American Express: आज से भारत में दोबारा परिचालन शुरू कर सकती है अमेरिकन एक्सप्रेस, RBI ने लगाई थी पाबंदी
अमेरिकन एक्सप्रेस ने भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों के अनुरूप अपनी नीतियों में संशोधन किया है। कंपनी भारत में आज से अपना कारोबार आंशिक रूप से दोबारा शुरू कर सकती है।
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क्रेडिट कार्ड कंपनी अमेरिकन एक्सप्रेस बैंकिंग कॉरपोरेशन (AmEx) आज से भारत में अपना कारोबार आंशिक रूप से फिर से शुरू कर सकती है। तीन महीने पहले भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अमेरिकन एक्सप्रेस को उसके 'स्टोरेज ऑफ पेमेंट सिस्टम डाटा' के नियमों का पालन नहीं करने के लिए कड़ी फटकार लगाई थी। साथ ही आरबीआई ने कंपनी को एक मई से नए घरेलू ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड जारी करने से प्रतिबंधित कर दिया था। हालांकि अब अमेरिकन एक्सप्रेस ने आरबीआई के निर्देशों के अनुरूप अपनी नीतियों में संशोधन किया है और सात अगस्त से परिचालन को आंशिक रूप से फिर से शुरू करने के लिए तैयार है।
रिपोर्ट्स के अनुसार इसकी जानकारी कंपनी ने अपने बैंकिंग भागीदारों को भेजी। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकन एक्सप्रेस ने कहा है कि वह आरबीआई के निर्देशों का सख्ती से पालन करेगी और ऐसा कोई भी कारोबार नहीं करेगी जिसे केंद्रीय बैंक द्वारा करने की अनुमति नहीं है।
दिशानिर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए की कार्रवाई- RBI गवर्नर
मालूम हो कि शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि नियामक के दिशानिर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एचडीएफसी बैंक, मास्टरकार्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस के खिलाफ कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि देश में जब भी आरबीआई के दिशानिर्देशों का उल्लंघन होगा, तो अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी हमारी होगी। आरबीआई का यह कदम अनुपालन सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
नियमों का किया उल्लंघन
अमेरिकन एक्सप्रेस बैंकिंग कॉरपोरेशन और डायनर्स क्लब इंटरनेशनल लिमिटेड पेमेंट सिस्टम परिचालक हैं। दोनों देश में भुगतान और निपटान प्रणाली कानून, 2007 (पीएसएस कानून) के तहत कार्ड नेटवर्क के परिचालन के लिए अधिकृत हैं। आरबीआई ने अमेरिकन एक्सप्रेस बैंकिंग कॉरपोरेशन और डायनर्स क्लब इंटरनेशनल पर यह पाबंदी 23 अप्रैल, 2021 को जारी आदेश के तहत लगाई। केंद्रीय बैंक ने कहा, 'ये इकाइयां भुगतान प्रणाली से जुड़े आंकड़ों और सूचना भंडारण को लेकर निर्देशों का अनुपालन नहीं कर रही थीं।'
उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2018 में भुगतान व्यवस्था से जुड़े सभी सेवा प्रदाताओं को यह सुनिश्चित करने को कहा गया था कि उनके द्वारा परिचालित भुगतान प्रणाली से संबद्ध आंकड़े और जानकारी छह महीने के भीतर भारत में निर्धारित व्यवस्था में ही रखनी है। उन्हें अनुपालन के बारे में आरबीआई को भी सूचित करना था। साथ ही इंडियन कंप्यूटर एमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन) के पैनल में शामिल ऑडिटरों द्वारा किए गए 'सिस्टम ऑडिट रिपोर्ट'को निदेशक मंडल की मंजूरी के साथ जमा करनी थी।