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टाटा की चेयरमैन कुर्सी पर घमासान: नोएल की आपत्ति खारिज; चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को टाटा संस ने बताया वैध

Fri, 25 Sep 2026 04:33 AM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Fri, 25 Sep 2026 04:33 AM IST
सार

टाटा समूह में चेयरमैन पद को लेकर जारी मतभेद के बीच टाटा संस ने एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का बचाव किया है। कंपनी का कहना है कि बोर्ड ने बहुमत से फैसला लिया और आर्टिकल 118 की प्रक्रिया मौजूदा चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति पर लागू नहीं होती। 

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Tata Sons terms Chandrasekaran's reappointment as Chairman valid Noel objection rejected
चंद्रशेखरन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

टाटा समूह में शीर्ष नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान के बीच टाटा संस ने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा की आपत्तियों को खारिज कर दिया है। नोएल टाटा ने एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर सवाल उठाए थे। इसके जवाब में टाटा संस ने साफ कहा है कि चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति बोर्ड के बहुमत से हुई है और इसके लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है।

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विवाद की जड़ में है आर्टिकल 118
पूरा मामला टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के आर्टिकल 118 से जुड़ा है। इस नियम के मुताबिक, अगर टाटा ट्रस्ट्स के पास कंपनी की कम से कम 40 फीसदी चुकता सामान्य शेयर पूंजी है, तो चेयरमैन के चयन के लिए एक विशेष चयन समिति बनाई जाती है। इस समिति में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के नामित सदस्य शामिल होते हैं। यही प्रक्रिया चेयरमैन को पद से हटाने के मामले में भी लागू होती है।
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'यह नियम पुनर्नियुक्ति पर लागू नहीं'
नोएल टाटा की आपत्ति के जवाब में टाटा संस ने 24 सितंबर को भेजे पत्र में कहा कि आर्टिकल 118 की प्रक्रिया किसी नए चेयरमैन की पहली नियुक्ति के लिए है। कंपनी के मुताबिक, यह नियम मौजूदा चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति के मामले में लागू नहीं होता। टाटा संस ने अपने रुख के समर्थन में देश के जाने-माने कानूनी विशेषज्ञों की राय का भी हवाला दिया है। कंपनी ने कहा कि बोर्ड ने बहुमत से प्रस्ताव पारित कर चंद्रशेखरन को उनके मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद फिर से चेयरमैन बनाने का फैसला किया है।
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तीन बड़े कानूनी विशेषज्ञों की राय से मजबूत किया पक्ष
नोएल टाटा की आपत्ति के बाद टाटा संस ने इस मामले पर वरिष्ठ वकील सुदिप्त सरकार, पूर्व मुख्य न्यायाधीश उदय ललित और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बीएन श्रीकृष्णा से कानूनी राय ली। टाटा संस के मुताबिक, तीनों कानूनी विशेषज्ञों की राय एक जैसी है और उन्होंने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को वैध माना है। इस कानूनी राय के आधार पर कंपनी ने अपने फैसले को सही ठहराया है।

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