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Budget 2024: देश की आधी आबादी को सरकार ने क्या दिया? जानें बजट में नारी शक्ति से किए गए वादों को विस्तार से
Tue, 23 Jul 2024 11:06 AM IST
श्वेता महतो
न्यूज जेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज जेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता महतो
Updated Tue, 23 Jul 2024 11:06 AM IST
सार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024-25 के लिए लगातार सातवीं बार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट मंगलवार को लोकसभा में पेश किया। इस दौराप सरकार ने देश की आधी आबादी यानी महिलाओं के लिए कई बड़े एलान किए।
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केंद्रीय बजट 2024-25
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
Budget 2024: संसद का बजट सत्र बीते दिन यानी 22 जुलाई से शुरू हो चुका है। आज यानी 23 जुलाई को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में केंद्रीय बजट पेश किया। इस बार बजट पेश करने के बाद वित्तमंत्री का नाम एक अनोखा रिकॉर्ड दर्ज हो गया। वह लगातार 7 बार बजट पेश करने वाली देश की पहली वित्तमंत्री बन गईं। इस बजट में सरकार ने देश की आधी आबादी यानी महिलाओं के लिए बड़े एलान किए। आइए जानते हैं उनके बारे में और इससे पहले पेश हुए अंतरिम बजट के बार में विस्तार से…
पहले जानते हैं कि 2023 के बजट में महिलाओं को क्या मिला था…
फिर अंतरिम बजट में क्या दिया…
अब पूर्ण बजट में क्या उम्मीदें?
देश में करीब 12 साल पहले तक महिलाओं के लिए अलग टैक्स की सुविधा थी। इसमें महिला करदाताओं के लिए इनकम टैक्स में बेसिक एग्जेंप्शन लिमिट पुरुषों की तुलना में थोड़ी अधिक होती थी। यानी महिलाएं पुरुषों की तुलना में कम टैक्स चुकाती थीं। लेकिन कांग्रेस सरकार ने वित्त वर्ष 2012-13 ने इस प्रणाली को खत्म कर दिया था। तब सरकार ने महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए समान टैक्स स्लैब पेश किया था। तब से महिलाओं के लिए कोई अलग आयकर स्लैब नहीं है। हालांकि इस बार महिलाओं को मोदी सरकार से उम्मीद है कि महिलाओं के लिए अलग से टैक्स स्लैब आएगा।
सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि महिला वोटर को ध्यान में रखते हुए सरकार महिला करदाताओं के लिए अलग से टैक्स स्लैब ला सकती है। यानी उन्हें अलग और ज्यादा छूट बजट में मिल सकती है। अभी नई कर व्यवस्था में 7 लाख तक कोई टैक्स नहीं देना होता है। अब सरकार इसे 8 लाख रुपये तक कर सकती है
देश में बड़ी संख्या में कपड़ा और हस्तकला उद्योगों से जुड़ी है। वे बजट में कपड़े पर कम करने की उम्मीद कर रही है, ताकि इससे जुड़े बिजनेस को बढ़ावा मिले। उनकी दूसरी बड़ी मांग है कि महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा बैंकिंग से जोड़ा जाएं। महिलाएं स्वरोजगार और स्किल डेवलपमेंट बजट में सरकार से विशेष एलान की उम्मीद भी कर रही हैं। सैलेरी पाने वाले कर्मचारी को हाउसिंग लोन में इंटरेस्ट के डिडेक्शन का नई टैक्स व्यवस्था में कोई लाभ नहीं होता है। महिलाओं का कहना है कि सरकार को इस दिशा में कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे यह लाभ मिल सके।
फिक्की लेडीज ऑर्गेनाइजेशन जुड़ीं राधिका डालमिया ने कहा, "महिला उद्यमियों के लिए कर में छूट और कामकाजी माताओं के लिए पेड हॉलिडे बढ़ने की उम्मीद है। इस बजट में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना भत्ता बढ़ाना और लड़कियों के लिए शिक्षा लाभ बढ़ाना महत्वपूर्ण कदम हैं। भारत के लिए विशेष रूप से लड़कियों की शिक्षा को प्राथमिकता देने के साथ-साथ वित्तीय समावेशन और स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना महत्वपूर्ण है।"
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पहले जानते हैं कि 2023 के बजट में महिलाओं को क्या मिला था…
- पिछले बजट यानी 2023 में केंद्र सरकार ने महिला सशक्तिकरण के लिए महिला सम्मान बचत सर्टिफिकेट योजना की शुरुआत की थी। यह योजना मार्च 2025 तक उपलब्ध है और इसमें महिलाओं या लड़कियों के नाम पर दो साल के लिए अधिकतम दो लाख रुपये 7 प्रतिशत की ब्याज दर पर जमा किए जा सकते हैं।
- दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बनाए गए महिलाओं के 81 लाख सेल्फ हेल्प ग्रुप को आर्थिक रूप से और सशक्त करने का एलान किया गया था। जिसके तहत इन सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को मिलाकर उन्हें कच्चा माल मुहैया कराकर और उन्हें डिजाइन, क्वालिटी, ब्रांडिंग और मार्केटिंग की ट्रेनिंग देकर इन्हें प्रोड्यूसर एंटरप्राइजेज के तौर पर विकसित करने का एलान किया गया था।
- पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत देश की तीन करोड़ महिला किसानों के बैंक खातों में 54 हजार करोड़ रुपये डाले गए।
- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के बजट में वित्तीय वर्ष 2022-23 की तुलना में 267 करोड़ रुपये ज्यादा कुल 25,448 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।
- लिंगानुपात को बेहतर करने के लिए 2,23,219 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।
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फिर अंतरिम बजट में क्या दिया…
- अंतरिम बजट में महिलाओं को आर्थिक तौर पर सशक्त बनाने के लिए 83 लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी नौ करोड़ महिलाओं में से तीन करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य तय किया गया था। इन स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं में से एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने में सफलता पहले ही मिल चुकी है।
- अंतरिम बजट में 30 करोड़ महिला उद्यमियों को मुद्रा योजना लोन दिए जाने और उच्च शिक्षा में महिलाओं के एडमिशन लेने में बीते 10 सालों में 28 प्रतिशत का उछाल आने की बात कही गई।
- सरकार ने फरवरी के बजट में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए 9 से 14 वर्ष की उम्र की बालिकाओं का टीकाकरण कराने का भी एलान किया था।
- माताओं और बच्चों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराने के लिए 'सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0' के अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्रों के उन्नयन में तेजी लाने का एलान किया गया।
- मिशन इंद्रधनुष के तहत टीकाकरण के लिए U-WIN प्लेटफॉर्म बनाने का एलान किया गया जिससे जिससे घर बैठे ही टीकाकरण संबंधी जानकारी उपलब्ध हो सके।
- आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पतालों में इलाज की सुविधा देने का भी एलान वित्त मंत्री ने किया था।
अब पूर्ण बजट में क्या उम्मीदें?
देश में करीब 12 साल पहले तक महिलाओं के लिए अलग टैक्स की सुविधा थी। इसमें महिला करदाताओं के लिए इनकम टैक्स में बेसिक एग्जेंप्शन लिमिट पुरुषों की तुलना में थोड़ी अधिक होती थी। यानी महिलाएं पुरुषों की तुलना में कम टैक्स चुकाती थीं। लेकिन कांग्रेस सरकार ने वित्त वर्ष 2012-13 ने इस प्रणाली को खत्म कर दिया था। तब सरकार ने महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए समान टैक्स स्लैब पेश किया था। तब से महिलाओं के लिए कोई अलग आयकर स्लैब नहीं है। हालांकि इस बार महिलाओं को मोदी सरकार से उम्मीद है कि महिलाओं के लिए अलग से टैक्स स्लैब आएगा।
सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि महिला वोटर को ध्यान में रखते हुए सरकार महिला करदाताओं के लिए अलग से टैक्स स्लैब ला सकती है। यानी उन्हें अलग और ज्यादा छूट बजट में मिल सकती है। अभी नई कर व्यवस्था में 7 लाख तक कोई टैक्स नहीं देना होता है। अब सरकार इसे 8 लाख रुपये तक कर सकती है
देश में बड़ी संख्या में कपड़ा और हस्तकला उद्योगों से जुड़ी है। वे बजट में कपड़े पर कम करने की उम्मीद कर रही है, ताकि इससे जुड़े बिजनेस को बढ़ावा मिले। उनकी दूसरी बड़ी मांग है कि महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा बैंकिंग से जोड़ा जाएं। महिलाएं स्वरोजगार और स्किल डेवलपमेंट बजट में सरकार से विशेष एलान की उम्मीद भी कर रही हैं। सैलेरी पाने वाले कर्मचारी को हाउसिंग लोन में इंटरेस्ट के डिडेक्शन का नई टैक्स व्यवस्था में कोई लाभ नहीं होता है। महिलाओं का कहना है कि सरकार को इस दिशा में कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे यह लाभ मिल सके।
फिक्की लेडीज ऑर्गेनाइजेशन जुड़ीं राधिका डालमिया ने कहा, "महिला उद्यमियों के लिए कर में छूट और कामकाजी माताओं के लिए पेड हॉलिडे बढ़ने की उम्मीद है। इस बजट में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना भत्ता बढ़ाना और लड़कियों के लिए शिक्षा लाभ बढ़ाना महत्वपूर्ण कदम हैं। भारत के लिए विशेष रूप से लड़कियों की शिक्षा को प्राथमिकता देने के साथ-साथ वित्तीय समावेशन और स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना महत्वपूर्ण है।"