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Budget: पूंजीगत व्यय की गति कम करने के दबाव के बावजूद रेलवे का आवंटन बढ़ने का अनुमान, सरकार कर सकती है ये एलान

Tue, 25 Jun 2024 12:57 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 25 Jun 2024 12:57 PM IST
सार

Budget Expectations 2024-25: पिछले कुछ वर्षों में पूंजीगत व्यय वित्तपोषण में जीबीएस की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है, जबकि ईबीआर में गिरावट आई है। EBR में भारतीय रेलवे वित्त निगम (IRFC), संस्थागत वित्तपोषण, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और सार्वजनिक-निजी भागीदारी जैसे स्रोतों से उधार शामिल हैं। ईबीआर के लिए आवंटन सरकार को यदि आवश्यक हो तो निवेश में देरी करने की अनुमति देता है, लेकिन बजटीय समर्थन में वृद्धि तत्काल खर्च और पूंजीगत व्यय के प्रति प्रतिबद्धता का संकेत देती है।

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Budget Expectations 2024-25: High allocation expected in Budget for railways despite capex pressure
रेलवे के लिए बजट में अनुमान - फोटो : amarujala.com

विस्तार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जुलाई महीने में किसी भी दिन बजट पेश कर सकती हैं। संसद के जारी शपथ ग्रहण सत्र के दौरान ही बजट की तारीख पर स्थिति साफ हो सकती है। बजट 2024-25 में सरकार की ओर से बुनियादी ढांचे पर बजटीय पूंजीगत व्यय की गति को कम करने के दबाव के बावजूद रेलवे क्षेत्र के लिए आवंटन अधिक रहने की उम्मीद है। आइए जानते हैं कि इस साल फरवरी में पेश हुए अंतरिम बजट में रेलवे के हिस्से क्या आया था और जुलाई में आने वाले केंद्रीय बजट 2024-25 में रेलवे को कितनी राशि मिलने का अनुमान है।

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Budget Expectations 2024-25: High allocation expected in Budget for railways despite capex pressure
मुरादाबाद रेलवे स्टेशन - फोटो : अमर उजाला

अंतरिम बजट में जीबीएस मद में 2.52 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए

2024-25 के अंतरिम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रेलवे को सकल बजटीय सहायता (जीबीएस) के रूप में 2,52,200 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। इसके साथ ही अतिरिक्त बजटीय संसाधनों (ईबीआर) से अतिरिक्त 10,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि जीबीएस कम से कम इसी स्तर पर रहने का अनुमान है। वहीं कुल बजट संभावित रूप से 2.6 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है। पिछले कुछ वर्षों में पूंजीगत व्यय वित्तपोषण में जीबीएस की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है, जबकि ईबीआर में गिरावट आई है। EBR में भारतीय रेलवे वित्त निगम (IRFC), संस्थागत वित्तपोषण, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और सार्वजनिक-निजी भागीदारी जैसे स्रोतों से उधार शामिल हैं। ईबीआर के लिए आवंटन सरकार को यदि आवश्यक हो तो निवेश में देरी करने की अनुमति देता है, लेकिन बजटीय समर्थन में वृद्धि तत्काल खर्च और पूंजीगत व्यय के प्रति प्रतिबद्धता का संकेत देती है।

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Budget Expectations 2024-25: High allocation expected in Budget for railways despite capex pressure
वंदे भारत ट्रेनें - फोटो : एएनआई (फाइल)

सरकार की प्राथमिकता सूची में सुरक्षा के अलावे कोच, सिग्नलिंग और हाई स्पीड ट्रेनें

इस बीच, उद्योग के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि सड़क और राजमार्ग निर्माण खर्च अपने चक्र के अंत के करीब है। इसके लिए अंतरिम बजट में 2.78 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। ऐसे में इस बार के बजट में निवेश का महत्वपूर्ण फोकस रेलवे पर रह सकता है। सरकार रेलवे के बुनियादी ढांचे के सभी क्षेत्रों में पर्याप्त निवेश के साथ जीडीपी के सापेक्ष रसद लागत को कम करने के लिए रेलवे का खर्च मजबूती से जारी रखने के लिए तैयार है। सरकार की प्राथमिकता सूची में वैगन और कोच, सिग्नलिंग, नई लाइनें, गेज रूपांतरण और हाई-स्पीड ट्रेनें शामिल हैं।

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Budget Expectations 2024-25: High allocation expected in Budget for railways despite capex pressure
रेल को हादसों से बचने की तैयारी - फोटो : पीटीआई

कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली का दायरा बढ़ाने में तेजी लाने की तैयारी

इस साल रेलवे आवंटन में वृद्धि हुई है, जिसमें सरकार सुरक्षा और यात्री आराम को प्राथमिकता दे रही है। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में हाल ही में हुई ट्रेन दुर्घटनाओं से बचाव के लिए सरकार कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली की स्थापना में भी तेजी जाने की तैयारी कर रही है। एक मीडिया रिपोर्ट में रेलवे के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि सरकार की ओर से बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना जारी रहेगा और रेलवे अगले दशक तक एक महत्वपूर्ण निवेश क्षेत्र बना रहेगा। निजी खपत की ओर पूरे साल के बजट में संसाधन बदलाव के बारे में प्रारंभिक चिंताएं कम हो गई हैं। इससे सड़क और रेलवे जैसे क्षेत्रों में भारी पूंजीगत व्यय परिव्यय के लिए पर्याप्त जगह मिल गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सरकार को 2.11 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड तोड़ लाभांश देने जा रहा है, ऐसे में सरकार की ओर से खपत बढ़ाने और उच्च पूंजीगत व्यय योजनाओं को बनाए रखने के बीच खर्च को संतुलित करने की गुंजाइश है।

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