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RBI: बिजली वितरण कंपनियां राज्यों पर वित्तीय रूप से बोझ बनीं, आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कही यह बात
Sat, 21 Dec 2024 12:51 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Sat, 21 Dec 2024 12:51 PM IST
सार
आरबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न सुधार प्रयासों के बावजूद डिस्कॉम राज्यों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। हालात बदलने के लिए, आरबीआई ने उत्पादकता में सुधार, ट्रांसमिशन और वितरण घाटे को कम करने और बिजली आपूर्ति की वास्तविक लागत के साथ टैरिफ को एडजस्ट करने जैसे उपायों के महत्व पर जोर दिया गया है। आइए इस बारे में और जानें।
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आरबीआई
- फोटो : PTI
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विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) राज्यों के लिए वित्तीय रूप से भारी बोझ बनी हुई हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राज्य डिस्कॉम का कुल संचित घाटा 2022-23 तक 6.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद का 2.4 प्रतिशत है।
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रिपोर्ट के अनुसार, "बिजली वितरण कंपनियाँ (डिस्कॉम) राज्यों पर वित्तीय रूप से बोझ बनी हुई हैं।" रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न सुधार प्रयासों के बावजूद डिस्कॉम राज्यों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। हालात बदलने के लिए, आरबीआई ने उत्पादकता में सुधार, ट्रांसमिशन और वितरण घाटे को कम करने और बिजली आपूर्ति की वास्तविक लागत के साथ टैरिफ को एडजस्ट करने जैसे उपायों के महत्व पर जोर दिया।
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आरबीआई की रिपोर्ट में पाया गया है कि राज्यों ने राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने में प्रगति की है। 2023-24 में, राज्यों का सकल राजकोषीय घाटा (GFD) सकल घरेलू उत्पाद के 2.91 प्रतिशत पर सीमित रहा, जो राजकोषीय उत्तरदायित्व विधान (FRL) की ओर से निर्धारित 3 प्रतिशत की सीमा के भीतर था।
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पूंजीगत व्यय, जो बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक विकास में निवेश का एक महत्वपूर्ण संकेतक है, 2023-24 में सकल घरेलू उत्पाद का 2.6 प्रतिशत हो गया, जो पिछले वर्ष 2.2 प्रतिशत था। भविष्य को देखते हुए, रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि राज्यों से 2024-25 में राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की उम्मीद है, जिसमें जीएफडी का बजट सकल घरेलू उत्पाद का 3.2 प्रतिशत है।