Pre-Budget Meetings: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बजट पूर्व बैठकों का सिलसिला थमा, मिले ये अहम सुझाव
Pre-Budget Meetings Over: आयकर स्लैब को व्यवस्थित करने के अलावा रिसर्च एवं डेवलपमेंट खर्च में वृद्धि, डिजिटल सेवाओं को इन्फ्रास्ट्रक्चर का दर्जा, हाइड्रोजन भंडारण और फ्यूल सेल डेवलपमेंट को प्रोत्साहन समेत कई सारे सुझाव वित्त मंत्री की अध्यक्षता में हुई बजट पूर्व बैठकों में मिले हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
वित्त वर्ष 2022-23 के बजट को तैयार करने के लिए शुरू हुआ बजट पूर्व बैठकों का सिलसिला अब थम गया है। मंत्रालय की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 15 से 22 दिसंबर तक इन बजट-पूर्व बैठकों की अध्यक्षता की। इस अवधि में कुल 8 बैठकें आयोजित हुईं। वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई इन बैठकों में अर्थव्यवस्था से जुड़े 7 समूहों से 120 लोगों ने प्रतिभाग किया। इनमें कृषि एवं कृषि प्रसंस्करण उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और जलवायु परिवर्तन, वित्त क्षेत्र और पूंजी बाजार, सेवा एवं व्यापार, सामाजिक क्षेत्र, ट्रेड यूनियन एवं श्रम संगठन के प्रतिनिधि, विशेषज्ञ और अर्थशास्त्री शामिल थे।
सरकार की ओर से ये लोग शामिल
वहीं सरकार की तरफ से इन बैठकों में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी और डॉ. भागवत कराड़, वित्त सचिव टी. वी. सोमनाथन, डीईए सचिव अजय सेठ, डीआईपीएएम सचिव तुहीन कांत पांडे, सहित सरकार के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
ये महत्वपूर्ण सुझाव दिए हितधारक समूहों ने
बजट पूर्व बैठकों में कई मुद्दों पर चर्चा की गई और हितधारक समूहों से सुझाव मांगे गए। मंत्रालय की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, इस दौरान विभिन्न मुद्दों पर समूहों ने कई अहम सुझाव दिए। इनमें रिसर्च एवं डेवलपमेंट खर्च में बढ़ोतरी, डिजिटल सेवाओं को इन्फ्रास्ट्रक्चर का दर्जा, हाइड्रोजन भंडारण और फ्यूल सेल डेवलपमेंट को प्रोत्साहन, आयकर स्लैब को व्यवस्थित करना, ऑनलाइन सुरक्षा उपायों में निवेश आदि शामिल थे।
टैक्स और नीतियों को स्थिर रखने की सलाह
उद्योग संगठनों ने वित्त मंत्री से बजट में राहत और सुधार कदम जारी रखने के साथ टैक्स और नीतियों को स्थिर बनाये रखने की सलाह दी। विशेषज्ञों ने सलाह दी कि इंफ्रा सेक्टर का अर्थव्यवस्था पर काफी असर पड़ता है ऐसे में सरकार को फंडिंग के नये विकल्प तलाशने की जरूरत है। इसके साथ ही एसोचैम ने दूरसंचार, बिजली और खनन जैसे ज्यादा रेग्युलेटेड सेक्टर के लिये विवाद से विश्वास योजना का विस्तार करने का सुझाव दिया है।