एफसीएनआर: बैंकों के पास मौजूद थी ₹4.45 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी, आरबीआई ने अपने पास मंगाए ₹75,026 करोड़
बैंकों में 4.45 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने वीआरआरआर नीलामी के जरिए 75,026 करोड़ रुपये अपने पास ले लिए हैं। जानिए क्या है वीआरआरआर, ओएमओ और सरप्लस लिक्विडिटी का आसान मतलब।
विस्तार
बैंकों के पास जरूरत से ज्यादा पैसा है और इसी अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबआई) ने बुधवार को बड़ा कदम उठाया। आरबीआई ने ओवरनाइट वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) नीलामी के जरिए बैंकिंग सिस्टम से ₹75,026 करोड़ खींच लिए। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब 22 सितंबर तक बैंकिंग सिस्टम में करीब 4.45 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी मौजूद थी। अब सवाल यह है कि आखिर बैंकों में इतना पैसा आया कहां से और RBI इसे वापस क्यों खींच रहा है?
बैंकिंग सिस्टम में इतनी अतिरिक्त नकदी क्यों जमा हुई?
बैंकिंग सिस्टम में बड़ी मात्रा में नकदी आने की प्रमुख वजह एफसीएनआर (बी) जमा रही है। बैंकों ने इन जमाओं के जरिए विदेशी मुद्रा जुटाई। इसके बाद आरबीआई के साथ हुए स्वैप से बैंकों को रुपये की अतिरिक्त नकदी उपलब्ध हुई।
इसके अलावा महीने के अंत में सरकार की ओर से वेतन और पेंशन समेत अन्य खर्चों के भुगतान ने भी बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढ़ाई। नतीजतन बैंकों के पास उपलब्ध धन की मात्रा जरूरत से काफी अधिक हो गई।
आरबीआई ने 75,026 करोड़ रुपये ही क्यों स्वीकार किए?
आरबीआई ने वीआरआरआर नीलामी में 75,000 करोड़ रुपये की राशि लेने की घोषणा की थी। इसके मुकाबले बैंकों ने कुल ₹87,993 करोड़ रुपये की बोलियां लगाईं।
हालांकि आरबीआई ने इनमें से 75,026 करोड़ रुपये की बोलियां स्वीकार कीं। इन बोलियों की कट-ऑफ और वेटेड एवरेज दर 5.24 फीसदी रही।
वीआरआरआर का इस्तेमाल आरबीआई बैंकिंग सिस्टम से कुछ समय के लिए अतिरिक्त पैसा निकालने के लिए करता है। इसमें बैंक अपनी अतिरिक्त नकदी आरबीआई के पास रखते हैं और तय अवधि के बाद उसे वापस प्राप्त करते हैं।
आरबीआई बार-बार वीआरआरआर नीलामी क्यों कर रहा है?
आरबीआई पिछले महीने से लगातार अलग-अलग वीआरआरआर नीलामियां कर रहा है। इसका उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करना और ओवरनाइट मनी मार्केट की ब्याज दरों को रेपो रेट के आसपास बनाए रखना है।
अगर सिस्टम में नकदी बहुत ज्यादा हो जाए तो बाजार में छोटी अवधि की ब्याज दरों पर दबाव पड़ सकता है। ऐसे में RBI लिक्विडिटी को मैनेज करने के लिए इस तरह के उपाय करता है।
क्या आरबीआई ने सिर्फ वीआरआरआर से ही पैसा निकाला है?
नहीं। आरबीआई ने हाल में ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) के जरिए भी बैंकिंग सिस्टम से नकदी सोखने की प्रक्रिया शुरू की है।
17 सितंबर को आरबीआई ने 50,000 करोड़ रुपये और 21 सितंबर को 25,000 करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड की बिक्री की। ओएमओ में बैंक और अन्य निवेशक आरबीआई से सरकारी प्रतिभूतियां खरीदते हैं। इसके बदले पैसा आरबीआई के पास चला जाता है और सिस्टम में रुपये की नकदी कम होती है।
आरबीआई ने कुल 1 लाख करोड़ रुपये के ओएमओ बिक्री कार्यक्रम की घोषणा की है। इसकी अंतिम 25,000 करोड़ रुपये की किश्त 28 सितंबर को निर्धारित है।
आगे आरबीआई का फोकस क्या रहेगा?
फिलहाल आरबीआई का फोकस बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को धीरे-धीरे व्यवस्थित करने पर है। वीआरआरआर और ओएमओ जैसे कदमों के जरिए केंद्रीय बैंक बाजार में उपलब्ध रुपये की मात्रा और अल्पकालिक ब्याज दरों को नियंत्रित कर रहा है।
बैंकिंग सिस्टम में करीब 4.45 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी के बीच आरबीआई का 75,026 करोड़ रुपये का वीआरआरआर ऑपरेशन बताता है कि केंद्रीय बैंक लिक्विडिटी की स्थिति पर सक्रिय रूप से नजर रख रहा है। आने वाले दिनों में 28 सितंबर की प्रस्तावित 25,000 करोड़ रुपये की ओएमओ बिक्री भी इस दिशा में एक अहम कदम होगी।