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Commodities Market: सरकारी एजेंसियों के सरसों खरीदने से किसानों को राहत, पर कीमत बढ़ने से ग्राहक परेशान
Tue, 28 May 2024 11:59 AM IST
नविता स्वरूप
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: नविता स्वरूप
Updated Tue, 28 May 2024 11:59 AM IST
सार
पिछले दिनों दाल के भाव में बढ़ोतरी देखने को मिली थी, तो अब सरसों के तेल के साथ मसाले में जीरे ने भी भाव का तड़का लगा दिया है। एक महीने में जीरे के भाव 260 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 385 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गए हैं। इसके साथ ही सरसों के तेल के भाव में 16 रुपये प्रति किलो की तेजी आई है।
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सरसों और जीरे की कीमतों में तेजी
- फोटो : ANI
विस्तार
सरकार की ओर से सरसों की खरीदारी करने से किसानों को तो लाभ मिल रहा है लेकिन इसकी वजह से सरसों के तेल के भाव में तेजी आई है और आदमी को सरसों के तेल के लिए अधिक खर्च करना पड़ रहा है। वहीं जीरे के दाम में भी तेजी देखी जा रही है। पिछले दिनों दाल के भाव में बढ़ोतरी देखने को मिली थी, तो अब सरसों के तेल के साथ मसाले में जीरे ने भी भाव का तड़का लगा दिया है। एक महीने में जीरे के भाव 260 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 385 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गए हैं। इसके साथ ही सरसों के तेल के भाव में 16 रुपये प्रति किलो की तेजी आई है।
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जानकारों का कहना है कि इसकी मुख्य वजह सरकारी एजेंसियों द्वारा सरसों की खरीदी की जानी है। इससे किसानों को तो राहत मिल गई है लेकिन आम आदमी को सरसों के तेल के लिए अधिक खर्च करना पड़ रहा है। सरसों का तेल 1030 रुपए प्रति 10 किलो से बढ़कर 1190 रुपये प्रति 10 किलो पर पहुंच गया है।
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भाव बढ़ने के प्रमुख कारण
अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया (कैट) महाराष्ट्र के महामंत्री शंकर ठक्कर ने बताया कि सरसों तेलों में अचानक से तेजी आने की वजह कुछ बड़े खिलाड़ियों द्वारा खेल किया गया है ऐसा दिख रहा है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेलों के दामों में बड़ी वृद्धि नहीं हुई है लेकिन देसी तेल जिसमें खासकर मूंगफली और सरसों के दामों में बड़ी वृद्धि देखने को मिल रही है, हालांकि चुनाव के बीच सरकारी एजेंसियों ने आक्रामकता से सरसों की खरीदी की है। इससे किसानों को थोड़ी राहत मिली है और दाम एमएसपी के करीब पहुंच गए हैं। लेकिन ग्राहकों को परेशानी हो रही है।
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जानकारों का कहना है कि बीते कुछ दिनों सरसों के दाम में जो तेजी है उसके पीछे का कारण सोयाबीन के उत्पादक देश ब्राजील में बाढ़ का आना है। इस वजह से सरसों के तेल की मांग बढ़ी है। विदेश में भी भाव बढ़े और वहां से आयात होते तेल के भाव में थोड़ी मजबूती आई। एक अन्य कारोबारी राहुल जैन का कहना है कि देश में सरसों की पैदावर अधिक होने की बात कही जा रही है, लेकिन अब पैदावार का अनुमान अब 25 प्रतिशत कम कहा जा रहा है।
सरसों तेल के उद्यमी गोविंद सिंह बताते हैं कि सरसों के तेल के दाम पिछले कुछ दिनों में बढ़े हैं। इसी तरह इसकी खली के दामों में बढ़ोतरी हो रही है। उनका कहना है तेजी आगे जारी रहने का अनुमान है। बड़ी फैक्ट्रियों की मांग पूरी न होने की वजह से भी सरसों के भाव में तेजी आई है।
जीरे के भी भाव बढ़े
जीरे के भाव में आई तेजी पर मुंबई के मसाला थोक व्यापारी हरि गाला का कहना है कि जीरा की पैदावार अधिकतर गुजरात में होती है। जबकि इस साल जीरा की पैदावार अच्छी हुई है लेकिन पिछले साल के भाव को देखते हुए कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भंडारण और किसानों ने जीरा को बाजार में आने से रोक लिया है इसके कारण जीरा के भाव में तेजी देखने को मिल रही है।