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वित्त मंत्रालय: पहली तिमाही में 'V' आकार के सुधार से मजबूत आर्थिक बुनियाद का मिला संकेत
Thu, 09 Sep 2021 04:37 PM IST
डिंपल अलावाधी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलावाधी
Updated Thu, 09 Sep 2021 04:37 PM IST
सार
पिछले साल लॉकडाउन के बाद नेगेटिव में दर्ज की गई सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी विकास दर के इस बार अच्छे आंकड़े सामने आए हैं।
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- फोटो : istock
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विस्तार
देश कोरोना वायरस महामारी की दो लहरों का सामना कर चुका है। दूसरी लहर के बाजवूद वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में 'वी' आकार के सुधार से भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियाद का पता चलता है। मौजूदा वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून के आंकड़े बताते हैं कि जीडीपी विकास दर 20.1 फीसदी रही है। यह चीन से भी बेहतर आंकड़े हैं क्योंकि पहली तिमाही में चीन की विकास दर 7.9 फीसदी दर्ज की गई है। यानी यह माना जा सकता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था चीन के मुकाबले तेजी से सुधरी है।
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पिछले वित्त वर्ष यानी 2020-21 की पहली तिमाही में विकास दर नेगेटिव में चली गई थी। तब यह -24.4 फीसदी दर्ज की गई थी। हालांकि वित्त मंत्रालय ने अपनी मासिक आर्थिक समीक्षा में केरल और महाराष्ट्र में बढ़ते कोरोना के मामलों पर चिंता व्यक्त की है। मंत्रालय ने इन दोनों राज्यों में महामारी को काबू करने और प्रबंधन को मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर दिया है।
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इन कारकों से मिलते हैं सुधार के संकेत
वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अब तक मानसून नौ फीसदी कम है। लेकिन तब भी तीन सितंबर तक खरीफ की बुवाई सामान्य स्तर की तुलना में 101 फीसदी हो चुकी थी। इसके अलावा धान की रिकॉर्ड खरीद और ट्रैक्टर की बिक्री में वृद्धि से आने वाले महीनों में मजबूत ग्रामीण मांग से अच्छे संकेत मिलते हैं। इतना ही नहीं, बिजली की खपत, ई-वे बिल, डिजिटल लेनदेन और मजबूत माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह से भी सुधार के संकेत मिलते हैं।
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महामारी के पहले जैसे हो रहे हालात
हाल ही में देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम ने कहा था कि बाहरी क्षेत्र बेहतर स्थिति तैयार कर रहा है। फॉरेक्स रिसर्व बढ़ रहे हैं। महामारी के चलते आपूर्ति में समस्याएं आने के बावजूद महंगाई वैश्विक आर्थिक संकट (जीएफसी) के मुकाबले कहीं कम थी। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम खपत और ऑटो बिक्री के क्षेत्र में आ रहा स्थिर सुधार संकेत कर रहा है कि हालात महामारी से पहले जैसे हो रहे हैं।