पड़े समूहों को दीर्घकालिक पुनर्वास और सामाजिक सम्मान दिलाने की कोशिश की जाएगी।
कहां लागू होगी योजना?
यह योजना राज्य प्रशासन और संबंधित संगठनों के साथ साझेदारी में देश भर के तीर्थस्थलों, धार्मिक स्थलों, ऐतिहासिक स्थलों और पर्यटन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए लागू की जाएगी। योजना के संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, धार्मिक ट्रस्ट और तीर्थस्थल बोर्ड भी तीर्थस्थलों और धार्मिक स्थलों पर योजना के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
सरकार का तीन वर्षों बजट
केंद्र ने इस योजना के लिए तीन वर्षों में 100 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं , 2023-24 के लिए 30 करोड़ रुपये, 2024-25 के लिए 33 करोड़ रुपये और 2025-26 के लिए 37 करोड़ रुपये। धनराशि तीन किस्तों में जारी की जाएगी, सर्वेक्षण और लामबंदी के लिए 30 प्रतिशत, आश्रय और पुनर्वास के लिए 50 प्रतिशत, तथा सत्यापित प्रगति और पुनः एकीकरण की स्थिति के आधार पर 20 प्रतिशत।
सरकार का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य पहले वर्ष में 2,500, दूसरे वर्ष में 6,000 और तीसरे वर्ष में 8,000 लोगों का पुनर्वास करना है। प्रत्येक आश्रय गृह को भोजन, स्टाफिंग, परामर्श, कौशल विकास और जागरूकता अभियानों सहित संचालन लागतों को पूरा करने के लिए 48.7 लाख रुपये का वार्षिक बजट आवंटित किया गया है।
कैसे किया जाएगा सर्वेक्षण?
नगर निकाय और जिला प्रशासन लाभार्थियों की आयु, लिंग, कानूनी स्थिति और स्वास्थ्य स्थितियों जैसे कारकों के आधार पर विस्तृत सर्वेक्षण करेंगे। एकत्रित आंकड़ों को वास्तविक समय की निगरानी के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत एक राष्ट्रीय पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।