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लॉकडाउन का असर: खुदरा खरीदारी में आई 60 फीसदी की कमी
Tue, 28 Apr 2020 05:44 AM IST
संदीप भट्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: संदीप भट्ट
Updated Tue, 28 Apr 2020 05:44 AM IST
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लॉकडाउन का असर खुदरा खरीदारी पर भी पड़ा है। एसबीआई कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज ने अपनी रिपोर्ट में कहा, लॉकडाउन 2.0 के दौरान मार्च के शुरुआती 15 दिनों के मुकाबले खुदरा खरीदारी में 60% गिरावट आई है। पिछले महीने के आखिरी 15 दिनों में औसत दैनिक खुदरा खर्च 31% तक घटा है।
कंपनी ने कहा, क्रेडिट कार्ड रखने वाले ग्राहकों ने इस दौरान खर्च से ज्यादा भुगतान किए। इससे खुदरा खरीदारी घटी है। इसके अलावा, लॉकडाउन 2.0 में कॉरपोरेट कार्ड से खरीदारी में भी 60% कमी आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 महामारी के कारण क्रेडिट कार्ड उद्योग के विकास और संपत्तियों की गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा।
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कंपनी ने कहा, क्रेडिट कार्ड रखने वाले ग्राहकों ने इस दौरान खर्च से ज्यादा भुगतान किए। इससे खुदरा खरीदारी घटी है। इसके अलावा, लॉकडाउन 2.0 में कॉरपोरेट कार्ड से खरीदारी में भी 60% कमी आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 महामारी के कारण क्रेडिट कार्ड उद्योग के विकास और संपत्तियों की गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा।
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भुगतान पर जोखिम
इससे पहले बैंक ऑफ अमेरिका ने कहा था कि एसबीआई कार्ड ग्राहकों ने 2019-20 के शुरुआती 10 महीनों में हर महीने औसतन 10,825 रुपये खर्च किए, जो उद्योग के मासिक औसत खर्च 11,031 रुपये से कम है। इस अवधि में क्रेडिट कार्ड खर्चों में एसबीआई कार्ड का हिस्सा 18% और एचडीएफसी 29% था। इसके अलावा, एसबीआई कार्ड के 85% वेतनभोगी ग्राहकों के भुगतान पर जोखिम कम हुआ है। हालांकि, कारोबार ठप होने से बेरोजगार ग्राहकों के भुगतान पर जोखिम है।
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ईपीएफ : 6.5 लाख से अधिक ने निकाले 2,700 करोड़...
लॉकडाउन में वित्तीय जरूरतें पूरी करने के लिए 6.5 लाख से अधिक कर्मचारी अपने भविष्य निधि (ईपीएफ) से 2,700 करोड़ निकाल चुके हैं। अप्रैल में हर कार्य दिवस औसतन 30-35 हजार लोगों ने ईपीएफ से निकासी की। अगले 10 दिनों में यह संख्या 10 लाख तक पहुंचेगी। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के एक अधिकारी ने बताया कि इसमें रिटायरमेंट फंड और कंपनी पीएफ ट्रस्ट की ओर से प्रबंधित धन निकासी भी शामिल है। हमें उम्मीद नहीं थी कि नए नियमों के तहत इतने लोग पैसे निकालेंगे।
10 लाख से अधिक आईटी कर्मी करेंगे घर से काम
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के पूर्व अध्यक्ष सेनापति (क्रिस) गोपालकृष्णन ने कहा, आईटी क्षेत्र के कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम (घर से काम करना) के लिए तैयार हैं। लॉकडाउन खत्म होने के बाद स्थिति सामान्य होने पर भी 10 लाख से अधिक आईटी कर्मी घर से ही काम कर सकते हैं। आने वाले समय में यह कारोबार का लगातार चलने वाला हिस्सा बन जाएगा। इससे कंपनियों के किराया काफी बचेगा। उन्होंने कहा, आईटी क्षेत्र में छंटनी का डर नहीं है, लेकिन भर्तियां रुक सकती हैं। वेतन में कटौती भी हो सकती है।पेशेवर महिलाओं की वापसी के अनुकूल हालात...
वर्क फ्रॉम होम का चलन बढ़ना महिलाओं के पेशेवर दुनिया में लौटने के लिए मददगार साबित हो सकता है। कोरोना के मद्देनजर कर्मचारियों के एक बड़े तबके के लिए वर्क फ्रॉम होम सिस्टम का हिस्सा बनता जा रहा है। जॉब सर्च पोर्टल ‘जॉब्सफॉरहर’ के मुताबिक, घर से काम वाली नौकरियां एक महीने में 30% तक बढ़ी है। नौकरी की तलाश वाली महिलाओं के आवेदन में मार्च में 50% की तेजी आई है। कंपनियां पेशेवर दुनिया में लौटने की सोच रही महिलाओं की भर्तियों पर विचार कर रही हैं।