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आर्थिक मंदी ने रोकी देश की तरक्की की रफ्तार, 5 फीसदी पर पहुंची जीडीपी

Fri, 30 Aug 2019 09:02 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: paliwal पालीवाल Updated Fri, 30 Aug 2019 09:02 PM IST
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gdp in first quarter of financial year declines to 5 percent, recession fears escalates further
gdp

मंदी के चलते देश की विकास दर में गिरावट देखने को मिली है। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी 5.8 फीसदी से घटकर के पांच फीसदी रह गई है। वित्त मंत्रालय के केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने इन आंकड़ों को जारी किया है। पिछले साल यह इसी दौरान आठ फीसदी के पार थी। वहीं पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में यह 5.8 फीसदी थी। 

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साढ़े छह साल में सबसे सुस्त रफ्तार

वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर की पिछले साढ़े छह सालों में सबसे ज्यादा सुस्त रफ्तार देखने को मिली। जिन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली उनमें उत्पादन या फिर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 12.1 फीसदी के मुकाबले 0.6 फीसदी ग्रोथ देखने को मिली। 



  • कृषि क्षेत्र में ग्रोथ 5.1 फीसदी से घटकर के दो फीसदी रह गई है।
  • खनन क्षेत्र में ग्रोथ 0.4 फीसदी की ग्रोथ देखने को मिली थी, जो अब बढ़कर के 2.7 फीसदी हो गई है।
  • कंस्ट्रक्शन सेक्टर में पिछले साल की पहली तिमाही में ग्रोथ 9.6 फीसदी थी जो अब घटकर के 5.7 फीसदी रह गई है। 
  • होटल, ट्रांस्पोर्ट और ट्रेड सेक्टर में ग्रोथ 7.8 फीसदी से घटकर के 7.1 फीसदी रह गई है। 
  • वित्तीय, रियल एस्टेट सेक्टर में ग्रोथ 6.5 फीसदी से घटकर के 5.9 फीसदी रह गई है। 

कार्वी स्टॉक ब्रॉकिंग के सीईओ राजीव सिंह ने बताया कि महंगाई दर के कम होने से सरकार अब भी कई क्षेत्रों जैसे कि ऑटो उद्योग, घरेलू आयात, हवाई यातायात में कमी देखने को मिल रही है। अब आरबीआई से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल सरकार इन सेक्टर में कर सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिल सके। अगर सरकार ने इस 1.76 लाख करोड़ राशि का इस्तेमाल इसके लिए नहीं किया तो फिर यह संकट और गहरा सकता है। फिच इंडिया रेटिंग ने इस साल जीडीपी के 6.7 फीसदी रहने की संभावना जताई है। पिछली बार यह अनुमान 7.3 फीसदी था। 

मरहम पट्टी वाले तरीकों से नहीं होगा काम

इसके साथ ही एजेंसी ने कहा है कि सरकार द्वारा मरहमपट्टी वाले तरीकों से अर्थव्यवस्था को किसी तरह का कोई लाभ नहीं पहुंचेगा। हालांकि एजेंसी को उम्मीद है कि चालू खाता घाटा 3.3 फीसदी रहेगा। एजेंसी का यह भी कहना सरकार को मंदी से उबरने के लिए आरबीआई से मिलने 1.76 लाख करोड़ रुपये के पैकेज से ज्यादा लाभ नहीं मिलेगा। 

मूडीज ने भी घटाया था अनुमान

इससे पहले शुक्रवार को वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने मंदी के बीच देश की विकास दर के अनुमान को घटा दिया था। एजेंसी ने वित्त वर्ष 2019 और 2020 के लिए जीडीपी अनुमान में भारी कटौती की है।  एजेंसी ने वित्त वर्ष 2019 के लिए जीडीपी को 6.80 फीसदी से घटाकर के 6.20 फीसदी कर दिया है। वहीं 2020 के लिए जीडीपी को 7.30 फीसदी से घटाकर के 6.7 फीसदी कर दिया है। एजेंसी ने बयान जारी करते हुए कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी का माहौल है, जिससे एशियाई देशों में भी असर देखने को मिला है। इससे निवेश का वातावरण भी प्रभावित हुआ है। भारत से दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था का ताज छिन गया है। साल 2018 में अर्थव्यवस्था सुस्त रहने की वजह से विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक भारत अब सातवें पायदान पर पहुंच गया है।

 

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