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US tariffs: अमेरिका के 25% अतिरिक्त टैरिफ से स्वर्ण आभूषण उद्योग पर संकट, कारीगरों की आजीविका पर मंडराया खतरा

Thu, 07 Aug 2025 05:23 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Thu, 07 Aug 2025 05:23 PM IST
सार

अमेरिका की ओर से भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के फैसले से स्वर्ण आभूषण क्षेत्र पर दबाव पड़ने की संभावना है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने इसे लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार यह फैसला हजारों कुशल कारीगरों की आजीविका को खतरे में डालती है।

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America additional tariff poses a crisis for the jewellery industry, the livelihood of artisans is at risk
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका की ओर से स्वर्ण आभूषण क्षेत्र पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने के फैसले पर उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने अपनी चिंता व्यक्त की है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार देर रात रूसी तेल आयात को लेकर भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की, यह 27 अगस्त से लागू होने वाला है। इससे भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका ने कुल 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है। 

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आभूषण क्षेत्र के लिए बड़ा झटका
अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण घरेलू परिषद (जीजेसी) के अध्यक्ष राजेश रोकड़े ने इस फैसले को स्वर्ण आभूषण क्षेत्र के लिए बड़ा झटका कहा है। उन्होंने कारीगरों के लिए गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यह उच्च टैरिफ न केवल हमारे उत्पादों को अमेरिकी बाजार में कम प्रतिस्पर्धी बनाती है, बल्कि गंभीर रूप से हजारों कुशल कारीगरों की आजीविका को खतरे में डालती है। वे अपनी आजीविका के लिए निर्यात मांग पर निर्भर हैं। 
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सांस्कृतिक विरासत नष्ट होने का खतरा
कुल मिलाकर 50 प्रतिशत टैरिफ से व्यापक पैमाने पर रोजगार छिनने का खतरा है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाएं अस्थिर होंगी। साथ ही यह एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के नष्ट होने का खतरा है। रोकड़े ने सरकार से आग्रह किया कि वे इन कारीगरों की रक्षा करने के लिए जरूरी कदम उठाएं। 

कुशल कारीगरों की आजीविका पर सवाल
जीजेसी के उपाध्यक्ष अविनाश गुप्ता ने भारतीय रुपये पर दबाव सहित व्यापक आर्थिक प्रभाव पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला हमारे उत्पादों को अमेरिकी बाजार में कम प्रतिस्पर्धी बनाता है। हजारों कुशल कारीगरों, जिनमें से कई हाशिए के समुदायों से हैं, की आजीविका को खतरे में डालता है। वे छोटी-छोटी कार्यशालाओं और पारिवारिक उद्यमों के माध्यम से भारत की सदियों पुरानी आभूषण शिल्पकला को बनाए रखते हैं।

रुपए पर पड़ रहा दबाव
यह टैरिफ झटका भारतीय रुपए पर भी दबाव डाल रहा है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सोना महंगा हो सकता है और भारत में मांग कम हो सकती है - जिससे उद्योग पर और अधिक दबाव पड़ेगा।


वित्त वर्ष 2024 में निर्यात 22 अरब डॉलर रहा
वित्त वर्ष 2023-24 में भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात 22 अरब डॉलर रहा। इसके 2027 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। भारत हीरे का शीर्ष वैश्विक निर्यातक और सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। रत्न और आभूषण निर्यात अप्रैल 2024 में 2.26 अरब डॉलर से 10.74 प्रतिशत बढ़कर अप्रैल 2025 में 2.5 अरब डॉलर हो गया। अमेरिका को रत्न और आभूषण निर्यात 11 अरब डॉलर होने का अनुमान है।

केंद्र सरकार ने कहा है कि वह गुणवत्ता, मानकीकरण और उपभोक्ता संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करते हुए भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। 

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