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बांग्लादेश में बेस्वाद हो रहा व्यंजनों का जायका, भारत से की प्याज भेजने की अपील
Wed, 23 Oct 2019 05:39 PM IST
Harendra Chaudhary
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Wed, 23 Oct 2019 05:39 PM IST
सार
- बांग्लादेश में छह लाख टन प्याज की कमी
- बांग्लादेश में प्याज की खपत का 80 फीसदी हिस्सा भारत से होता है पूरा
- असम के मुख्यमंत्री ने भारत-बांग्लादेश के बीच संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया, पूर्वोत्तर के विकास के लिए बताया जरूरी
- BBIN मोटर व्हीकल एग्रीमेंट को आगे बढ़ाने के लिए सभी पक्षों से खुले दिल से विचार करने का आग्रह किया
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Onion in Bangladesh
- फोटो : The Daily Star
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विस्तार
घरेलू बाजार में प्याज की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए भारत ने इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगा रखा है। लेकिन इस प्रतिबंध के कारण पड़ोसी देश बांग्लादेश के खाने का जायका बिगड़ गया है। बांग्लादेश में प्याज की कीमतें आसमान छू रही हैं और आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गई हैं। इस परिस्थिति को देखते हुए बांग्लादेश ने भारत से प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध हटाने की मांग की है। बांग्लादेश में प्याज की खपत का अस्सी फीसदी हिस्सा भारत से पूरा किया जाता है। लेकिन प्रतिबंधों के चलते बांग्लादेश में छह लाख टन प्याज की कमी हो गई है। चीन के बाद भारत बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है।
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द्विपक्षीय व्यापार 900 करोड़ रुपये सालाना
बांग्लादेश के वाणिज्य मंत्री टीपू मुंशी ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत हमारा पड़ोसी ही नहीं, हर परिस्थिति में साथ निभाने वाला सबसे बेहतर दोस्त भी है। दोनों देशों के बीच व्यापार की स्थितियां लगातार बेहतर हुई हैं। हाल के वर्षों में भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय व्यापार पांच सौ करोड़ रुपये से बढ़कर नौ सौ करोड़ रुपये प्रति वर्ष हो गया है। अगर दोनों देशों के बीच आवागमन और संपर्क की सुविधा बेहतर होती है, तो इससे पूरे क्षेत्र का तेज आर्थिक विकास होगा और सबको लाभ मिलेगा। वे 'भारत-बांग्लादेश स्टेकहोल्डर्स मीट' को संबोधित कर रहे थे।
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बांग्लादेश से होकर गुजरती थी ट्रेनें
असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दोनों देशों के पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक रिश्तों को याद करते हुए कहा कि पूर्व में असम की चाय को कोलकाता बंदरगाह तक पहुंचाने के लिए ब्रह्मपुत्र-पद्मा और मेघना नदियों के जलमार्ग का उपयोग किया जाता था। इसके अलावा रेललाइन भी आज के बांग्लादेश से होकर गुजरती थी। अब समय की जरुरतों को देखते हुए पूर्व के रास्तों के साथ-साथ नई संभावनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए। यह दोनों देशों के लोगों के हितों के लिए बेहतर होगा।
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