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क्रिसिल का दावा : बजट में विनिर्माण-निर्यात पर रहेगा जोर, चीन की धीमी अर्थव्यवस्था का लाभ उठाएगा भारत

Wed, 09 Nov 2022 06:10 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Wed, 09 Nov 2022 06:10 AM IST
सार

सितंबर में मासिक आर्थिक समीक्षा में आगाह किया गया था कि वैश्विक मंदी निर्यात वृद्धि को कम कर सकती है। इससे व्यापार संतुलन भी प्रभावित हो सकता है।

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Crisil claims: emphasis will be on manufacturing export in budget, India take advantage of Chinas slow economy
आयात-निर्यात - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकार का आगामी बजट में अधिक समर्थन उपायों के जरिये विनिर्माण एवं निर्यात क्षेत्रों को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर रह सकता है। चीन की धीमी अर्थव्यवस्था का लाभ उठाने की कोशिश के तहत ऐसा किया जाएगा। वित्त मंत्रालय ने बजट की तैयारी शुरू कर दी है। 

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मंत्रालय ने संकेत दिया है कि स्थानीय विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने वाली योजनाओं को फंड आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी। एक अधिकारी ने कहा, भू-राजनीतिक घटनाक्रम चीन में स्थित कंपनियों को विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित कर सकता है। ऐसे में भारत बेहतर विकल्प बन सकता है। भारतीय वस्तुओं के कुछ प्रमुख बाजारों में मंदी के साथ निर्यात में कमी आने को लेकर नीति निर्माताओं में चिंता बढ़ रही है।
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सितंबर में मासिक आर्थिक समीक्षा में आगाह किया गया था कि वैश्विक मंदी निर्यात वृद्धि को कम कर सकती है। इससे व्यापार संतुलन भी प्रभावित हो सकता है। पिछले साल के मुकाबले इस साल अप्रैल-सितंबर में देश का निर्यात 16.96% बढ़ा है। पिछले माह वित्त मंत्री ने बाहरी मोर्चे पर जोखिमों के बारे में आगाह किया था।
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दूसरी तिमाही में तेल कंपनियों को 2,749 करोड़ रुपये का घाटा
सब्सिडी के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को दूसरी तिमाही में 2,749 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। सरकार ने हाल में तीनों कंपनियों को 22,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी थी।


इस दौरान हिंदुस्तान पेट्रोलियम को सर्वािधक 2,172 करोड़ का घाटा हुआ। इंडियन ऑयल को 272.35 करोड़ व भारत पेट्रोलियम को 304 करोड़ की चपत लगी है। वहीं, पहली छमाही में तीनों को 21,201 करोड़ का घाटा हुआ है।

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