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Amar Ujala Samwad: देवभूमि से वैश्विक बाजार तक, कैसे बदल रही उत्तराखंड के उद्योगों की तस्वीर? जानें बेबाक राय

Wed, 24 Jun 2026 05:34 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 24 Jun 2026 05:34 PM IST
सार

देहरादून में आयोजित अमर उजाला संवाद में उत्तराखंड के औद्योगिक विकास और निवेश की संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने अपनी बात रही। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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Amar Ujala Samvad: Industry Experts to Decode Investment Opportunities and Business Potential in Uttarakhand
अमर उजाला संवाद - फोटो : amarujala.com

विस्तार

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 'अमर उजाला संवाद' का आयोजन हुआ। देवभूमि के विकास और भविष्य के रोडमैप पर मंथन के लिए हरिद्वार बाईपास रोड स्थित होटल गेटवे में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ। राज्य के विकास मॉडल से जुड़े इस अहम मंच पर व्यापार, अर्थव्यवस्था और निवेश के मोर्चे पर गहन चर्चा हुई।

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सतत विकास की नई राह सत्र के दौरान उत्तराखंड के उद्योग सचिव विनय शंकर पांडेय ने कहा कि 2003 में जब केंद्र ने एक औद्योगिक पैकेज इस राज्य को मिला तो यह इस राज्य के लिए एक औद्योगिक क्रांति थी। उसके बाद बड़े-बड़े ग्रुप्स यहां पर आए। उसके बाद जो भी सरकारें आईं उन्होंने अपनी नीतियों से उद्योगों को विस्तार दिया। इसके बाद 2023 में एक तरह से दूसरी औद्योगिक क्रांति हुई।

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पहाड़ के लोकल उत्पाद ग्लोबल मार्केट तक पहुंचें, इस दिशा में हो काम: उद्योग सचिव

उत्तराखंड के उद्योग सचिव विनय शंकर पांडेय ने बताया कि साल 2003 में केंद्र सरकार से मिले औद्योगिक पैकेज ने राज्य में पहली 'औद्योगिक क्रांति' की शुरुआत की थी, जिसके बाद कई बड़े कॉरपोरेट ग्रुप यहां आए। उन्होंने बताया कि लगातार बेहतर होती नीतियों के कारण 2023 में राज्य ने दूसरी औद्योगिक क्रांति का दौर देखा है। राज्य में घोषणाओं को धरातल पर उतारने का रिकॉर्ड सबसे अच्छा रहा है। सरकार का मुख्य फोकस अब पहाड़ों की स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से विकास करने पर है, जिसके तहत 112 ग्रुप सेंटर्स चलाए जा रहे हैं ताकि पहाड़ के उत्पादों को ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाया जा सके।

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सिंगल विंडो सिस्टम से उद्योगों को कितनी मिल रही मदद: राहुल सिंघल

सीआईआई उत्तराखंड के सदस्य राहुल सिंघल ने बताया कि राज्य में उद्योगों का माहौल काफी सकारात्मक है और जो भी इंडस्ट्री यहां आई, वह यहीं टिक गई। उन्होंने 'सिंगल विंडो सिस्टम' को इसका बड़ा श्रेय दिया, जिससे कंपनियों को काम करने में काफी आसानी हो रही है। उद्योगों के पलायन की चिंताओं को खारिज करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर एक-दो इंडस्ट्री यहां से वापस गई भी हैं, तो उसका कारण जमीन के इस्तेमाल से जुड़ा कोई तकनीकी मुद्दा रहा होगा, लेकिन राज्य से उद्योगों का कोई बड़ा पलायन नहीं हुआ है।

अच्छी कनेक्टिविटी के बावजूद चुनौतियों से निपटना है बाकी: हेमंत कोचर

पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्री के हेमंत कोचर ने कहा कि दिल्ली-देहरादून हाईवे और नए लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर ने उत्तराखंड के उद्योगों की राह काफी आसान कर दी है। हालांकि, उन्होंने कुछ जमीनी चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया। उनके मुताबिक, इंडस्ट्री को और ज्यादा फायदा पहुंचाने के लिए जाम की समस्या और पहाड़ों पर बढ़ते कंजेशन (भीड़-भाड़) को रोकना बहुत जरूरी है। इसके अलावा, युवाओं के स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) की दिशा में अभी काफी काम किया जाना बाकी है, ताकि उद्योगों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर टैलेंट मिल सके।

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