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Population: ‘आबादी बढ़ने से देश में 2036 तक अतिरिक्त 6.4 करोड़ घरों की जरूरत’, क्रेडाई-लाइसिस फोरास की रिपोर्ट

Wed, 10 Jan 2024 06:04 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Wed, 10 Jan 2024 06:04 AM IST
सार

रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े शहरों के साथ अब टियर-2 और टियर-3 (मझोले एवं छोटे) शहरों में मकानों की मांग बढ़ती दिखाई दे रही है। इससे मझोले और छोटे शहरों में आवास निर्माण में तेजी आएगी, जिसका सकारात्मक असर रियल एस्टेट उद्योग पर देखने को मिलेगा।
 

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CREDAI-LIC FORAS report claims increase in population additional 6.4 crore houses needed in country
World Population Day new - फोटो : istock

विस्तार

लगातार बढ़ रही आबादी की मांग को पूरा करने के लिए देश में 2036 तक अतिरिक्त 6.4 करोड़ मकानों की जरूरत होगी। क्रेडाई-लाइसिस फोरास ने एक रिपोर्ट में कहा, तेजी से बढ़ती भारतीय आबादी व अर्थव्यवस्था के परिणामस्वरूप मकानों की मांग और आपूर्ति में तेजी आई है। साथ ही, मकान खरीदारों की क्रय क्षमता में भी सुधार हुआ है। वे अब बड़े मकान खरीदना चाहते हैं।
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क्रेडाई ने वाराणसी में आयोजित न्यू इंडिया समिट में डाटा एनालिटिक कंपनी लाइसिस फोरास के साथ मिलकर यह रिपोर्ट पेश की। संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2018 के दौरान कुल 2.9 करोड़ मकानों की कमी थी। कोरोना काल खत्म होने के बाद देशभर में आवासीय संपत्तियों की मांग में तेजी आई है। खास बात है कि महंगे होम लोन और आवासीय संपत्तियों की कीमतों में उछाल के बावजूद लोगों में बड़ा मकान खरीदने की धारणा सकारात्मक बनी हुई है। इन कारकों को देखते हुए देश में 2036 तक कुल 9.3 करोड़ आवासों की मांग होगी।
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छोटे शहरों से तेज मांग की उम्मीद
रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े शहरों के साथ अब टियर-2 और टियर-3 (मझोले एवं छोटे) शहरों में मकानों की मांग बढ़ती दिखाई दे रही है। इससे मझोले और छोटे शहरों में आवास निर्माण में तेजी आएगी, जिसका सकारात्मक असर रियल एस्टेट उद्योग पर देखने को मिलेगा।
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रियल एस्टेट में पीई निवेश 26 फीसदी घटा
रियल एस्टेट में निजी इक्विटी (पीई) निवेश चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-दिसंबर अवधि में 26 फीसदी घटकर 2.65 अरब डॉलर रह गया। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी और घरेलू निवेशकों के सतर्कता से गिरावट आई है। 2022-23 की अप्रैल-दिसंबर अवधि में पीई निवेश 3.6 अरब डॉलर रहा था। एनारॉक कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, कुल पीई निवेश में 84 फीसदी इक्विटी के रूप में आया, जबकि कर्ज के रूप में था।

विदेशी निवेशकों का बढ़ा हिस्सा
एनारॉक कैपिटल के एमडी-सीईओ शोभित अग्रवाल ने कहा, कुल पीई प्रवाह में विदेशी निवेशकों का हिस्सा 79 फीसदी से बढ़कर 86 फीसदी पहुंच गया। घरेलू निवेश हिस्सेदारी घटकर 14 फीसदी रह गई। अप्रैल-दिसंबर में घरेलू निवेशकों का निवेश 71.7 अरब डॉलर से घटकर 36 करोड़ डॉलर रह गया।

पांच लाख करोड़ डॉलर की जीडीपी में भूमिका
लाइसिस फोरास के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक पंकज कपूर ने कहा, भारतीय रियल एस्टेट वर्तमान में एक अत्यंत अहम मोड़ पर है। इसमें निरंतर मांग और आपूर्ति जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। अर्थव्यवस्था को 5 लाख करोड़ डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए एक निश्चित मार्ग प्रशस्त कर रही है।


आगे भी रहेगी मांग
मनोज गौड़, चेयरमैन, क्रेडाई ने कहा कि 2023 सभी रियल एस्टेट हितधारकों के लिए उल्लेखनीय वर्ष रहा। पूरे देशभर में 19,050 से ज्यादा रेरा पंजीकरण हुए। इनमें 45 फीसदी परियोजनाएं आवासीय श्रेणी में थीं। उम्मीद है कि आवासीय संपत्तियों की यह मांग 2024 व उसके बाद भी जारी रहेगी।
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