Biz Updates: पर्यटन मंत्रालय और इंडिगो में अहम समझौता; 27 महीने के लिए बढ़ाया गया IFSCA चेयरमैन का कार्यकाल
पूंजी बाजार नियामक सेबी ने अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (एआईएफ) की नई योजनाओं को बाजार में तेजी से उतारने के लिए गरुड़ नाम से नया ग्रीन चैनल ढांचा जारी किया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य स्कीम लॉन्च की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना है। सेबी ने अपने सर्कुलर में कहा कि नए ढांचे के तहत नियमित एआईएफ स्कीमों के लिए आवदेन दाखिल करने के 10 दिनों में स्कीम लॉन्च की जा सकेगी। हालांकि, इस बदलाव का सीधा असर खुदरा निवेशकों पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि एआईएफ में आमतौर पर एक करोड़ रुपये या उससे अधिक का निवेश करने वाले बड़े या मान्यता प्राप्त निवेशक ही भाग लेते हैं।
खनन एवं धातु क्षेत्र की प्रमुख कंपनी वेदांता लि. ने अरुण मिश्रा को सीईओ नियुक्त किया है। वह एक अगस्त 2026 से एक वर्ष के लिए पद संभालेंगे। 2026-27 की जून तिमाही में वेदांता का शुद्ध लाभ 71.8 फीसदी बढ़कर 5,473 करोड़ हो गया, जो पहले 3,185 करोड़ था।
ऑटोमोबाइल कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा को 2026-27 की पहली तिमाही में 34 फीसदी वृद्धि के साथ 5,455 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ है। पिछले वर्ष यह 4,083 करोड़ था। उधर, फूड डिलीवरी व क्विक कॉमर्स कंपनी स्विगी 791 करोड़ के नुकसान में रही। पिछले वर्ष के 1,197 करोड़ की तुलना में यह 34 फीसदी कम है।
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी ने गुजरात के हंसलपुर विनिर्माण संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता 7.5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख वाहन कर दी है। अब यह सुजुकी का सबसे बड़ा यात्री वाहन उत्पादन केंद्र बन गया है। यह भारत का सबसे बड़ा कार संयंत्र भी होगा। शुरुआत में कंपनी यहां अपनी प्रमुख इलेक्ट्रिक एसयूवी ई-विटारा का उत्पादन करेगी।
भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा रैंकिंग में 82वें स्थान से 57वें स्थान पर पहुंच गया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2010 से 2023 के बीच भारत ने 25 स्थान की छलांग लगाई है। विसंगतियां कम करके प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और नियामकीय ढांचा मजबूत करने वाले सुधारों ने भारत की स्थिति पहले से बेहतर की है।
अगर आप आयकर रिटर्न (आईटीआर) समय पर दाखिल करने से चूक गए तो आपको जुर्माने के रूप में मोटी रकम चुकानी पड़ सकती है। आयकर विभाग के अनुसार, निर्धारित समय सीमा के बाद रिटर्न दाखिल करने पर 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की लेट फीस देनी होगी। अगर करदाता की कुल आय 5 लाख रुपये तक है तो उसे अधिकतम 1,000 रुपये जुर्माना देना होगा। आय 5 लाख रुपये से अधिक होने पर 5,000 रुपये तक लेट फीस लगेगी। ऐसे करदाताओं को विलंबित रिटर्न दाखिल करना होगा। इन मामलों में रिफंड मिलने में देरी के साथ कुछ घाटों को अगले वर्षों में समायोजित करने का लाभ भी नहीं मिल पाता।
- इन्हें मिलेगी 31 अगस्त तक राहत: आम धारणा यह है कि 31 जुलाई सभी करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख है। हालांकि, आकलन वर्ष 2026-27 के लिए ऐसा नहीं है। बजट में किए गए संशोधनों के बाद कुछ करदाताओं को 31 अगस्त 2026 तक आयकर रिटर्न दाखिल फाइल करने की राहत दी गई है। नए प्रावधानों के तहत गैर-ऑडिट वाले कारोबारी, पेशेवर एवं कुछ ट्रस्ट 31 अगस्त 2026 तक अपना आयकर रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।
- बहुत से करदाता आईटीआर फाइल करने की प्रक्रिया तो पूरी कर लेते हैं, लेकिन अपने रिटर्न को ई-वेरिफाई करना भूल जाते हैं। आयकर नियमों के अनुसार, फाइलिंग के 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर आपका रिटर्न अमान्य माना जाता है और टैक्स रिफंड अटक सकता है।
आईएफएससीए के चेयरमैन के. राजारामन का कार्यकाल बढ़ा
केंद्र सरकार ने इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी के चेयरमैन के. राजारामन का कार्यकाल अक्टूबर 2028 तक बढ़ा दिया है। वित्त मंत्रालय की 30 जुलाई की राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, उन्हें 31 जुलाई 2026 के बाद दोबारा नियुक्त किया गया है और वह 65 वर्ष की आयु पूरी करने यानी 24 अक्टूबर 2028 तक या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, इस पद पर बने रहेंगे। राजारामन को वर्ष 2023 में पहली बार तीन साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया था। इससे पहले वह भारत सरकार के दूरसंचार विभाग में सचिव रह चुके हैं। आईएफएससीए की स्थापना अप्रैल 2020 में इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी अधिनियम, 2019 के तहत की गई थी और इसका मुख्यालय गुजरात के गिफ्ट सिटी (गांधीनगर) में स्थित है। यह संस्था भारत के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र में वित्तीय उत्पादों, वित्तीय सेवाओं और वित्तीय संस्थानों के विकास और नियमन के लिए एकीकृत नियामक के रूप में कार्य करती है। वर्तमान में गिफ्ट आईएफएससी देश का एकमात्र अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र है। आईएफएससीए के गठन से पहले यहां के कारोबार का नियमन आरबीआई, सेबी, पीएफआरडीए और इरडाई जैसे अलग-अलग नियामक संस्थान करते थे।