Biz Updates: भारत, अमेरिकी व्यापार मंत्री 17 मई से व्यापार समझौते की प्रगति का करेंगे आकलन, हुआ यह एलान
भारत और अमेरिका प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए वार्ता की प्रगति का आकलन करने, मुख्य वार्ताकारों को राजनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करने और आर्थिक संबंधों को गहरा करने के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए 17 मई से वाशिंगटन में मंत्रिस्तरीय बैठकें शुरू करेंगे।
सरकार से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल अपनी चार दिवसीय यात्रा के दौरान पहले अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड ल्यूटनिक और बाद में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जेमीसन ग्रीर के साथ समझौते पर विचार-विमर्श करेंगे।
अधिकारी ने कहा, "मंत्री बातचीत को राजनीतिक दिशा देने के लिए राजनीतिक स्तर पर चर्चा करेंगे। वे पिछले दो महीनों में बातचीत में हुई प्रगति का आकलन करेंगे।" यह गोयल की अमेरिका की दूसरी यात्रा होगी। मंत्री स्तरीय बैठक के बाद 19 मई से 22 मई तक दोनों देशों के मुख्य वार्ताकारों के बीच विचार-विमर्श होगा।
भारत में सबसे तेज बढ़ेगी तेल की मांग, चीन से दोगुना होगी वृद्धि दर
तेल उत्पादक संगठन ओपेक ने कहा है कि भारत की तेल मांग प्रमुख देशों में सबसे तेज गति से बढ़ेगी। 2025 और 2026 में यह चीन की वृद्धि दर से दोगुनी हो जाएगी। भारत की तेल मांग 2024 में 55.5 लाख बैरल प्रतिदिन से बढ़कर 2025 में 57.4 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) तक पहुंचने का अनुमान है, जो कि 3.39 प्रतिशत की वृद्धि है। इससे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में बढ़ती ऊर्जा जरूरतों से मदद मिलेगी। 2026 में तेल की मांग 4.28 प्रतिशत बढ़कर 59.9 लाख टन बीपीडी हो जाएगी। यह वृद्धि 2025 में चीन की मांग में 1.5 फीसदी व 2026 में 1.25 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि से अधिक है। अमेरिका 2025 में 2.05 करोड़ बीपीडी की मांग के साथ सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता बना रहेगा। चीन 2025 में 1.69 करोड़ बीपीडी व 2026 में 1.71 करोड़ बीपीडी के साथ दूसरे स्थान पर होगा।
लाभांश देने पर 23 मई को फैसला लेगा आरबीआई
आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड ने अपने आर्थिक पूंजी ढांचे की समीक्षा की है। इस समीक्षा के आधार पर ही सरकार को लाभांश दिया जाएगा। आरबीआई ने 2023-24 के लिए सरकार को रिकॉर्ड 2.1 लाख करोड़ का लाभांश दिया था। इस बार लाभांश भुगतान अधिक होने की उम्मीद है। इसका निर्णय 23 मई की बैठक में लिया जाएगा।
वर्या क्रिएशंस व सात प्रवर्तकों पर सेबी का प्रतिबंध
आईपीओ रकम के दुरुपयोग के चलते सेबी ने वर्या क्रिएशंस और उसके सात प्रवर्तकों पर शेयर बाजार में कारोबार करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन्वेंचर मर्चेंट बैंकिंग को नए कारोबार लेने पर रोक लगा दी है।कंपनी 20.10 करोड़ का आईपीओ लाई थी और 30 अप्रैल, 2024 को बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध हुई। सेबी ने कहा, आईपीई रकम की 70 फीसदी राशि कावेरी कॉरपोरेशन, मारुति कॉरपोरेशन और ओवरसीज मेटल को ट्रांसफर की गई थी।
राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ ने कहा है कि भारत का चीनी का अंतिम भंडार 48 से 50 लाख टन रहने का अनुमान है। यह भंडार चालू सत्र 2024-25 में उत्पादन में गिरावट के बावजूद अक्तूबर-नवंबर 2025 में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। 2024-25 सत्र के 15 मई तक चीनी उत्पादन 18.38 प्रतिशत घटकर 2.57 करोड़ टन रह गया।
आईटीसी को मार्च तिमाही में 257.85 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है। एक साल पहले की तुलना में यह 19 फीसदी अधिक है। कंपनी ने बताया, राजस्व 1,060 करोड़ और खर्च 750 करोड़ रुपये रहा। पूरे वित्त वर्ष में लाभ 637 करोड़ रुपये रहा, जो 2023-24 में 423 करोड़ रुपये था। 2024-25 में कुल राजस्व 3,559 करोड़ रुपये से अधिक रहा।
सरकार ने 187 स्टार्टअप कंपनियों को आयकर छूट की मंजूरी दी है। इसके तहत, पात्र स्टार्टअप को अपने गठन की तारीख से 10 साल की अवधि के भीतर किसी भी लगातार तीन वर्षों के लिए मुनाफे पर 100 फीसदी आयकर छूट की अनुमति मिलती है। आयकर लाभ योजना उभरते व्यवसायों को उनके प्रारंभिक वर्षों में सहायता देकर, नवाचार, रोजगार एवं धन सृजन को प्रोत्साहित करने के लिए तैयार की गई है। वाणिज्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने आयकर अधिनियम की संशोधित धारा 80-आईएसी के तहत 187 स्टार्टअप को कर छूट के लिए मंजूरी दे दी है।
ट्रम्प के व्यापार युद्ध से निर्यात प्रभावित होने से जापान की अर्थव्यवस्था सिकुड़ी, आत्मविश्वास डगमगाया
टोक्यो: शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पहली तिमाही में जापानी अर्थव्यवस्था में 0.7% की वार्षिक दर से संकुचन हुआ, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के व्यापार युद्ध ने निर्यात को नुकसान पहुंचाया और उपभोक्ता विश्वास को कम किया।
कैबिनेट कार्यालय के मौसमी रूप से समायोजित प्रारंभिक आंकड़ों से पता चला है कि जापान का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद, या किसी देश की वस्तुओं और सेवाओं का माप, जनवरी-मार्च में पिछली तिमाही की तुलना में अपेक्षा से अधिक 0.2% सिकुड़ गया, जो एक साल में पहली बार संकुचन है। निर्यात में 2.3% की वार्षिक दर से गिरावट आई। उपभोक्ता व्यय स्थिर रहा, जबकि पूंजी निवेश में 5.8% की वृद्धि हुई।
रक्षा शेयरों में शुक्रवार को भी दिखा उछाल
डिफेंस सेक्टर की कंपनियों में शुक्रवार को भी बढ़त दिखी। डिफेंस कंपनियों में निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर सबसे ज्यादा पारस डिफेंस एंड स्पेस टेकनोलॉजीज के शेयर में 18.09 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है।
डेटा पैटर्न्स के शेयर में 9.25 प्रतिशत, एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स के शेयर में 7.10 प्रतिशत, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स के शेयर में 5.40 प्रतिशत, मिश्र धातु निगम के शेयर में 4.63 प्रतिशत, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर में 3.87 प्रतिशत तथा भारत डायनेमिक्स के शेयर में 1.95 प्रतिशत की तेजी आई। ड्रोन निर्माता ड्रोनाचार्य एरियल इनोवेशन के शेयर में 2 प्रतिशत की तेजी आई।
इक्विटी बाजार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 200.15 अंक या 0.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,330.59 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 42.30 अंक या 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,019.80 अंक पर बंद हुआ। डिफेंस सेक्टर के शेयरों में बीते 5 दिनों से तेजी रही।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा निवेशकों का भरोसा
22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहगाम में हुए आतंकी हमले की कार्रवाई में ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल देखने को मिला। इसके बाद से डिफेंश कंपनियों के शेयरों में जोरदार उछाल हो रहा है और पारस डिफेंस इसमें पहले नंबर पर है।
डॉयचे बैंक एजी और यस बैंक पर 79.60 लाख का जुर्माना
आरबीआई ने कुछ नियामकीय मानदंडों का पालन नहीं करने के लिए डॉयचे बैंक एजी, इंडिया और यस बैंक पर कुल 79.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
आरबीआई ने शुक्रवार को कहा, डॉयचे बैंक एजी, इंडिया पर बैंकों में बड़े कर्ज को लेकर केंद्रीय रिपॉजिटरी बनाने से जुड़े कुछ निर्देशों का पालन नहीं करने के लिए 50 लाख का जुर्माना लगाया गया है। वहीं, वित्तीय विवरण प्रस्तुति एवं खुलासा पर आरबीआई के कुछ निर्देशों का पालन नहीं करने के लिए यस बैंक पर 29.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। दोनों मामलों में आरबीआई ने कहा, जुर्माना नियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य बैंकों की ओर से अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता पर फैसला सुनाना नहीं है।