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ED Action: ईडी ने चेन्नई में 205 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई

Mon, 26 Dec 2022 08:24 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विवेक दास Updated Mon, 26 Dec 2022 08:24 PM IST
सार

ED Action: कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य 205.36 करोड़ रुपये है। तमिलनाडु मर्केंटाइल बैंक लिमिटेड (टीएमबीएल) के पूर्व अध्यक्ष मारन के खिलाफ 2007 में जांच शुरू में चेन्नई पुलिस की केंद्रीय अपराध शाखा ने शुरू की थी जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पीएमएलए की धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया था। 

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ED attaches assets worth over Rs 205 Cr of Chennai-based firm in money-laundering case
प्रवर्तन निदेशालय। - फोटो : amar ujala

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धनशोधन मामले में चेन्नई स्थित कंपनी की 205 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की है। एजेंसी ने एक बयान में कहा कि एजेंसी ने धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एमजीएम मारन, एमजीएम आनंद और उनकी कंपनी सदर्न एग्रीफ्यूरेन इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड की संपत्तियों को कुर्क करने का अस्थायी आदेश जारी किया है।

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कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य 205.36 करोड़ रुपये है। तमिलनाडु मर्केंटाइल बैंक लिमिटेड (टीएमबीएल) के पूर्व अध्यक्ष मारन के खिलाफ 2007 में जांच शुरू में चेन्नई पुलिस की केंद्रीय अपराध शाखा ने शुरू की थी जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पीएमएलए की धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया था। 
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पुलिस ने यह मामला एक निजी बैंक की शिकायत के आधार पर दर्ज किया था। ईडी ने आरोप लगाया कि मारन ने टीएमबीएल के अन्य निदेशकों और अधिकारियों के साथ मिलकर भारतीय शेयरधारकों से टीएमबीएल के 23.6 प्रतिशत शेयर अनधिकृत विदेशी व्यक्तियों को बेचने का सौदा कराया। 
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ईडी ने बयान में कहा है, ''एमजीएम मारन ने इसी अवधि के दौरान भारत के बाहर सीधे 293.91 करोड़ रुपये का अघोषित विदेशी निवेश हासिल किया। इस तरह का अघोषित निवेश आरबीआई की मंजूरी के साथ-साथ अस्पष्ट और अत्यधिक संदिग्ध स्रोतों से किया गया था। ईडी ने कहा कि भारतीय कानूनों की पहुंच से बचने के लिए एमजीएम मारन ने अपनी भारतीय नागरिकता छोड़ दी और साइप्रस की नागरिकता हासिल कर ली।  

इतना ही नहीं, यह भी पाया गया कि एमजीएम मारन ने अपनी संपत्ति को भारत से विदेशों में स्थानांतरित करना शुरू कर दिया ताकि इसे भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की पहुंच से दूर रखा जा सके। एजेंसी ने कहा कि अक्टूबर में कंपनी ने उच्च न्यायालय के समक्ष ईडी की कार्यवाही के खिलाफ एक रिट याचिका दायर की और अदालत के समक्ष "गलत प्रतिनिधित्व" करके कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी।  

ईडी ने अपने विस्तृत जवाबी हलफनामे में मामले की पूरी पृष्ठभूमि और तथ्यों की व्याख्या की और माननीय मद्रास उच्च न्यायालय ने 19 दिसंबर को रिट याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि कंपनी ने झूठी घोषणा करके बैंक को कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों के हाथों में मूल्यवान विदेशी मुद्रा और इस तरह के प्रेषण को वितरित करने के लिए प्रेरित किया है।


एजेंसी ने कहा कि इसलिए उसने भारत में एमजीएम समूह की सभी प्रमुख कंपनियों में मारन और आनंद की पूरी हिस्सेदारी, सदर्न एग्रीफ्यूरेन इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड में भूमि और भवनों के साथ-साथ टीएमबीएल में मारन की पूरी हिस्सेदारी (3.31 प्रतिशत) के रूप में संपत्ति कुर्क की है, जिसे हाल ही में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में सूचीबद्ध किया गया था।

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