निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ में 31 करोड़ रुपये की बिकवाली से कमाया मुनाफा
- अक्तूबर में निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ में भुनाई सोने की महंगाई
- 2011 और 2012 की बड़ी तेजी के बाद इस साल सोने की चमक खासी बढ़ी और पीली धातु का यह सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा
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सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ निवेशकों ने अक्तूबर में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) में मुनाफावसूली को तवज्जो दी। इस महीने में निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ में लगभग 31 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि इससे पिछले दो महीनों में लगभग 200 करोड़ रुपये का निवेश किया था। इसकी वजह मुख्य रूप से मुनाफावसूली रही।
सितंबर में गोल्ड ईटीएफ कुल 44.11 करोड़ रुपये और अगस्त 145.29 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था, जो बीते साल नवंबर के बाद पहला निवेश था जब गोल्ड इसमें 10 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था। इससे पहले अक्तूबर, 2016 में कुल 20 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था और मई, 2013 में कुल 5 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था।
विशेषज्ञों ने इसका श्रेय मुख्य रूप से अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव व जीडीपी विकास दर में सुस्ती के अनुमान के चलते सोने की कीमतों में अचानक आई तेजी को दिया था। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड इन इंडिया (एम्फी) के हाल के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महीने निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ से लगभग 31.45 करोड़ रुपये निकाले। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया के वरिष्ठ विश्लेषक प्रबंधक (शोध) हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि हाल में हुई बिकवाली की मुख्य वजह मुनाफावसूली रही।
इस साल अच्छा रहा सोने का प्रदर्शन
श्रीवास्तव ने कहा, ‘बीच-बीच में आए उतार-चढ़ाव को छोड़ दें तो 2011 और 2012 की बड़ी तेजी के बाद से सोने की कीमतें काफी हद तक स्थिर ही रही हैं। इस साल सोने की चमक खासी बढ़ी और हाल के दौर में पीली धातु का यह सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा।’
उन्होंने कहा, ‘जहां इसने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा और अगस्त व सितंबर में अच्छा निवेश देखने को मिला, वहीं इसने निवेशकों को मुनाफावसूली करने का मौका भी दिया। यह सोने के भविष्य को लेकर अनिश्चितता को लेकर भी खासा अहम हो जाता है।’ गोल्ड फंड्स की प्रबंधन अधीन संपत्ति अक्तूबर के अंत तक 5,652 करोड़ रुपये थी, जबकि सितंबर में यह 5,613 करोड़ रुपये के स्तर पर बनी हुई थी।
सितंबर में 2 हजार रुपये टूटा था सोना
क्वांटम म्यूचुअल फंड्स के वरिष्ठ कोष प्रबंधक (वैकल्पिक निवेश) चिराग मेहता ने कहा कि भारत में सितंबर के 40 हजार रुपये प्रति दस ग्राम के ऊपरी स्तर से सोना लगभग 2,000 रुपये टूट चुका है, लेकिन महीने के अंत में 2.30 फीसदी की मजबूती दर्ज की गई।
उन्होंने कहा, ‘दीर्घावधि में देखें तो किसी के पोर्टफोलियो में सोने के होने से जोखिम कम होगा और धीरे-धीरे रिटर्न में इजाफा होगा। किसी भी तरह की कीमतों में किसी भी तरह की गिरावट को गोल्ड ईटीएफ रूट के माध्यम से भुनाने वाले निवेशकों को फायदा होगा।’
बीते कुछ साल के दौरान खुदरा निवेशक अच्छे रिटर्न को देखते हुए गोल्ड ईटीएफ की तुलना में शेयर बाजार में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं। बीते छह साल में गोल्ड ईटीएफ में कुल जितना निवेश हुआ, उसके बराबर महज पांच महीने में ही हो गया। निवेशकों ने 2018 में ईटीएफ से कुल 571 करोड़ रुपये निकाले, जो लगातार छठा साल रहा जिसमें इन उत्पादों में सकल बिकवाली की गई। इसकी तुलना में 2017 में 739 करोड़ रुपये निकाले गए थे।