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US Tariff: अमेरिकी टैरिफ से सीफूड कारोबार पर असर, निर्यातकों को ब्रिटेन और नए बाजारों से उम्मीद

Thu, 07 Aug 2025 06:18 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Thu, 07 Aug 2025 06:18 PM IST
सार

अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला किया है। इससे भारतीय समुद्री खाद्य उद्योग पर असर पड़ने की संभावना है। इससे तटीय और ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों लोगों की आजीविका को खतरा पैदा हो गया है। निर्यातक ब्रिटेन सहित वैकल्पिक बाजारों की तलाश कर रहे हैं। 

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American tariffs affect seafood business, exporters hope from Britain and new markets
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock

विस्तार

अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव के बीच भारतीय समुद्री खाद्य निर्यातकों की नजर ब्रिटेन और अन्य बाजारों पर है। अमेरिका ने बुधवार देर भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला किया। इससे भारतीय वस्तुओं पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लग गया है। 

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ये भी पढ़ें: US tariffs: अमेरिका के 25% अतिरिक्त टैरिफ से स्वर्ण आभूषण उद्योग पर संकट, कारीगरों की आजीविका पर मंडराया खतरा
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समुद्री खाद्य के लिए बड़ा झटका
भारतीय कम्पाउंड लाइवस्टॉक फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीएलएफएमए) ने कहा कि हाल ही में लगाया गया टैरिफ इस क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका है। इससे तटीय और ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों लोगों की आजीविका को खतरा पैदा हो गया है। 
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वैकल्पिक बाजारों की तलाश जारी
सीएलएफएमए के अध्यक्ष दिव्य कुमार गुलाटी ने कहा कि भारतीय निर्यातक नौकरियों की सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इसके लिए वे वैकल्पिक बाजारों की तलाश कर रहे हैं। जैसे कि ब्रिटेन, जहां भारत-ब्रिटेन एफटीए अब मत्सय उत्पादों के लिए शुल्क  मुक्त पहुंच प्रदान करता है। 

ब्रिटने से नुकसान की भरपाई होने की उम्मीद
गुलाटी ने कहा कि हमें उम्मीद है कि ब्रिटेन को समुद्री खाद्य निर्यात तीन गुना बढ़ जाएगा। यह अमेरिका जाने वाले निर्यात में आई कमी की आंशिक भरपाई कर देगा। 


उद्योग निकाय ने सरकार से मांगी मदद
उद्योग निकाय ने सरकार से आग्रह किया है कि वह पूर्वी एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों तक पहुंच को सुगम बनाकर व्यापक बाजार विविधीकरण को बढ़ावा दे। साथ ही व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए विश्व व्यापार संगठन और जी-20 जैसे मंचों के माध्यम से व्यापार कूटनीति को तीव्र करे। 

ब्याज समकारी योजना को बहाल करने की मांग
गुलाटी ने एमएसएणई पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए, ब्याज समकारी योजना (आईईएस) को बहाल करने और इसका विस्तार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक लचीलापन बनाने के लिए, उद्योग को घरेलू प्रसंस्करण  बुनियादी ढांचे को मजबूत करना होगा। एएससी और बीएपी जैसी प्रमाणन प्रणालियों के माध्यम से टिकाऊ जलीय कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देना होगा। साथ ही मैंग्रोव संरक्षण और सख्त एंटीबायोटिक नियंत्रण जैसे उपायों को भी अपनाना होगा। 

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