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Inflation: RBI के डिप्टी गवर्नर ने कहा- लंबी चलेगी महंगाई पर काबू पाने की लड़ाई, लेकिन जरूर नीचे आएंगी कीमतें
Tue, 18 Oct 2022 05:39 AM IST
योगेश साहू
एजेंसी, मुंबई।
एजेंसी, मुंबई।
Published by: योगेश साहू
Updated Tue, 18 Oct 2022 05:39 AM IST
सार
आरबीआई ने बुलेटिन में हरित जीडीपी के लिए पर्यावरण मंत्रालय के तहत एक समर्पित इकाई बनाने का भी सुझाव दिया है। यह इकाई पर्यावरणीय नुकसान, प्राकृतिक संसाधनों में कमी और संसाधनों की बचत से जुड़ी गणनाएं कर जीडीपी में उनका समायोजन करेगा।
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RBI
- फोटो : Social Media
विस्तार
आरबीआई ने कहा कि महंगाई पर काबू पाने की लड़ाई लंबी चलेगी क्योंकि मौद्रिक नीति के तहत उठाए कदमों का असर दिखने में समय लगेगा। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा ने कहा, अगर हम इसमें सफल होते हैं तो नकारात्मक महंगाई से जूझ रही बाकी दुनिया के मुकाबले सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक के तौर पर भारत की संभावनाएं मजबूत करेंगे।
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पात्रा की अगुवाई वाली टीम ने अर्थव्यवस्था की हालत पर लिखे लेख में कहा, महंगाई के खिलाफ जारी जंग का सुखद नतीजा विदेशी निवेशकों में नया जोश भरेगा। बाजारों और जीडीपी को स्थिरता देगा। खुदरा महंगाई सितंबर में बढ़कर 7.41 फीसदी पर पहुंच गई।
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5-6 तिमाहियों में दिखेगा असर : जयंत वर्मा
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य जयंत आर वर्मा ने कहा कि कठोर मौद्रिक नीतियों का महंगाई पर असर अगली 5-6 तिमाहियों के बाद ही दिखेगा। उन्होंने कहा, हमारा महंगाई का लक्ष्य 4 फीसदी है जिसमें 2 फीसदी कम या ज्यादा का भी विकल्प है। उन्होंने कहा, इसमें संदेह नहीं है कि केंद्रीय बैंक के इस कदम से महंगाई कम होगी। हालांकि, कठोर नीतियों का असर दिखना अभी बाकी है। इसका असर दिखेगा और कीमतें भी नीचे आएंगी।
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हरित जीडीपी के लिए बने एक अलग इकाई
आरबीआई ने बुलेटिन में हरित जीडीपी के लिए पर्यावरण मंत्रालय के तहत एक समर्पित इकाई बनाने का भी सुझाव दिया है। यह इकाई पर्यावरणीय नुकसान, प्राकृतिक संसाधनों में कमी और संसाधनों की बचत से जुड़ी गणनाएं कर जीडीपी में उनका समायोजन करेगा। भारत के सामाजिक व विकास उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए वित्तीय प्रणाली को हरित वित्त पोषण की ओर बढ़ने की जरूरत है।