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सिर्फ 4 फीसदी ऑनलाइन बिकते हैं पटाखे, पूरे देश में हजार करोड़ का टर्नओवर
Tue, 23 Oct 2018 02:43 PM IST
Riya Kumari
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: Riya Kumari
Updated Tue, 23 Oct 2018 02:43 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर फिलहाल रोक लगा दी है। इसका सबसे बड़ा नुकसान दक्षिण भारत की कंपनियों को हुआ है, क्योंकि वहीं से पूरे देश में इस तरह की बिक्री की जाती है। तमिलनाडु का शिवकासी और कर्नाटक के बंगलूरू से पूरे देश में ऑनलाइन पटाखों की सेल की जाती है।
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यह है पटाखों की सबसे बड़ी वेबसाइट
तमिलनाडु के शिवकासी में स्थित कैलासवरी फायर वर्क्स की वेबसाइट पर पटाखों की सबसे ज्यादा ऑनलाइन बिक्री होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये ही कंपनी कॉकब्रांड नाम से पटाखों का निर्माण व बेचती है। कैलासवरी ने अपनी वेबसाइट पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद ऑनलाइन बिक्री को बंद कर दिया है।
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इसी तरह अन्य कंपनियां भी यह कदम उठा रही हैं। हालांकि इसके अलावा अन्य कंपनियां भी हैं, जो देश के अन्य इलाकों में स्थित हैं। शिवकासी के बाद बंगलूरू दूसरा सबसे बड़ा हब है।
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4 फीसदी ऑनलाइन बिक्री
ऑनलाइन पटाखा विक्रेता आलोक अरोड़ा ने अमरउजाला.कॉम को बताया कि देश भर में केवल 4 फीसदी पटाखों की बिक्री ऑनलाइन होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि पेमेंट लेने और पटाखों की डिलिवरी करना बड़ा जोखिम का कार्य होता है।
बैंक किसी को भी पेमेंट गेटवे देता नहीं है और आप बिना लाइसेंस के पटाखों को अन्य उत्पादों की तरह घर पर डिलिवर नहीं कर सकते हैं। एक आम ग्राहक पटाखे की दुकान पर जाकर ही इनको खरीदता है।
ई-पटाखों का भी मार्केट
लालकिला स्थित भागीरथ पैलेस मार्केट में दीपावाली के मद्देनजर नई तकनीक से तैयार ई-पटाखों की बिक्री तेजी से हो रही है। इस मार्केट में ई-पटाखा खरीद रहे वरुण शर्मा ने बताया कि ई-पटाखे काफी खास हैं। उन्होंने बताया कि इनके प्रयोग से न तो आग लगने का खतरा होता है और न ही बच्चों द्वारा चलाने पर कोई खतरा होने की संभावना है।
सबसे खास बात यह है कि इन पटाखों के प्रयोग से प्रदूषण भी नहीं फैलता। हालांकि ई-पटाखे दिखने में बारूद वाले पटाखों की लड़ी जैसे ही दिखते हैं, लेकिन फटते नहीं। लेकिन सबसे बड़े त्योहार पर इन पटाखों की खरीदारी से उनके बजट पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
क्या हैं ई-पटाखे
ई-पटाखे यानि प्रदूषण रहित ऐसे पटाखे जिनका प्रयोग बिजली के जरिये होता है। इन पटाखों की खासियत यह है कि इन्हें एक माचिस बॉक्स से थोड़े से बड़े आकार के वायरलैस रिमोट कंट्रोल से चलाया जाता है। इन पटाखों के चलाने के लिए किसी तरह की दूरी बनाने की आवश्यकता नहीं होती। इनका आकार दिखने में एक सूतली में बंधे बारूद वाले मोटे बम की लड़ियों जैसा है, जो दिखने के स्काईशॉट जैसे भी हैं।
ई-पटाखों में तेज आवाज करने वाले स्पीकर लगे हैं, जिनमें बिजली के छोटे सर्किट डिवाइस के प्रचालन से धमाके की आवाज पैदा होती है। इनके प्रयोग से किसी तरह की चिंगारी या आग नहीं लगती।
महंगे फिर भी बाजार में मांग तेज
भागीरथ पैलेस मार्केट में ई-पटाखा विक्रेता प्रवीण कुमार राणा ने बताया कि आम पटाखों की ब्रिकी बंद होने के बाद से ई-पटाखों की ब्रिकी तेज हुई है। उन्होंने बताया कि रोजाना काफी स्टॉक बिक रहा है। इन पटाखों के एक सेट की कीमत 1500 रुपये है जो थोड़ी महंगी जरूर है।
उन्होंने बताया कि इससे पहले मार्केट में जो ई-पटाखे मौजूद थे उन्हें रिमोट से कंट्रोल नहीं किया जा सकता था और उनसे एक बार में सिर्फ एक ही छोटा धमाका होता था, लेकिन इन पटाखों को एक रिमोट से बिना किसी अंतराल के कई बार लगातार चलाया जा सकता है। इनके प्रयोग के लिए ई-पटाखा लड़ी की प्लग सॉकेट में लगाना पड़ता है।
सबसे खास बात यह है कि इन पटाखों के प्रयोग से प्रदूषण भी नहीं फैलता। हालांकि ई-पटाखे दिखने में बारूद वाले पटाखों की लड़ी जैसे ही दिखते हैं, लेकिन फटते नहीं। लेकिन सबसे बड़े त्योहार पर इन पटाखों की खरीदारी से उनके बजट पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
क्या हैं ई-पटाखे
ई-पटाखे यानि प्रदूषण रहित ऐसे पटाखे जिनका प्रयोग बिजली के जरिये होता है। इन पटाखों की खासियत यह है कि इन्हें एक माचिस बॉक्स से थोड़े से बड़े आकार के वायरलैस रिमोट कंट्रोल से चलाया जाता है। इन पटाखों के चलाने के लिए किसी तरह की दूरी बनाने की आवश्यकता नहीं होती। इनका आकार दिखने में एक सूतली में बंधे बारूद वाले मोटे बम की लड़ियों जैसा है, जो दिखने के स्काईशॉट जैसे भी हैं।
ई-पटाखों में तेज आवाज करने वाले स्पीकर लगे हैं, जिनमें बिजली के छोटे सर्किट डिवाइस के प्रचालन से धमाके की आवाज पैदा होती है। इनके प्रयोग से किसी तरह की चिंगारी या आग नहीं लगती।
महंगे फिर भी बाजार में मांग तेज
भागीरथ पैलेस मार्केट में ई-पटाखा विक्रेता प्रवीण कुमार राणा ने बताया कि आम पटाखों की ब्रिकी बंद होने के बाद से ई-पटाखों की ब्रिकी तेज हुई है। उन्होंने बताया कि रोजाना काफी स्टॉक बिक रहा है। इन पटाखों के एक सेट की कीमत 1500 रुपये है जो थोड़ी महंगी जरूर है।
उन्होंने बताया कि इससे पहले मार्केट में जो ई-पटाखे मौजूद थे उन्हें रिमोट से कंट्रोल नहीं किया जा सकता था और उनसे एक बार में सिर्फ एक ही छोटा धमाका होता था, लेकिन इन पटाखों को एक रिमोट से बिना किसी अंतराल के कई बार लगातार चलाया जा सकता है। इनके प्रयोग के लिए ई-पटाखा लड़ी की प्लग सॉकेट में लगाना पड़ता है।
सदर बजार सबसे बड़ा मार्केट
डेमो
- फोटो : डेमो
देश में पटाखों की बिक्री का सबसे बड़ा थोक बाजार दिल्ली का सदर बाजार है। दिवाली से पहले हर साल सदर बाजार के 74 दुकानदारों को लाइसेंस मिलता है। अकेले दिल्ली-एनसीआर में हर साल करीब 25 हजार करोड़ रुपये के पटाखे बिक जाते है।
जीएसटी के दायरे में पटाखे
पटाखों को भी जीएसटी के दायरे में आ गई है। पटाखों को 28 फीसदी स्लैब में रखा गया है। पटाखे महंगे हो गए हैं। इससे पटाखों की बिक्री पर असर देखने को मिल सकता है। पूरे देश में 1 हजार करोड़ रुपये का टर्नओवर केवल दिवाली पर होता है।
शिवकासी सबसे बड़ा गढ़
तमिलनाडु के शिवकासी से ही पूरे देश में पटाखों की सप्लाई की जाती है। पटाखों के लिए शिवकासी को गढ़ माना जाता है। पूरे देश में 85 फीसदी बिक्री यहीं से होती है। करीब 3 लाख लोग यहां पर पटाखे बनाने के कारोबार से जुड़े हुए हैं। वहीं 5 लाख लोग सप्लाई और पेपर प्रिंटिंग से जुड़े हैं।
जीएसटी के दायरे में पटाखे
पटाखों को भी जीएसटी के दायरे में आ गई है। पटाखों को 28 फीसदी स्लैब में रखा गया है। पटाखे महंगे हो गए हैं। इससे पटाखों की बिक्री पर असर देखने को मिल सकता है। पूरे देश में 1 हजार करोड़ रुपये का टर्नओवर केवल दिवाली पर होता है।
शिवकासी सबसे बड़ा गढ़
तमिलनाडु के शिवकासी से ही पूरे देश में पटाखों की सप्लाई की जाती है। पटाखों के लिए शिवकासी को गढ़ माना जाता है। पूरे देश में 85 फीसदी बिक्री यहीं से होती है। करीब 3 लाख लोग यहां पर पटाखे बनाने के कारोबार से जुड़े हुए हैं। वहीं 5 लाख लोग सप्लाई और पेपर प्रिंटिंग से जुड़े हैं।