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पर्सनल लोन का नया चेहरा: घूमना-फिरना मध्य वर्ग की बड़ी प्राथमिकता, विदेश यात्रा पर खर्च रक्षा बजट के बराबर

Tue, 12 Aug 2025 07:01 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Tue, 12 Aug 2025 07:01 AM IST
सार

आरबीआई और प्रमुख वित्तीय कंपनियों के आंकड़े बताते हैं कि 2015-16 में पर्सनल लोन का बड़ा हिस्सा करीब 25 फीसदी शादी और 30 फीसदी घर की मरम्मत के लिए लिया जाता था। उस समय घूमने-फिरने पर खर्च के लिए गए कर्ज का हिस्सा पर्सनल लोन का 3 फीसदी से भी कम था।

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According to survey 27 percent of Indians took personal loans only for travelling in 2024-25
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक दशक पहले तक पर्सनल लोन लेने का मतलब शादी, घर की मरम्मत या बच्चों की पढ़ाई जैसी जरूरतों को पूरा करना माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। नए सर्वे के मुताबिक, 2024-25 में 27 फीसदी भारतीयों ने सिर्फ घूमने-फिरने के लिए पर्सनल लोन लिया। एक दशक पहले की तुलना में यह करीब 10 गुना वृद्धि है।

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घर की मरम्मत के लिए 24 फीसदी, क्रेडिट कार्ड बकाया चुकाने के लिए 11 फीसदी, इलाज के लिए 9.6 फीसदी, शिक्षा के लिए 6.01 फीसदी और शादी के लिए महज 5.4 फीसदी लोगों ने पर्सनल लोन लिया। आरबीआई और प्रमुख वित्तीय कंपनियों के आंकड़े बताते हैं कि 2015-16 में पर्सनल लोन का बड़ा हिस्सा करीब 25 फीसदी शादी और 30 फीसदी घर की मरम्मत के लिए लिया जाता था। उस समय घूमने-फिरने पर खर्च के लिए गए कर्ज का हिस्सा पर्सनल लोन का 3 फीसदी से भी कम था। 2017 से 2019 के दौरान ऑनलाइन ट्रैवल बुकिंग, लो-कॉस्ट एयरलाइंस और अभी घूमो-बाद में चुकाओ जैसी स्कीमों ने ट्रैवल लोन का हिस्सा 8 से 10 फीसदी तक पहुंचा दिया।
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रिवेंज ट्रैवल ट्रेंड ने फिर से तस्वीर बदली
कोविड-19 के दौरान 2020-21में अंतरराष्ट्रीय यात्रा लगभग ठप हो गई और ट्रैवल लोन का हिस्सा घटकर 2 फीसदी के आसपास रह गया। इस दौरान इलाज और क्रेडिट कार्ड बकाया चुकाने के लिए लोन की मांग बढ़ी। 2022 के बाद रिवेंज ट्रैवल ट्रेंड ने फिर से तस्वीर बदल दी और 2024-25 में घूमने-फिरने के लिए पर्सनल लोन लेने वालों का हिस्सा रिकॉर्ड 27 फीसदी पहुंच गया।

विदेश यात्राओं में 72 फीसदी उछाल
पर्यटन मंत्रालय एवं डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) के आंकड़ों के मुताबिक, 2014 में करीब 1.8 करोड़ भारतीयों ने विदेश यात्रा की थी। 2019 तक यह संख्या बढ़कर 2.75 करोड़ हो गई, यानी पांच साल में 52 फीसदी वृद्धि। कोविड-19 के कारण 2020-21 में यह संख्या 80 फीसदी तक गिर गई, लेकिन 2023 में यह महामारी-पूर्व स्तर के 90 फीसदी तक पहुंची। 2024 में रिकॉर्ड 3.01 करोड़ भारतीयों ने विदेश यात्रा की, जो 2014 की तुलना में 72 फीसदी अधिक है।

थाईलैंड, सिंगापुर व दुबई सर्वाधिक पसंदीदा
2013-23 के बीच भारतीयों ने सबसे ज्यादा थाईलैंड, दुबई, सिंगापुर, मलयेशिया, इंडोनेशिया और मालदीव की यात्रा की। इसके बाद स्विट्जरलैंड, फ्रांस और इटली को चुना। इन गंतव्यों की लोकप्रियता के पीछे मुख्य कारण हैं, अपेक्षाकृत कम उड़ान समय, वीजा में आसानी, पर्यटन के लिए बेहतर इन्फ्रा और सोशल मीडिया पर इन स्थानों की बढ़ती दृश्यता।


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2024 में 5.72 लाख करोड़ तक खर्च
पर्यटन एवं एविएशन इंडस्ट्री के आकलन के अनुसार, 2014 में एक भारतीय पर्यटक विदेश यात्रा पर औसतन 85,000 से 95,000 खर्च करता था। यह राशि 2019 में 1.25 लाख और 2024 में 1.75 से 1.9 लाख पहुंच गई। इस हिसाब से 2024 में भारतीयों ने विदेश यात्राओं पर 5.26-5.72 लाख करोड़ तक खर्च किया। 2024-25 का भारत का रक्षा बजट 6.21 लाख करोड़ है यानी विदेश यात्रा पर खर्च रक्षा बजट का 85-92 फीसदी है, जबकि पाकिस्तान के रक्षा बजट से ज्यादा है।

ईएमआई आधारित पैकेज से आई तेजी
भारतीय उद्योग परिसंघ से जुड़े पर्यटन विश्लेषक डॉ. आरके मेहरा का कहना है, विदेश यात्रा पर यह खर्च दर्शाता है कि भारतीय मध्य वर्ग का उपभोक्ता व्यवहार अब अनुभव-आधारित खपत की ओर झुक गया है। पर्सनल लोन की डिजिटल उपलब्धता और ईएमआई आधारित ट्रैवल पैकेज ने इस रुझान को तेज किया है। यह रुझान पर्यटन उद्योग के लिए अवसर ही नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ते लाइफस्टाइल खर्च का भी संकेत है।

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