6.5 लाख कंपनियों को अंशदान में देरी की ईपीएफओ ने दी है छूट, प्रभावित होंगे कर्मचारी
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कोरोना महामारी और लॉकडाउन से उद्योगों पर हुए गंभीर असर को देखते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने नियोक्ताओं को ईपीएफ अंशदान देरी से करने की छूट दे दी है। इस फैसले का कर्मचारियों की बचत पर दोहरा असर हो सकता है।
दरअसल, ईपीएफओ ने हाल में जारी नोटिफिकेशन मेें कहा है कि लॉकडाउन की पूरी अवधि के दौरान नियोक्ता अगर कर्मचारी के ईपीएफ अंशदान में देरी करता है, तो उस पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। नियमानुसार, नियोक्ता को किसी भी कर्मचारी के वेतन पर तय ईपीएफ अगले महीने की 15 तारीख तक करना होता है जिसमें 10 दिन की अतिरिक्त मोहलत होती है। यानी 25 तारीख तक हर हाल में यह भुगतान कर दिया जाना चाहिए। इसके बाद जुर्माना देना पड़ेगा। देश में ईपीएफ से जुड़ी 6.5 लाख कंपनियां हैं, जिनमें अधिकतर ने इस सुविधा का लाभ उठाया है।
ऐसे प्रभावित होंगे कर्मचारी
- कम निकासी
अगर आप कोविड महामारी से जुड़ी निकासी सुविधा का लाभ लेना चाहते हैं, तो खाते से कम राशि का भुगतान हो सकता है। चूंकि, आपके नियोक्ता ने लॉकडाउन से अभी तक अंशदान नहीं किया है जिससे आपकी निकासी राशि की मात्रा कम हो सकती है। ईपीएफओ ने कोरोना संकट के दौरान कर्मचारी के बेसिक वेतन और डीए की तीन गुना राशि या कुल जमा का 75 फीसदी (दोनों में जो कम है) भुगतान का प्रावधान रखा है।
- कम ब्याज
ईपीएफ अंशदान में देरी से आपकी ब्याज आय पर असर होगा। कर्मचारी के पीएफ पर ब्याज की गणना हर महीने की शुरुआत में होती है और इसका भुगतान वित्तवर्ष बीतने के बाद हर साल अप्रैल में होता है। ऐसे में अगर हर महीने अंशदान नहीं होता है, उस महीने की राशि पर ब्याज नहीं मिलेगा।