खुशखबरी: नहीं बढ़ेगा वीआईपी ट्रेनों का किराया, प्रभु ने दिलाया भरोसा
राजधानी, दुरंतो और शताब्दी ट्रेनों में शुक्रवार से शुरू हुआ फ्लैक्सी किराया फार्मूला वापस लिया जा सकता है। विपक्ष के तीखे हमलों के बीच भाजपा की ओर से जताई गई नाराजगी के बाद रेलवे ने अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आश्वासन दिया है।
भाजपा की ओर से रेलमंत्री सुरेश प्रभु को यह संदेश भिजवाया गया था कि इस फार्मूले के लागू होने से न सिर्फ सरकार की छवि को धक्का लगेगा, बल्कि इससे मध्यम वर्ग के नाराज होने का भी खतरा है।
बताते हैं कि खुद रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा हवाई यात्रा किराया फार्मूला की तरह रेल यात्रा में चुनिंदा ट्रेनों में इस फार्मूले को लागू करने पर सहमत नहीं थे।
पार्टी सूत्र के मुताबिक भाजपा की ओर से रेल मंत्रालय को अपनी आपत्ति दर्ज करा दी गई है। पार्टी का मानना है कि रेलवे इस फार्मूले के तहत एक साल में अधिकतम 500 करोड़ रुपये ही अतिरिक्त मुनाफा कमा सकती है, मगर इसका असर बेहद बुरा होगा।
बीजेपी को डर इस फार्मूले से नाराज होगा मध्यम वर्ग
खास तौर पर इन ट्रेनों में यात्रा करने वाला मध्यम वर्ग इस फार्मूले से नाराज होगा। इसके अलावा महज 500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई के लिए अपनाए गए इस तरीके से सरकार की छवि को धक्का लगेगा।
पार्टी ने यह भी सुझाया है कि इस फार्मूले को लागू करने के बदले किराये में सामान्य तौर पर होने वाली बढ़ोत्तरी का इस्तेमाल किया जाए। पार्टी की ओर से एतराज जताने के बाद रेल मंत्रालय ने अपने इस फैसले पर पुनर्विचार का आश्वासन दिया है। हालांकि इस किराया फार्मूले को उचित ठहराने के लिए रेलवे की ओर से पार्टी को कई तरह के तर्क दिए जाने के साथ ही रेलवे की माली हालत का भी हवाला दिया गया।
रेलवे का कहना था कि प्रतिदिन 12000 ट्रेनों में 2.30 करोड़ लोग रेल यात्रा करते हैं। इनमें राजधानी, दुरंतो और शताब्दी ट्रेनों की संख्या 81 है, में महज 1 फीसदी यात्री ही यात्रा करते हैं। ऐसे में इस फैसले का सीमित प्रभाव पड़ेगा। जबकि पार्टी का तर्क था कि इन ट्रेनों में यात्रा करने वाले मध्यम वर्ग के लोग हैं जो पार्टी समर्थक हैं। ऐसे में यह फैसला इस वर्ग में सरकार के प्रति गहरी नाराजगी पैदा कर सकता है।