CBI: 8.5 लाख खच्चर खातों के मामले में जांच के दायरे में आए बैंक अधिकारियों से होगी पूछताछ, आया यह अपडेट
CBI Action: सीबीआई के अनुसार संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट (एसटीआर) तैयार करने में प्रणालीगत विफलता देखी गई। अनगिनत खातों में निर्धारित मौद्रिक सीमा से अधिक लेनदेन हुआ, जो संदिग्ध गतिविधि का स्पष्ट संकेत है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
विस्तार
देशभर में हुई एक बड़ी साजिश के तहत अपराध से हुई कालेधन की आय को सफेद करने के मामले में सीबीआई बड़ा कदम उठा रही है। एजेंसी साइबर अपराध गिरोहों के साथ मिलकर अपराध की आय को सफेद करने के आरोपी बैंक अधिकारियों से पूछताछ करेगी। इन अधिकारियों पर पूरे भारत में 8.5 लाख खच्चर खातों के संचालन में मदद करने का आरोप है।
एजेंसी के अधिकारियों ने कहा कि कहा कि दो महीने की जांच के दौरान सीबीआई ने जो एक महत्वपूर्ण लापरवाही पकड़ी। सीबीआई के अनुसार संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट (एसटीआर) तैयार करने में प्रणालीगत विफलता देखी गई। अनगिनत खातों में निर्धारित मौद्रिक सीमा से अधिक लेनदेन हुआ, जो संदिग्ध गतिविधि का स्पष्ट संकेत है।
हाल ही में, दर्ज सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, बैंक अधिकारी खाता खोलने के दौरान ग्राहक से उचित जांच-पड़ताल (सीडीडी) करने में भी विफल रहे, जो प्रारंभिक जोखिम आकलन और सटीक ग्राहक पहचान के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इससे यह संकेत मिलता है कि बुनियादी चूक का मतलब यह है कि ग्राहकों की ओर से उत्पन्न वित्तीय अपराध जोखिमों का अपर्याप्त आकलन किया गया था।
सीबीआई ने एक प्रारंभिक जांच के बाद एफआईआर दर्ज की है, जिसमें पता चला है कि साइबर अपराध सिंडिकेट अज्ञात बैंक अधिकारियों की कथित मिलीभगत से डिजिटल धोखाधड़ी से अवैध आय को सफेद करने के लिए जानबूझकर खच्चर खातों के एक गुप्त नेटवर्क को सुविधाजनक बनाने के लिए काम कर रहे हैं।
सीबीआई के अनुसार, जांच में देशभर में विभिन्न बैंकों की 743 शाखाओं में 8.50 लाख ऐसे खाते पाए गए, जिससे इस खतरे की गंभीरता बढ़ गई। जांच को एफआईआर में शामिल कर लिया गया है और पिछले सप्ताह छापेमारी की गई, जिसमें 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सीबीआई ने एफआईआर में 37 व्यक्तियों को आरोपी बनाया है।
क्या है म्यूल अकाउंट या खच्चर खाते?
म्यूल अकाउंट एक प्रकार का बैंक खाता या वित्तीय खाता है जिसका उपयोग अवैध रूप से धन स्थानांतरित करने या धन के स्रोत को छिपाने के लिए किया जाता है। निम्नलिखित तरीके से काम करता है:
1. कोई व्यक्ति (अक्सर घोटाले या अवैध गतिविधियों में संलिप्त) किसी व्यक्ति से बैंक खाता खोलने या उसके मौजूदा खाते का उपयोग करने के लिए कहता है।
2. खाताधारक ("खच्चर") घोटालेबाज को धन प्राप्त करने और भेजने के लिए अपने खाते का उपयोग करने की अनुमति देता है।
3. घोटालेबाज इस खाते का उपयोग धन शोधन, अपनी पहचान छिपाने, या दूसरों को धोखा देने के लिए करते हैं।
साइबर अपराध गिरोहों के मामले में कैसे हुआ इसका इस्तेमाल?
एजेंसी ने पाया कि दो तरह के म्यूल खाते थे- साइबर और मनी। साइबर म्यूल खाते छोटे खाते थे, जबकि मनी म्यूल खाते कुछ दिनों के अंतराल में कई लेन-देन दिखा रहे थे और कुल राशि रेड फ्लैग की सीमा को पार कर रही थी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मौजूदा दिशा-निर्देशों में स्पष्ट रूप से एसटीआर तैयार करने का निर्देश दिया गया है, यदि किसी खाते की पहचान मनी म्यूल के रूप में की जाती है। यदि कोई एसटीआर दाखिल नहीं किया जाता है, तो इसे आरबीआई परिपत्र का गैर-अनुपालन माना जाता है।
सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि इस घातक धोखाधड़ी में कथित तौर पर साइबर अपराधियों ने धोखाधड़ी करने और पीड़ितों से पैसे ऐंठने के लिए छद्मवेश, गलत बयानी और जाली दस्तावेजों का उपयोग सहित भ्रामक तरीकों का इस्तेमाल किया।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि बैंक आरबीआई के परिपत्रों का उल्लंघन करते हुए 'उचित सावधानी' बरतने में भी विफल रहे हैं। ईडीडी और ग्राहक पहचान और व्यावसायिक गतिविधि के आधार पर कठोर जोखिम वर्गीकरण पर जोर दिया गया।