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Cess: FY2026 में सेस से 4.18 लाख करोड़ रुपये व सरचार्ज से 1.72 लाख करोड़ रुपये जुटाने लक्ष्य, सरकार ने बताया
Tue, 29 Jul 2025 05:06 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 29 Jul 2025 05:06 PM IST
सार
Cess: सदन के साथ साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, केंद्र ने वित्त वर्ष 2026 में उपकर से 4.18 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्र करने का बजट रखा है। यह वित्त वर्ष 2025 के संशोधित अनुमान के अनुसार लगभग 3.87 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
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भारतीय अर्थव्यवस्था।
- फोटो : amarujala
विस्तार
सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 4.18 लाख करोड़ रुपये से अधिक का उपकर संग्रह करने का लक्ष्य रखा है, जो कि वित्त वर्ष 2025 के केंद्रीय बजट के संशोधित अनुमानों से 8 प्रतिशत अधिक है। केंद्र ने मंगलवार को संसद में इस बात की जानकारी दी। चालू वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल-मार्च) में अधिभार (सरचार्ज) से संग्रह लगभग 13 प्रतिशत बढ़कर 1.72 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है।
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राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 271 के तहत संघ के उद्देश्यों के लिए केंद्र सरकार की ओर से उपकर (सेस) और अधिभार (सरचार्ज) लगाए जाते हैं। चौधरी ने कहा, "ऐसे अधिभार और उपकर से प्राप्त राशि का उपयोग केंद्र प्रायोजित योजनाओं के वित्तपोषण जैसी कुछ विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने में किया जाता है। ऐसे व्यय का लाभ राज्यों को भी मिलता है।"
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सदन के साथ साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, केंद्र ने वित्त वर्ष 2026 में उपकर से 4.18 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्र करने का बजट रखा है। यह वित्त वर्ष 2025 के संशोधित अनुमान के अनुसार लगभग 3.87 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
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वित्त वर्ष 2026 में अधिभार संग्रह बढ़कर 1.72 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2025 में संशोधित अनुमान के अनुसार यह 1.53 लाख करोड़ रुपये था।
अधिभार और उपकर से प्राप्त राशि विभाज्य पूल का हिस्सा नहीं बनती और इसलिए राज्यों के साथ साझा नहीं की जाती। केंद्र द्वारा एकत्रित सकल कर राजस्व विभाज्य पूल का हिस्सा बनता है और केंद्र तथा राज्यों के बीच वितरित किया जाता है।
वर्तमान में, आठ अलग-अलग उपकर लागू हैं। ये हैं: कृषि अवसंरचना व विकास उपकर; कच्चे तेल पर उपकर; निर्यात पर उपकर; जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर; स्वास्थ्य उपकर; स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर; राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक शुल्क; और सड़क एवं अवसंरचना उपकर। सीमा शुल्क के अंतर्गत कॉर्पोरेट कर, आयकर और सामाजिक कल्याण अधिभार पर अधिभार लगाया जाता है।