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Jewellers: सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव से असंगठित ज्वैलर्स की बिक्री में गिरावट, जानें क्या है वजह

Sat, 14 Feb 2026 03:42 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: रिया दुबे Updated Sat, 14 Feb 2026 03:42 PM IST
सार

सोने-चांदी की रिकॉर्ड और अस्थिर कीमतों ने असंगठित ज्वैलर्स के कारोबार पर गंभीर असर डाला है। ऊंचे दाम और रोज बदलती कीमतों के कारण स्टॉक खरीदना मुश्किल हो गया है, जिससे नकदी की कमी और पुराना स्टॉक बढ़ रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं। 

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Due to fluctuations in gold and silver prices, sales of unorganized jewelers have declined, know the reason
सोने-चांदी का भाव - फोटो : Adobestock

विस्तार

सोने-चांदी की रिकॉर्ड कीमतों का प्रभाव असंगठित ज्वैलर्स के कारोबार पर पड़ रहा है। ऊंची कीमतों होने की वजह से स्टॉक की खरीदारी कम हो रही है, हालांकि जरूरत के हिसाब से स्टॉक रखा जाता है, साथ ही सीमित तरलता के कारण कारोबार पर असर पड़ा है। ज्वैलर्स का कहना है कि सोने और चांदी की ऊंची कीमतें और कम मांग होने के कारण उनकी बिक्री में 30 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।
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इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन का अनुमान

  • देश भर के स्थानीय जौहरियों और सुनारों ने बिक्री में 45 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की है।
  • सोने-चांदी की कीमतों में मौजूदा अस्थिरता के बीच उनके लिए काम करना मुश्किल हो गया है।
  • उद्योग के आंकड़ों के अनुसार बाजार की लगभग 53 प्रतिशत हिस्सेदारी असंगठित ज्वैलर्स की है।

सोना-चांदी खरीदना आम ग्राहकों की पहुंच के बाहर

मुंबई के स्थानीय ज्वैलर बेलवेकर ज्वैलर्स के राकेश बेलवेकर कहते हैं, सोने और चांदी की कीमतों में तेजी होने की वजह से मध्यवर्ग ग्राहक खरीदारी से दूर हो गए हैं। यह आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गए हैं।  जिसकी वजह से हमने बिक्री में 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की है। कीमती धातुओं के भाव में मौजूदा तेजी के साथ जो अस्थिरता बनी हुई है, यानी हर दिन कीमतों में तेज उछाल या फिर अचानक से गिरावट आने की वजह से कारोबार करना मुश्किल हो गया है। राकेश कहते हैं, कारोबार में रोलिंग बंद सी हो गई है, जिसकी वजह से नई डिजाइन या फिर वैरिएशन लाना बेहद चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
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चांदी की कीमतें बढ़ने से ज्वैलर्स की बिक्री पर असर

कुछ साल पहले जब सोने के दामों में वृद्धि हुई थी, तब चांदी अपने सामान्य भाव पर चल रही थी। तब ग्राहक चांदी की खरीदारी करते थे, जो उनकी बजट में आती थी और यह सोने के विकल्प के साथ अच्छे निवेश के तौर पर खरीदी जारी रही, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में चांदी की कीमतें तेजी से बढ़ी है। इस कारण से वे लोग जो सोने की जगह चांदी सस्ती होने की वजह से खरीदारी करते थे, वे अब पूरी तरह से दूर हो गए हैं। जिसने हमारी बिक्री पर बुरा असर डाला है।
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कारोबार में नकदी की कमी

मुंबई के झवेरी बाजार के चांदनी ज्वैलर्स के मुकेश जैन कहते हैं कि सोने और चांदी के भाव इतने बढ़ चुके हैं कि खरीदारी बंद सी हो गई है। हमारे ग्राहक आम लोग है, जिनके पास उनका एक अपना बजट होता है। सोना-चांदी अब बजट से बाहार हो गया है। इसलिए हमारी बिक्री पर असर पड़ा है और इसमें 40 प्रतिशत की गिरावट आई है। मांग नहीं होने से हमारे पास बिना बिका हुआ पुराना स्टॉक पड़ा है। अब जब बिक्री नहीं तो नकदी की समस्या बढ़ गई है। जिसकी वजह से कारोबार करना मुश्किल हो गया है। बाजार में काफी छोटे ज्वैलर्स हैं, जो नकदी पर ही कारोबार करते हैं, उनका कारोबार तो बंद पड़ गया है। क्योंकि कीमतें इतनी अधिक है, स्टॉक खरीदने के लिए पूरा पेमेंट करना पड़ता है। अब थोड़ा पेमेंट करके स्टॉक नहीं मिल रहा है, इसकी वजह सोने-चांदी की कीमतों में प्रतिदिन होने वाला बदलाव है। ऐसे में कोई नुकसान नहीं चाहता।    

सोने-चांदी की कीमतें बढ़ना परेशानी नहीं कीमतों में अस्थिरता चुनौती है

बॉम्बे बुलियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार जैन कहते हैं, सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि का दौर चल रहा है, ऐसे में असंगठित ज्वैलर्स के कारोबार अधिक प्रभावित हुए हैं। देखें तो 30 से 40 प्रतिशत तक उनकी बिक्री में गिरावट हुई है। सोने-चांदी की कीमतों का बढ़ना परेशानी नहीं हैं, बुरी बात यह है कि कीमतों में अस्थिरता अधिक है। अब देखिए सोने ने कुछ समय पहले 2 लाख रुपये का स्तर छुआ और अब 1,50,000 रुपये प्रति दस ग्राम पर आ गया है। वहीं चांदी की कीमत भी 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई और बाद में घटकर 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। इतनी बड़ी गिरावट और वृद्धि एक छोटे ज्वैलर के लिए झेल पाना मुश्किल है।

कुमार कहते हैं कि किमतें बढ़े, लेकिन स्थिर रहनी चाहिए क्योंकि स्थिर रही तो ही लोग खरीदारी की योजना बनाते हैं। लोग मानसिक रूप से परेशान हो जाते हैं। लेकिन जब कीमतें लगातार ऊपर-नीचे होती रहती हैं, तो ग्राहक खरीदारी से बचते हैं, जब तक कि कोई शादी या अत्यावश्यक जरूरत न हो। वे कहते हैं, अभी अधिकतर ग्राहक पुराने सोने के आभूषण देकर उन्हें नए करवा रहे हैं। इससे ज्वैलर्स को नुकसान होता है, पुराने गहनों को पिघलाना, फिर नई डिजाइन बनाना और काटने और पॉलिश करने में नुकसान होता है, इससे सोने का वजन भी कम होता है और खर्च बढ़ता है। 

ब्रांडेड ज्वैलर्स को फायदा मिल रहा है

होलसेल ज्वैलरी एसोसिएशन का कहना है कि इसका फायदा बड़े ब्रांडेड ज्वैलर्स को हो रहा है। उनके पास हर तरह के डिजाइन और वजन के आभूषण ग्राहकों के लिए उपलब्ध हैं। हाल ही में शादी ब्याह को लेकर खरीदारी बाजार में बढ़ती दिख रही है, लेकिन कीमतें अधिक होने की वजह से ग्राहक 10 ग्राम के बदले 5 ग्राम, 2 ग्राम और 3 ग्राम तक के आभूषणों की ओर रुख कर रहे हैं। लेकिन इतनी वैराइटी छोटे ज्वैलर्स के पास नहीं है। इसकी वजह से ग्राहक बड़े ज्वैलर्स की ओर रुख कर रहे हैं। जहां पर उन्हें हल्के आभूषणों की पूरी रेंज और कस्टमाइज्ड आभूषणों का सुविधा मिल रही है। जबकि छोटे ज्वैलर्स पहले से ही नकदी की कमी, पुराना स्टॉक का जमावड़ा, जिसकी वजह से नई डिजाइन को अपडेट करने में उन्हें दिक्कत हो रही है। यह चुनौतिया फिलहाल असंगठित ज्वैलर्स के सामने हैं। 


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