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GDP: भारत पर व्यापार युद्ध का खास असर नहीं, 6.5% तेजी से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था; फिच ने कहा- US की नीतियां खतरनाक

Thu, 20 Mar 2025 01:28 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 20 Mar 2025 01:28 AM IST
सार

अमेरिकी सरकार की नीतियों के कारण व्यापार युद्ध के कारण अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ रहा है। हालांकि, एक रिपोर्ट का दावा है कि भारत पर व्यापार युद्ध का खास असर नहीं होगा और देश की अर्थव्यवस्था 6.5 फीसदी रफ्तार से बढ़ेगी। फिच की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की आक्रामक व्यापार नीतियां दुनिया के लिए बड़ा जोखिम हैं।

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Fitch Ratings India GDP Growth Projections amid US Policy Global Tarrif War news in hindi
जीडीपी वृद्धि को लेकर अर्थशास्त्री आशान्वित - फोटो : एएनआई

विस्तार

टैरिफ वार के कारण दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं के मंदी में फंसने का जोखिम बढ़ गया है। हालांकि, भारत पर इस व्यापार युद्ध का गहरा असर नहीं होगा और भारतीय अर्थव्यवस्था एक अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष 2025-26 में 6.5 फीसदी की रफ्तार से बढ़ेगी। 2026-27 में आर्थिक वृद्धि दर मामूली घटकर 6.3 फीसदी रह सकती है।
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फिच रेटिंग्स ने ग्लोबल इकनॉमिक आउटलुक (जीईओ) के मार्च संस्करण में कहा, अमेरिका की आक्रामक व्यापार नीतियां एक बड़ा जोखिम बनकर सामने आई हैं। इससे भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2025-26 की तुलना में 2026-27 में थोड़ी नीचे आ सकती है। हालांकि, बाहरी मांग पर कम निर्भरता और पर्याप्त आत्मनिर्भरता के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था व्यापार युद्ध के व्यापक असर से बची रहेगी।
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रेटिंग एजेंसी ने कहा, पूंजीगत खर्च सहित निजी और सार्वजनिक व्यय में वृद्धि के कारण भारतीय जीडीपी की वृद्धि दर में सुधार हुआ है। यह चालू वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही के 5.4 फीसदी से बढ़कर चौथी तिमाही में 6.2 फीसदी पर पहुंच गई है। इस वृद्धि में कृषि क्षेत्र का भी योगदान है। औसत से अधिक मानसूनी बारिश के कारण खरीफ फसल का उत्पादन बढ़ा है।

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मजबूत निर्यात से वृद्धि को समर्थन
ग्लोबल इकनॉमिक आउटलुक के मुताबिक, निर्यात में मजबूत वृद्धि और आयात में गिरावट के संयोजन से इस साल जीडीपी वृद्धि को समर्थन मिला है। शुद्ध निर्यात में वृद्धि से 2025-26 और 2026-27 में भी अर्थव्यवस्था को मदद मिलेगी।
  • कर स्लैब में संशोधन और बढ़ी करमुक्त आय से उपभोक्ताओं की बचत में इजाफा होगा। इससे खर्च और विकास को बढ़ावा मिलेगा।
कारोबारी भरोसा शीर्ष पर, बढ़ेगा पूंजीगत खर्च
फिच ने कहा, भारत में कारोबारी भरोसा उच्च स्तर पर बना हुआ है। सर्वेक्षणों से पता चलता है कि निजी क्षेत्र को दिए जाने वाले बैंक कर्ज में दहाई अंकों की वृद्धि जारी रहेगी।
  • रेटिंग एजेंसी ने कहा, केंद्रीय बजट में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च के उच्च आवंटन से जीडीपी को समर्थन मिलेगा।
  • इन कारकों के अलावा आरबीआई की ओर से ब्याज दरों में कटौती से लागत में कमी आएगी, जिससे 2025-26 और 2026-27 में पूंजीगत खर्च में तेजी आएगी।
इस साल दो बार और घटेगी रेपो दर
खुदरा महंगाई के फरवरी, 2025 में घटकर चार फीसदी से नीचे आने के बीच फिच का मानना है कि दिसंबर, 2026 तक मुद्रास्फीति मामूली बढ़कर 4.3 फीसदी पहुंच जाएगी, क्योंकि आरबीआई ने रेपो दर में कटौती शुरू कर दी है। उम्मीद है कि इस साल रेपो दर में दो बार और कटौती होगी, जिससे यह वर्तमान के 6.25 फीसदी से घटकर दिसंबर, 2025 तक 5.75 फीसदी पर आ जाएगी।

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