Cotton: कपास आयात छूट बढ़ाने के फैसले पर बीकेएस ने जताई आपत्ति, कहा- किसानों को होगा नुकसान
भारतीय किसान संघ ने केंद्र से कपास आयात शुल्क पर छूट को 31 दिसंबर तक बढ़ाने के अपने फैसले को वापस लेने का आग्रह किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस कदम से घरेलू किसानों को नुकसान हो सकता है और भारत आयात पर निर्भरता की ओर बढ़ सकता है।
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भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने सरकार से कपास आयात शुल्क पर छूट की समयसीमा बढ़ाने के फैसले को वापस लेने का आग्रह किया। वित्त मंत्रालय ने शुरुआत में 11 अगस्त से 30 सितंबर, 2025 तक कपास आयात शुल्क पर छूट दी थी। हालिया फैसले ने इस छूट को दिसंबर के अंत तक बढ़ा दिया गया है।
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घरेलू किसानों को नुकसान का खतरा
बीकेएस ने चेतावनी दी है कि इस कदम से घरेलू किसानों को नुकसान हो सकता है और भारत आयात पर निर्भरता की ओर बढ़ सकता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे एक पत्र में यह अपील की गई है। पत्र की एक प्रति केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी भेजी गई।
भारत का कपास उत्पादन लगभग 320 लाख गट्ठर है
पत्र के अनुसार, भारतीय कपास संघ (बीकेएस) ने बताया कि भारत का कपास उत्पादन लगभग 320 लाख गट्ठर है। वहीं घरेलू मांग लगभग 391 लाख गट्ठर है। भारत में कपास की एक मानक गट्ठर का वजन लगभग 170 किलोग्राम होता है। मिलों का अनुमान है कि आमतौर पर हर साल लगभग 60-70 लाख गट्ठर आयात की जाती हैं। यह देश के कुल कपास उपयोग का लगभग 12 प्रतिशत है।
खेती का रकबा पिछले साल की तुलना में 3.2 प्रतिशत कम हुआ
किसान संगठन ने कहा कि इस साल कपास की खेती का रकबा पिछले साल की तुलना में 3.2 प्रतिशत कम हुआ है। भारतीय किसान संघ ने चेतावनी दी है कि अगर घरेलू कपास बीज की उपलब्धता नहीं बढ़ी, तो भारत कपास का निर्यातक देश होने के बजाय आयातक देश बन जाएगा ।
कीमतों के गिरने का खतरा
इसमें कहा गया है कि केंद्र की घोषणा के बाद कपास की कीमतें पहले ही 7,000 रुपये प्रति क्विटल से गिरकर 6,000 रुपये प्रति क्विटल पर आ चुकी हैं। और अगर दिसंबर तक शुल्क-मुक्त आयात जारी रहा, तो कीमतें और गिर सकती हैं। भारतीय किसान संघ ने पत्र में सवाल किया, अगर कपास का आयात केवल 2,000 रुपये प्रति क्विटल पर किया जाता है, तो क्या कोई हमारे किसानों से 5,000 रुपये प्रति क्विटल पर खरीदेगा?
संघ ने विदेशियों पर निर्भर होने की दी चेतावनी
भारतीय किसान संघ के महासचिव मोहन मित्रा ने जोर देकर कहा कि सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने वित्त मंत्री को लिखे पत्र में लिखा कि अगर सरकार कपास आयात पर छूट के इस फैसले को नहीं रोकती, तो भारत आत्मनिर्भर होने के बजाय कपास क्षेत्र में विदेशियों पर निर्भर हो जाएगा।