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Naturals: इनकी छह टेबल से शुरू हुई दुकान के कारण बंबई में लगता था जाम, जानिए 'आइसक्रीम मैन ऑफ इंडिया' की कहानी

Tue, 21 May 2024 11:13 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 21 May 2024 11:13 AM IST
सार

कामत का जन्म कर्नाटक के मंगलुरु स्थित मुल्की गांव में एक आम के दुकानदार के घर 1954 में हुआ था। कामत ने 'नैचुरल्स आइसक्रीम' नामक प्रसिद्ध ब्रांड की स्थापना की। फिलहाल इस ब्रांड की अनुमानित कीमत 400 करोड़ रुपये है। कामत उद्योग जगत के एक चर्चित चेहरे और कई लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत रहे। आइए उनके बारे में जानते हैं।

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Due to the shop that started with six tables, there used to be jam in 'Bombay', Know Ice Cream Man of India
नेचुरल्स आइसक्रीम के संस्थापक कामत। - फोटो : amarujala.com

विस्तार

17 मई 2024 की देर रात नैचुरल्स आइसक्रीम के संस्थापक और 'आइसक्रीम मैन ऑफ इंडिया' कहे जाने वाले रघुनंदन श्रीनिवास कामत का निधन हो गया। वे 70 वर्ष के थे। कंपनी ने एक एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर उनकी एक मुस्कुराती हुई तस्वीर के साथ निधन की सूचना देते हुए कहा, "एक मुस्कान जिसे कभी नहीं भुलाया जाएगा। एक मुस्कान जो हमें प्रेरणा देती रहेगी कि उनका युग कभी खत्म नहीं होगा। भारत के आइसक्रीम मैन हमेशा हमारे और आपके दिलों में रहेंगे।"

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कामत का जन्म कर्नाटक के मंगलुरु स्थित मुल्की गांव में एक आम के दुकानदार के घर 1954 में हुआ था। कामत ने 'नैचुरल्स आइसक्रीम' नामक प्रसिद्ध ब्रांड की स्थापना की। फिलहाल इस ब्रांड की अनुमानित कीमत 400 करोड़ रुपये है। कामत उद्योग जगत के एक चर्चित चेहरे और कई लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत रहे। आइए जानते हैं नैचुरल्स आइसक्रीम के संस्थापक और आइसक्रीम मैन ऑफ इंडिया रघुनंदन श्रीनिवास कामत के बारे में सबकुछ।

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कब और कैसे हुई नेचुरल्स आइसक्रीम की शुरुआत?

रघुनंदन कामत ने 1984 में उन्होंने मुंबई के जुहू कोलीवाड़ा में पहली नैचुरल्स आइसक्रीम की दुकान शुरू की। शुरुआत में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए उन्होंने आइसक्रीम के साथ पाव भाजी बेची। वर्तमान में, कंपनी की भारत में 15 राज्यों में 160 से अधिक दुकानें हैं। कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाने की कामथ की यात्रा बहुत दिलचस्प रही। 

पिता आम बेचते थे, बेटे को हुआ फलों की दुनिया से प्यार

नैचुरल्स आइसक्रीम के संस्थापक रघुनंदन कामत मंगलौर के एक छोटे से गांव में अपने पिता, जो आम के विक्रेता थे की सहायता करते हुए बड़े हुए। देखते ही देखते उन्हें फलों की दुनिया से प्यार हो गया। उन्होंने पके फलों को चुनने, उसे तोड़ने, छांटने और संरक्षित करने की कला सीखी। एक दिन उनके दिमाग में विचार आया कि अगर आइसक्रीम में फलों का फ्लेवर इस्तेमाल किया जा सकता है, तो असली फलों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा सकता? धीरे-धीरे यह सवाल उनके दिमाग में बैठ गया। इस इसी सवाल के जवाब को हम 'नेचुरल्स आइसक्रीम' के रूप में जानते हैं।

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सेकंड क्लास की टिकट और फर्स्ट क्लास के आइडिया ने कैसे किया कमाल?

किशोर से युवा हो रहे 15 साल के रघुनंदन कामत ने एक दिन अपने पिता का व्यवसाय छोड़ दिया। उन्होंने सेकंड क्लास का टिकट लिया और मंगलुरु (तब मंगलोर) से मुबंई (तब बंबई) की ट्रेन में बैठ गए। भले ही उनके पास टिकट सेकंड क्लास की थी, पर उनके दिमाग में बिजनेस आइडिया फर्स्ट क्लास का था। जिसे आगे चलकर दुनिया नेचुरल्स आइसक्रीम के रूप में जानने जानने और उसके स्वाद की दीवानी होने वाली थी। हालांकि कामत की यात्रा शुरू हो गई थी पर चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई थी।

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चुनौतियों से कैसे निपटे आइसक्रीम मैन ऑप इंडिया?

कामत इस बात को लेकर अनिश्चित थे कि लोग उनकी फलों के स्वाद वाली आइसक्रीम का स्वाद चखने आएंगे या नहीं। हालांकि उन्हें यकीन था कि अगर लोग एक बार भी आएंगे, तो वे वापस आते रहेंगे। बंबई पहुंचकर कामत ने अपने भाई के दक्षिण भारतीय भोजनालय में काम करना शुरू कर दिया। वहां उन्होंने खुद से आइसक्रीम बनाकर बेचनी शुरू की। वह चॉकलेट और वनिला से परे जाकर आइसक्रीम के जायके में विविधता लाना चाहते थे, हालांकि ऐसा करने के लिए उनके पास संसाधन बहुत कम थे, क्योंकि उनके भाई कामत के इस विचार से बहुत सहमत नहीं थे।

महज छह टेबल के साथ शुरू हुआ कारोबार 400 करोड़ रुपये का बना

साल 1982 में उन्होंने अपने दम पर कारोबार शुरू किया। उसके बाद नैचुरल्स आइसक्रीम का जन्म 1984 में जुहू के 'कोलीवाड़ा' में छह टेबल के साथ 200 वर्ग फुट की जगह में हुआ। जिसके प्रारंभिक मेनू में लगभग 12 फ्लेवर थे। शुरुआती दौर में ग्राहकों को लुभाने के लिए वे मुख्य व्यंजन के रूप में पाव भाजी बेचते थे। उसके साथ आइसक्रीम परोसी जाती थी। धीरे-धीरे कामत के छोटे से भोजनालय ने लोगों का ध्यान खींचना शुरू। जल्द ही यह एक पूर्ण आइसक्रीम पार्लर में बदल गया। लोगों ने इसे 'जुहू स्कीम की आइसक्रीम' (Ice Cream of Juhu Scheme) नाम दिया।

आइसक्रीम खाने के लिए 'बंबई' की सड़कों पर लग जाता था जाम

शुरू होने के बाद नैचुरल्स आइसक्रीम की मांग ऐसी बढ़ी कि जुहू की छोटी-छोटी गलियों में बार-बार ट्रैफिक जाम लग जाता था। लेकिन वह ट्रैफिक जाम कंपनी के लिए सकारात्मक साबित हुआ और 1994 तक नैचुरल्स आइसक्रीम के पांच और आउटलेट खुल गए। नैचुरल्स के लिए लोगों का प्यार अन्य शहरों में भी फैल गया। बढ़ती लोकप्रियता को ध्यान में रखते हुए, एक अद्वितीय थर्मोकोल पैकेजिंग पेश की गई थी। ये नैचुरल्स थर्मोकोल बॉक्स जल्द ही पूरे देश में देखे जाने लगे। 2020 तक इस ब्रांड के देश भर में 135 आउटलेट्स हो गए। आगे चलकर इनकी संख्या 160 तक हो गई। ब्रांड की अनुमानित कीमत 400 करोड़ रुपये से अधिक की हो गई। आइसक्रीम मैन ऑफ इंडिया कामत का अंतिम संस्कार शनिवार की शाम मुंबई के अंधेरी पश्चिम में किया गया। उनके परिवार में पत्नी और दो बेटे हैं, जिनमें नैचुरल्स के निदेशक सिद्धांत कामथ भी शामिल हैं। कामथ के निधन की खबर फैलते ही कई लोगों ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि भी दी। एक यूजर ने एक्स पर पोस्ट किया, "धन्यवाद सर, हमें सबसे अच्छी आइसक्रीम देने के लिए!"।

विज्ञापन पर नहीं किया खर्च, वर्ड ऑफ माउथ से मिली पहचान

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक बार कामत ने कहा था, "मुझे विज्ञापन पर एक पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ा। लोगों के वर्ड ऑफ माउथ (आम लोगों की चर्चा) से ही मुझे प्रचार मिला।" कामत ने कहा  था कि अमिताभ बच्चन, दिलीप कुमार और विवियन रिचर्ड्स सहित कई हस्तियों ने विभिन्न प्लेटफार्मों पर उनकी आइसक्रीम के लिए विज्ञापन किया। कामत के अनुसार 1986 में, मैं क्रिकेटर सुनील गावस्कर का एक टीवी कार्यक्रम द सनी डेज देख रहा था। साक्षात्कार के दौरान, वेस्टइंडीज के पूर्व क्रिकेट कप्तान विवियन रिचर्ड्स ने कहा कि वे नेचुरल्स आइसक्रीम आउटलेट में गए थे और उन्हें सपोडिला (चीकू) और कस्टर्ड एप्पल आइसक्रीम बहुत पसंद आई। कामत के अनुसार यह उनके लिए किसी रोमांच से कम नहीं था।

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