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FPI Investments: भारतीय बाजार पर क्यों लौटा विदेशी निवेशकों का भरोसा? रुपये की दोबारा मजबूती से क्या होगा असर

Tue, 02 Aug 2022 03:01 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 02 Aug 2022 03:01 PM IST
सार

FPI Investments: आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार पर भरोसा यूं ही नहीं लौटा है। भारत की अर्थव्यवस्था इस समय दुनिया में सबसे ज्यादा तेज सात फीसदी से ज्यादा की गति से आगे बढ़ रही है। जबकि इसी बीच दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं नकारात्मक दर में चल रही हैं...

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FPI Investments: foreign portfolio investors into Indian equities turned net positive in July 2022
FPI Investments: शेयर बाजार - फोटो : iStock

विस्तार

भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों का भरोसा लौट रहा है। केवल जुलाई महीने में ही विदेशी निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजार में लगभग पांच हजार करोड़ रुपये का निवेश किया है। संभवतया FPI के इसी निवेश का असर हुआ कि पिछले महीने 80 रुपये से नीचे गिर चुका रुपया दोबारा मजबूत हुआ है और अब यह 79.56 रुपये तक वापस आ चुका है। विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार पर यह भरोसा ऐसी स्थिति में दिखाया है, जब इसके ठीक एक महीने पहले यानी जून में इन्हीं निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग 50 हजार करोड़ रुपये निकाल लिये थे, जिससे शेयर बाजार में नकारात्मक संदेश गया था। विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार पर भरोसा क्यों लौट रहा है?

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आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार पर भरोसा यूं ही नहीं लौटा है। भारत की अर्थव्यवस्था इस समय दुनिया में सबसे ज्यादा तेज सात फीसदी से ज्यादा की गति से आगे बढ़ रही है। जबकि इसी बीच दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं नकारात्मक दर में चल रही हैं। चीन की अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। उसके कई बैंक अपने निवेशकों को पैसा वापस करने तक की स्थिति में नहीं रह गए हैं। श्रीलंका, पाकिस्तान जैसे अनेक देशों की अर्थव्यवस्थाएं तबाही के कगार पर हैं। अमेरिकी-यूरोपीय बाजारों में महंगाई की दर बहुत ज्यादा होने से लोग शेयर बाजार में निवेश करने से बच रहे हैं।
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इसके उलट भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। सरकार का राजस्व संग्रह लगातार ऊपर जा रहा है। सरकार लगातार मूलभूत योजनाओं में निवेश बढ़ा रही है और इससे औद्योगिक सेक्टर में मांग बनी हुई है। सरकार के अलावा निजी क्षेत्र भी लगातार निवेश कर रहे हैं। सौर ऊर्जा सेक्टर, हाइड्रोजन ऊर्जा क्षेत्र, दूरसंचार क्षेत्र, मूलभूत निर्माण क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों में लगातार निवेश बढ़ रहा है। विदेशी निवेशक देख रहे हैं कि भारतीय बाजार में लगातार मांग बनी हुई है जिससे दूसरी औद्योगिक गतिविधियां भी मजबूती से चल रही हैं। यही कारण है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार पर दोबारा लौट आया है। इससे भारत को लाभ मिल सकता है।
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चूंकि भारतीय अर्थव्यवस्था का लगभग 70 फीसदी हिस्सा घरेलू मांग (उत्पाद और सेवा क्षेत्र) और निवेश के माध्यम से आता है, और इस मोर्चे पर देश ठीक गति से आगे बढ़ रहा है, लिहाजा भारतीय अर्थव्यवस्था इस चुनौतीपूर्ण समय में भी मजबूत बनी हुई है। केंद्र-राज्य सरकारों के निवेश इसे और ज्यादा मजबूती प्रदान कर रहे हैं। आने वाले समय में भी यह क्रम बना रह सकता है जिससे निवेशकों का भरोसा बाजार पर बना रह सकता है।  

निवेशकों को बेहतर रिटर्न की उम्मीद

आर्थिक विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने अमर उजाला को बताया कि विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार पर भरोसा लौटने का सबसे बड़ा कारण यह है कि उन्हें केवल भारतीय बाजार में ही निवेश का बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद दिखाई पड़ रही है। इसी समय दूसरे देशों की अर्थव्यवस्थाएं अपेक्षाकृत सिकुड़ रही हैं या बहुत कम दर से आगे बढ़ रही हैं, जबकि आईएमएफ का भी अनुमान है कि भारतीय अर्थव्यवस्था कमजोरी की स्थिति में भी सात फीसद से ज्यादा की गति से आगे बढ़ेगी। यही कारण है कि विदेशी निवेशक एक बार फिर भारतीय बाजार की तरफ लौटना शुरू हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह भरोसा बना रह सकता है।

ब्याज दर ब़ढ़ी तो क्या होगा असर

अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में 0.75 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर दी है। अनुमान है कि रिजर्व बैंक भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। इससे बाजार में तरलता में कमी आएगी और इसके परिणामस्वरूप महंगाई पर लगाम लगाने में कुछ मदद मिल सकती है। लेकिन इससे घरेलू कर्ज बाजार में दरों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे आम उपभोक्ता प्रभावित होंगे और लोन का बाजार कमजोर पड़ सकता है। इसका कुछ नकारात्मक असर बाजार में निवेश पर भी पड़ सकता है। हालांकि, यह असर सीमित समय के लिए होने का अनुमान है।

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