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कनाडा की अदालत का फैसला: देवास के शेयरधारकों को दी एयर इंडिया के 50 फीसदी फंड की जब्ती जारी रखने की अनुमति

Sun, 09 Jan 2022 09:15 PM IST
गौरव पाण्डेय बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 09 Jan 2022 09:15 PM IST
सार

एयर इंडिया की संपत्ति को जब्त करने के आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए कनाडा की अदालत ने देवास मल्टीमीडिया को संपत्ति जब्त करना जारी रखने का आदेश दिया है।

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Canada court allows Devas shareholders to continue seizure of 50 percent of Air India funds news in Hindi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल

विस्तार

कनाडा की एक अदालत ने देवास मल्टीमीडिया शेयरधारकों को एयर इंडिया के 50 फीसदी फंड को जब्त करना जारी रखने की अनुमति दी है। ये फंड वैश्विक एयरलाइंस निकाय अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन प्राधिकरण (आईएटीए) के अधीन हैं। हालांकि, अदालत ने भारतीय एयरपोर्ट प्राधिकरण (एएआई) को राहत भी दी है और इसके उस फंड को मुक्त कर दिया है जिन्हें देवास मल्टीमीडिया ने जब्त किया था।  

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अदालत ने इस महीने की शुरुआत में कनाडा के क्यूबेक प्रांत में एयर इंडिया और एएआई की संपत्तियां जब्त करने का आदेश दिया। इसके तहत करीब 50 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी। यह मामला इसरो की एंट्रिक्स कॉरपोरेशन और देवास के बीच हुए एक सैटेलाइट सौदे से जुड़ा है, जिसे 2011 में निरस्त कर दिया गया था। एएआई ने इसे लेकर कहा था कि हम इस मामले पर कानूनी सलाह ले रहे हैं।
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सैटेलाइट सौदा रद्द करने से जुड़ा है मामला
27 अक्तूबर 2020 को अमेरिका की एक अदालत ने सैटेलाइट सौदा निरस्त करने के लिए एंट्रिक्स कॉरपोरेशन को देवास मल्टीमीडिया को 1.2 अरब डॉलर का मुआवजा देने का आदेश दिया था। एंट्रिक्स कॉरपोरेशन इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) की व्यावसायिक इकाई और बेंगलुरु का एक स्टार्टअप है। वहीं, आईएटीए एएआई की विदेशी एयरलाइंस से शुल्क एकत्र करने में सहायता करता है।
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आईएटीए के अधीन 50 फीसदी फंड की जब्ती के खिलाफ एएआई व एयर इंडिया ने अपील दाखिल की थी, जिस पर कनाडा की अदालत ने आठ जनवरी को यह फैसला दिया। यह संपत्ति आईएटीए के अधीन है जिसने अदालत को बताया कि तीन जनवरी को उसके पास 31 दिसंबर 2021 तक एयर इंडिया की एक करोड़ 73 लाख डॉलर और 31 दिसंबर 2021 तक एएआई की एक करोड़ 27 लाख डॉलर की संपत्ति थी। 


क्या है पूरा मामला, कहां से शुरू हुआ विवाद
यह मामला सीधे एयर इंडिया से जुड़ा नहीं है। एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन और देवास मल्टीमीडिया के बीच एक सैटेलाइट सौदा हुआ था, जो 2011 में रद्द हो गया था। उसके बाद देवास ने भारत सरकार से नुकसान की भरपाई करने की मांग की थी। मामला अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में पहुंचा, जिसमें देवास की जीत हुई थी। देवास के विदेशी अंशधारक कनाडा, अमेरिका सहित कई देशों में भारत सरकार के खिलाफ केस दायर कर चुके हैं।

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