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अल-नीनो का असर: मानसून में बढ़ेगा जोखिम, खरीफ सीजन के लिए सरकार ने घटाया उर्वरक मांग का अनुमान

Wed, 03 Jun 2026 06:03 AM IST
राकेश कुमार बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
बोनस डेस्क, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Wed, 03 Jun 2026 06:03 AM IST
सार

मौसम एजेंसी स्काईमेट ने चेतावनी दी है कि अल-नीनो उम्मीद से पहले और तेजी से पैर पसार रहा है, जिससे भारत में कम बारिश और सूखे का खतरा बढ़ गया है। प्रशांत महासागर में बढ़ते तापमान के कारण केरल में मानसून की एंट्री अब 26 मई के बजाय 4 जून तक खिसक गई है। इस भावी संकट को देखते हुए सरकार ने खरीफ सीजन के लिए खाद की अनुमानित मांग को घटा दिया है, वहीं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फसलों को बचाने के लिए राज्यों को अलर्ट रहने और किसानों को तुरंत मदद पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
 

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क्या दुनिया में पड़ेगी भयानक गर्मी? (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट ने कहा है कि एक पूर्ण अल-नीनो अनुमानित समयसीमा की तुलना में अधिक तेजी से और उम्मीद से पहले विकसित हो सकता है। इससे मानसून के लिए जोखिम और बढ़ सकता है। एजेंसी ने बताया, अल-नीनो और तेजी से मजबूत हो सकता है, क्योंकि उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के सतही और उप-सतही दोनों स्तरों पर तापमान काफी तेजी से बढ़ रहा है। इससे भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में तापमान में असामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। भारत में मानसून पर अल-नीनो का प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि महासागर में तापमान बढ़ने का मुख्य केंद्र कहां है। अगर यह वृद्धि प्रशांत महासागर के सुदूर पूर्वी हिस्से में होती है, तो दक्षिण-पश्चिम मानसून पर इसका असर कमजोर हो सकता है।
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एजेंसी के मुताबिक, मानसून तब अधिक प्रभावित होता है, जब अल-नीनो के कारण तापमान में बढ़ोतरी मध्य प्रशांत महासागर में होती है। इस वर्ष अल-नीनो भारत के साथ इंडोनेशिया और पश्चिम अफ्रीका में मानसून की स्थितियों को प्रभावित करेगा।
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दिखने लगा है शुरुआती असर
इतिहास बताता है जब भी अल-नीनो की स्थिति बनी है, तब दो-तिहाई मामलों में इसने मानसून को प्रभावित किया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने भी मानसून के केरल पहुंचने के अनुमान को आगे बढ़ा दिया है। आईएमडी ने पहले कहा था कि दक्षिण-पश्चिम मानसून 26 मई को केरलम पहुंच सकता है, लेकिन अब इसके चार जून तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।
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सरकार ने खरीफ सीजन के लिए घटाया उर्वरक मांग का अनुमान
आईएमडी के इस साल दीर्घकालिक औसत की सिर्फ 90 फीसदी बारिश होने की उम्मीद जताने के बाद सरकार ने खरीफ सीजन के लिए उर्वरक मांग अनुमान को घटा दिया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने प्रमुख उर्वरकों की कुल आवश्यकता को पहले के 390.5 लाख टन से घटाकर 383.9 लाख टन कर दिया है। इसमें यूरिया की मांग को लगभग 4,00,000 टन घटाकर 190 लाख टन कर दिया है, जबकि डीएपी की मांग को 59.1 लाख टन से घटाकर 56.2 लाख टन कर दिया है। मांग अनुमान में इस कटौती के बावजूद सरकार ने कहा, खरीफ सीजन को देखते हुए देश में उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति मौजूद है।


कृषि मंत्री का खरीफ फसलों की सुरक्षा व राज्यों से समन्वय पर जोर
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे समय पर कृषि परामर्श जारी करें और अल-नीनो के संभावित प्रभाव से खरीफ फसलों को बचाने के लिए राज्यों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखें। चौहान ने अधिकारियों से मानसून की स्थिति पर लगातार नजर रखने को कहा। बताया, सरकार सतर्क है। उन्होंने किसानों को समय पर सलाह और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए। भारत की सालाना वर्षा में 70-75 फीसदी का योगदान देने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून धान जैसी खरीफ फसलों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। शुद्ध बुआई किए गए क्षेत्र के 51 फीसदी हिस्से पर सिंचाई नहीं होती और वह वर्षा पर निर्भर है।
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