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अनिल अंबानी: सीबीआई का नया केस, ईडी की नौ घंटे पूछताछ; क्या है ₹2220 करोड़ का बैंक फ्रॉड मामला? जानें सबकुछ

Thu, 26 Feb 2026 08:01 PM IST
Kumar Vivek बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Thu, 26 Feb 2026 08:01 PM IST
सार

क्या अनिल अंबानी की मुश्किलें और बढ़ेंगी? 2220 करोड़ रुपये के बैंक ऑफ बड़ौदा फ्रॉड में सीबीआई की ताजा छापेमारी और 40 हजार करोड़ रुपये के घोटाले में ईडी की पूछताछ की पूरी इनसाइड स्टोरी पढ़ें। 

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Anil Ambani CBI Probe Reliance Communications Bank of Baroda Bank Fraud ED Questioning Money Laundering
सोने-चांदी का भाव - फोटो : amarujala.com

विस्तार

अनिल अंबानी और उनकी कर्ज में डूबी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) की परेशानी खत्म होती नहीं दिख रही। बुधवार को एक तरफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 2,220 करोड़ रुपये से ज्यादा के कथित बैंक ऑफ बड़ौदा धोखाधड़ी मामले में नया केस दर्ज कर उनके ठिकानों पर छापेमारी की है। तो दूसरी ओर, 40,000 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक फ्रॉड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी उनसे दोबारा पूछताछ की है। नौ घंटे की पूछताछ के बाद वह ईडी मुख्यालय से रवाना हो गए हैं। खबर है कि उनसे शुक्रवार को फिर पूछताछ होगी।आइए, सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं इस पूरे मामले की इनसाइड स्टोरी।

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सवाल: अनिल अंबानी के खिलाफ ताजा मामला क्या है और सीबीआई ने अचानक नई कार्रवाई क्यों की?

जवाब: सीबीआई ने 2013 से 2017 के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा को 2,220 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचाने के आरोप में गुरुवार को अनिल अंबानी और RCOM के खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया है। दरअसल, कर्ज न चुका पाने और फंड के अनियमित उपयोग के कारण कंपनी का खाता 5 जून 2017 को ही नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित कर दिया गया था। लेकिन अनिल अंबानी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी थी, जिसके चलते खाते को 'फ्रॉड' घोषित करने पर रोक (Stay) लगी हुई थी। 23 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट ने यह रोक हटा दी। इसके बाद मंगलवार को बैंक ने शिकायत दर्ज कराई और सीबीआई ने तुरंत केस दर्ज कर गुरुवार को अंबानी के आवास व कंपनी दफ्तरों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई में लोन से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं।

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सवाल: बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपनी शिकायत में फंड की हेराफेरी के क्या आरोप लगाए हैं?

जवाब: बैंक का सीधा आरोप है कि एक सोची-समझी आपराधिक साजिश के तहत उधार लिए गए फंड का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग और गबन किया गया है। बैंक की शिकायत के अनुसार, संबंधित कंपनियों (आरकॉम, रिलायंस इन्फ्राटेल और रिलायंस टेलीकॉम) को बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कुल 31,580 करोड़ रुपये मिले थे। इसमें से 6,265.85 करोड़ रुपये का इस्तेमाल अन्य बैंकों के कर्ज चुकाने और 5,501.56 करोड़ रुपये संबंधित पक्षों को भुगतान करने में किया गया। इसके अलावा 3,674.85 करोड़ रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड में लगाए गए, जिन्हें तुरंत भुनाकर अन्य भुगतान कर दिए गए। बाद में हुई फोरेंसिक जांच ने भी फंड के डायवर्जन और गबन की पुष्टि की है। 

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सवाल: क्या सीबीआई की यह जांच पुराने एसबीआई केस से जुड़ी है?  

जवाब: नहीं, यह पूरी तरह से एक अलग ऋण का मामला है। सीबीआई पहले से ही 11 बैंकों के एक कंसोर्टियम (जिसका नेतृत्व भारतीय स्टेट बैंक कर रहा है) की शिकायत पर आरकॉम के खिलाफ जांच कर रही है। सीबीआई प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि बैंक ऑफ बड़ौदा उस कंसोर्टियम का हिस्सा नहीं था। यह नया मामला बैंक ऑफ बड़ौदा, तत्कालीन विजया बैंक और तत्कालीन देना बैंक द्वारा दिए गए एक अलग ऋण से संबंधित है।

सवाल: इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय की क्या भूमिका सामने आई है? 

जवाब: सीबीआई की छापेमारी के बीच ही, अनिल अंबानी गुरुवार को दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश हुए।  ईडी उनसे प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत दूसरे दौर की पूछताछ कर रही है। यह जांच उनकी समूह कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस द्वारा किए गए 40,000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़ी है। बता दें कि ईडी ने इससे पहले अगस्त 2025 में भी अनिल अंबानी से पूछताछ की थी।

सवाल: अब आगे क्या होगा?

जवाब: बॉम्बे हाईकोर्ट से फ्रॉड की घोषणा पर लगी रोक हटने के बाद जांच एजेंसियों ने अपना शिकंजा पूरी तरह से कस लिया है। फोरेंसिक जांच में हेराफेरी साबित होना और एक ही दिन में सीबीआई की एफआईआर व ईडी की पूछताछ, यह साफ तौर पर संकेत है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस और अनिल अंबानी की कानूनी चुनौतियां आने वाले दिनों में और गहरी होंगी। बाजार की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि इन सख्त कदमों का रिलायंस समूह के भविष्य और कर्ज वसूली प्रक्रिया पर क्या असर पड़ता है।

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