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चुनौती: बाजार में कैसे बढ़े जरूरी चीजों की मांग, 15 फीसदी पहुंची बेरोजगारी दर ने बढ़ाई सरकार की मुश्किल

Tue, 01 Jun 2021 02:33 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 01 Jun 2021 02:33 PM IST
सार

भाजपा ने किया दावा- भारी योजनाओं में निवेश और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए बाजार में पैसा झोंक रही सरकार, बढ़ेगी मांग और सुधरेगी बेरोजगारी की स्थिति... 

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FICCI research claimed, due to the second wave of Corona, the Business Confidence Index of traders has fallen drastically
एमएसएमई सेक्टर - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

फिक्की ने अपनी एक रिसर्च के माध्यम से दावा किया है कि कोरोना की दूसरी लहर के कारण व्यापारियों के ‘व्यापार विश्वास सूचकांक’ में बहुत गिरावट आई है। व्यापारियों और आद्योगिक कंपनियों को लग रहा है कि इस बार बाजार में कमजोर मांग की स्थिति लंबे समय तक नहीं सुधरेगी और इस कारण नजदीकी समय में व्यापार में तेजी नहीं आएगी। कोरोना की पहली लहर के बाद लोगों ने अपनी पिछली बचत का उपयोग कर लिया था, जिसके कारण बाजार में मांग बढ़ गई थी और अर्थव्यवस्था पटरी पर आ गई थी।

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लेकिन कोरोना की इस लहर में लोगों के पास पिछली बचत नहीं है, जिसके कारण लोग खर्च नहीं बढ़ा सकेंगे और इस कारण बाजार में मांग भी नहीं बढ़ सकेगी। अगर लोगों के हाथ में पैसा पहुंचता रहता तो मांग बढ़ाने में मदद मिल सकती थी, लेकिन 15 फीसदी तक पहुंच चुकी बेरोजगारी दर ने स्थिति को और अधिक संकटपूर्ण बना दिया है।
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ताजा रिसर्च में देश में ‘व्यापार विश्वास सूचकांक’ 51.5 अंक तक गिर गया है, जबकि इसके पहले के चरण में यह 74.2 अंक आंका गया था। यानी व्यापारियों के बाजार के प्रति विश्वास में 23 अंक तक की भारी गिरावट आई है। अर्थव्यवस्था के लिहाज से इसे बेहतर नहीं माना जा रहा है।

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कैसे बढ़े मांग

ताइवान की चाओयंग यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलॉजी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि सरकार के सामने इस समय दो सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों हैं, बाजार में मांग कैसे बढ़ाई जाए और देश में बढ़ती बेरोजगारी को कैसे रोका जाए। इसके लिए सरकार के पास भारी योजनाओं में निवेश बढ़ाने का एकमात्र विकल्प मौजूद है। इससे न सिर्फ बाजार में मांग बढ़ेगी, बल्कि रोजगार का भी सृजन होगा।

अगर सरकार इसी दौरान सड़कों, प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत घरों का निर्माण करने, बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत करने और सामाजिक कल्याण की योजनाओं में खर्च बढ़ाती है तो इससे मांग में रफ्तार आएगी। साथ ही, लोगों के हाथ में पैसा पहुंचने से एफएमसीजी उत्पादों की खपत में भी बढ़ोतरी होगी। लिहाजा सरकार को इस समय विभिन्न योजनाओं के जरिये पैसा बाजार में झोंकना चाहिए।

सड़क-पुल निर्माण और आवासीय योजनाओं में निवेश बढ़ाने से स्टील, सीमेंट, फर्नीचर सहित 50 से अधिक उद्योगों में तेजी आती है जो आतंरिक खिंचाव से अन्य उद्योगों में गति का कारण बनते हैं। अगर भारत जैसे देश की भारी आबादी को आवास उपलब्ध कराने की योजना शुरू की जाती है तो इससे अर्थव्यवस्था को बड़ी गति मिलेगी।

बाजार में झोंका हुआ पैसा पहले बड़ी कंपनियों के पास जाता है, इसके बाद वह छोटे सहयोगी सेवा प्रदाता कंपनियों के पास पहुंचता है। अंत में यह समाज के सबसे निचले तबके के कर्मचारियों-कामगारों के पास पहुंचता है। बाजार में मांग बढ़ाने के लिए यही वर्ग सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसे और अधिक मजबूती देने के लिए सरकार को सीधे आर्थिक मदद देने से भी संकोच नहीं करना चहिये।     

अगर इन योजनाओं के लिए सरकार के पास पैसे की कमी है, तो उसे खुले बाजार से उधार लेना चाहिए। निवेश के जरिये झोंका हुआ यह पैसा अंतत: विभिन्न टैक्स के जरिये कुछ समय बाद सरकार तक वापस ही आता है। अत: सरकार को निवेश बढ़ाने में संकोच नहीं करना चाहिए।

मध्यम स्तर के उद्योग की स्थिति ज्यादा नाजुक

मांग और रोजगार बढ़ाने में मध्यम और सूक्ष्म स्तर के उद्योग प्रमुख माने जाते हैं। लेकिन सरकार की मदद के सारे दावों के बाद भी इस क्षेत्र की स्थिति संकटपूर्ण बनी हुई है। एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएसन, नोएडा के अध्यक्ष सुरेन्द्र नाहटा ने बताया कि केवल नोएडा औद्योगिक क्षेत्र में 10 हजार से ज्यादा छोटी-बड़ी कंपनियां काम करती हैं। लेकिन इस समय केवल वही बड़ी कंपनियां काम कर पाने में सक्षम हैं जिन्हें बाजार से सीधे भारी आर्डर मिल जाते हैं, जबकि रोज माल खरीद कर काम करने वाली छोटी-छोटी कंपनियां बंदी के कगार पर हैं।

पेट्रोल-डीजल की कीमतें उच्च स्तर तक पहुंचने के कारण माल ढुलाई की कीमतों में आई बढ़ोतरी और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने इस वर्ग को भारी चोट पहुंचाई है। सरकार से इन्हें सहायता की जरूरत है, लेकिन असलियत यह है कि पिछले काल में भी सरकार द्वारा दी गई सहायता इन तक नहीं पहुंची है। इससे उद्योगों की कमर टूट रही है।  

जल्द दिखेगा असर

आर्थिक मामलों के जानकार भाजपा नेता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि कोरोना की पहली लहर में उद्योगों को 21 लाख करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी गई थी। यह मदद कर्ज और आर्थिक सहयता के रूप में थी। इस मदद का बड़ा हिस्सा धीरे-धीरे बाजार तक पहुंच रहा है और जल्दी ही इसका असर दिखाई पड़ेगा।

बाजार में मांग बढ़ाने के लिए ही सरकार कई कल्याणकारी योजनाओं के जरिये निवेश कर रही है। कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों की मदद, किसान सम्मान निधि, मनरेगा और न्यूनतम समर्थन मूल्य के जरिये लोगों के पास पैसा पहुंचाया जा रहा है। सरकार जल्दी ही कुछ अन्य योजनाओं को पेश करेगी जिससे लोगों के हाथ में पैसा पहुंचाया जा सके और बाजार में मांग बढ़ाई जा सके।

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