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धारावी स्लम पुनर्विकास परियोजना: अदाणी समूह को राहत, हाईकोर्ट ने टेंडर दिए जाने के खिलाफ याचिका की खारिज

Fri, 20 Dec 2024 11:34 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 20 Dec 2024 11:34 AM IST
सार

धारावी स्लम पुनर्विकास परियोजना: अदाणी समूह को राहत, हाईकोर्ट ने टेंडर दिए जाने के खिलाफ याचिका की खारिज

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Dharavi Slum Redevelopment Project: Relief to Adani Group, High Court rejects petition against award of tender
अदाणी समूह धारावी में करेगा पुनर्विकास का काम - फोटो : एएनआई

विस्तार

बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मुंबई में धारावी पुनर्विकास परियोजना के लिए महाराष्ट्र सरकार की ओर से अदाणी समूह को दिए गए ठेके को बरकरार रखा और कहा कि इस फैसले में कोई "मनमानापन, पक्षपात या विकृति" नहीं है।

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मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति अमित बोरकर की खंडपीठ ने यूएई स्थित सेकलिंक टेक्नोलॉजीज कॉरपोरेशन की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें राज्य सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें अदाणी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को परियोजना देने का काम सौंपा गया था, जिसने 5,069 करोड़ रुपये की पेशकश की थी।
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सेकलिंक टेक्नोलॉजीज 2018 में इस परियोजना के लिए सबसे बड़ी बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी थी, लेकिन उस वर्ष जारी निविदा को बाद में सरकार ने रद्द कर दिया था। पीठ ने कहा कि कंपनी की याचिका में बल का अभाव है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है। उच्च न्यायालय ने कहा, "याचिका के समर्थन में दिए गए आधारों में दम नहीं है।"
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अदाणी समूह मुंबई के मध्य में स्थित 259 हेक्टेयर की धारावी पुनर्विकास परियोजना के लिए सबसे अधिक बोली लगाने वाला समूह बनकर उभरा था और 2022 की निविदा प्रक्रिया में 5,069 करोड़ रुपये की पेशकश के साथ इसे हासिल कर लिया था। 2018 में जारी पहली निविदा में याचिकाकर्ता कंपनी 7,200 करोड़ रुपये की पेशकश के साथ सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में सामने आई थी। हालांकि, सरकार ने 2018 की निविदा रद्द कर दी थी और अतिरिक्त शर्तों के साथ 2022 में एक नई निविदा जारी की थी।

सेकलिंक टेक्नोलॉजीज ने सबसे पहले 2018 के टेंडर को रद्द करने और उसके बाद 2022 के टेंडर को अदाणी समूह को दिए जाने को चुनौती दी थी। इसने आरोप लगाया था कि नया टेंडर बंदरगाहों से लेकर ऊर्जा तक के क्षेत्र में काम करने वाले समूह के लिए जानबूझकर लाया गया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता कंपनी 2018 की निविदा प्रक्रिया में सबसे ऊंची बोली लगाने वाली थी।


अदालत ने आगे कहा कि यह एक स्थापित सिद्धांत है कि किसी निविदा प्रक्रिया में भाग लेने वाला बोलीदाता इस बात पर जोर नहीं दे सकता कि उसकी निविदा को केवल इसलिए स्वीकार किया जाए क्योंकि वह सबसे ऊंची या सबसे कम है। पीठ ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से 2018 की निविदा प्रक्रिया को रद्द करने के लिए दिए गए कारणों को, उसकी राय में, "अस्तित्वहीन या अनुचित या किसी विकृति पर आधारित" नहीं कहा जा सकता है। अदालत के अनुसार सरकार की ओर से लिया गया निर्णय "मनमानी, अनुचित या दुराग्रहपूर्ण" नहीं है।

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