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Explainer: एआई का खौफ या बाजार की सुस्ती? आसान भाषा में समझें आईटी सेक्टर में मचे हाहाकार की पूरी कहानी

Fri, 19 Jun 2026 12:49 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 19 Jun 2026 12:49 PM IST
सार

दिग्गज आईटी कंपनी एक्सेंचर के शेयरों में 20% की भारी गिरावट ने आईटी सेक्टर को हिला कर रख दिया है। कंपनी के नए सौदों में कमी और एआई के खतरे से शेयर बाजार के निवेशकों में गहरा डर है। जानिए सीईओ जूली स्वीट ने इस संकट पर क्या कहा और कंपनी के किन आंकड़ों ने पूरे बाजार में बिकवाली का महौल बना दिया।

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AI Threat or Slowdown? Accenture Shares Crash 20%, Triggering Panic in IT Sector - Explained
एक्सेंचर में संकट - फोटो : amarujala.com (एआई समर्थित)

विस्तार

ग्लोबल आईटी सेक्टर और शेयर बाजार में इस समय गहरी हलचल मची हुई है। दुनिया की सबसे बड़ी और दिग्गज आईटी व कंसल्टिंग कंपनियों में शुमार एक्सेंचर के शेयरों में हाल ही में 20% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह ऐतिहासिक गिरावट केवल एक कंपनी के खराब प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरे वैश्विक आईटी सेक्टर के निवेशकों की नींद उड़ा दी है। निवेशकों के मन में सबसे बड़ा डर इस बात का है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) वास्तव में आईटी और कंसल्टिंग कंपनियों के व्यापार मॉडल को खत्म कर रहा है? एक तरफ नए सौदों के आंकड़ों ने शेयर बाजार में निराशा पैदा की है, वहीं दूसरी ओर कंपनी की सीईओ का मानना है कि बाजार इस पूरी तस्वीर को गलत नजरिए से देख रहा है।

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आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर एक्सेंचर के किन आंकड़ों ने आईटी शेयरों में इतनी बड़ी गिरावट का माहौल बनाया है और इसका भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

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एक्सेंचर के शेयरों में अचानक इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?

शेयर बाजार में एक्सेंचर का स्टॉक साल 2017 के बाद से अपने सबसे निचले और खराब स्तर पर पहुंच गया है। अगर हम पिछले एक साल का ट्रेंड देखें, तो कंपनी के शेयरों में लगभग 50% की लगातार और बड़ी गिरावट देखी गई है। हाल ही में वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही के नतीजे आने के बाद यह स्टॉक 18 से 20 प्रतिशत तक और टूट गया। इस भयंकर गिरावट का सीधा असर कंपनी के बाजार पूंजीकरण पर बहुत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। कोविड-19 महामारी के बाद जब दुनिया भर में आईटी और कंसल्टिंग का भारी बूम आया था, तब एक्सेंचर का बाजार पूंजीकरण 200 अरब डॉलर के पार चला गया था। लेकिन अब, लगातार बिकवाली और निवेशकों के घटते भरोसे के कारण यह गिरकर 80 अरब डॉलर से भी कम रह गया है। इस महा-गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह निवेशकों का वह डर है, जिसमें वे मान रहे हैं कि एआई का तेजी से बढ़ता प्रभाव उनकी कमाई और मुनाफे को पूरी तरह से निगल सकता है।

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AI Threat or Slowdown? Accenture Shares Crash 20%, Triggering Panic in IT Sector - Explained
एक्सेंचर संकट - फोटो : amarujala.com

कंपनी के कौन से वित्तीय आंकड़े शेयर बाजार के निवेशकों को डरा रहे हैं?

किसी भी दिग्गज कंपनी की सेहत का असली अंदाजा उसके वित्तीय आंकड़ों से ही लगाया जाता है। एक्सेंचर के वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही (मई महीने के अंत तक) के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे निवेशकों की भारी-भरकम उम्मीदों पर पूरी तरह से खरे नहीं उतरे हैं। अगर राजस्व की बात करें तो कंपनी ने 18.7 अरब डॉलर का राजस्व दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले एक अरब डॉलर ज्यादा है। प्रति शेयर आय (ईपीएस) भी नौ प्रतिशत की छलांग के साथ 3.80 डॉलर हो गई और ऑपरेटिंग मार्जिन 17% तक फैल गया।

अगर राजस्व बढ़ रहा है, तो फिर परेशानी कहां है?

असली परेशानी कंपनी के 'नए सौदों' यानी 'न्यू बुकिंग्स' के आंकड़ों में छिपी है। इस तिमाही में कंपनी की नई बुकिंग दो से तीन प्रतिशत घटकर 19.3 अरब डॉलर के स्तर पर आ गई है। शेयर बाजार हमेशा भविष्य की कमाई पर दांव लगाता है, और नए सौदों में यह गिरावट सीधे तौर पर भविष्य की कमाई कम होने का संकेत देती है। इसके अलावा, कंपनी ने पूरे साल के रेवेन्यू ग्रोथ (राजस्व वृद्धि) के अपने ही पुराने अनुमान को तीन-पांच प्रतिशत से घटाकर अधिकतम चार प्रतिशत कर दिया है। भविष्य के लिए जारी किए गए इन कमजोर अनुमानों और नए सौदों में स्पष्ट कमी ने शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा बुरी तरह से तोड़ दिया है।

क्या वाकई एआई आईटी और कंसल्टिंग कंपनियों के लिए बड़ा खतरा बन रहा है?

आजकल तकनीक की दुनिया में हर तरफ सिर्फ एआई की ही चर्चा है। आईटी सेक्टर के कई बड़े निवेशकों को यह लगने लगा है कि एआई आईटी कंपनियों के लिए एक मददगार टूल होने के बजाय एक बड़ा खतरा है। पिछले कुछ वर्षों से विश्व स्तर पर कंपनियां अपने 'डिस्क्रिशनरी कंसल्टिंग प्रोजेक्ट्स' (गैर-जरूरी कंसल्टिंग खर्चों) पर बहुत कम पैसा खर्च कर रही हैं।

जेफरीज के प्रमुख विश्लेषक सुरिंदर थिंड ने एक्सेंचर के इन हालिया नतीजों को बेहद 'निराशाजनक' करार दिया है। अपने क्लाइंट्स को लिखे एक नोट में उन्होंने स्पष्ट कहा है कि, एक 'एआई-फर्स्ट दुनिया' में अब कंसल्टिंग की मांग की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े होने लाजमी हैं। उनके अनुसार, हाल ही में एआई मॉडल और 'एजेंटिक कैपेबिलिटीज' में जो बड़ी और तीव्र प्रगति हुई है, उसे देखते हुए यह चिंता और भी बढ़ जाती है। आसान और आम भाषा में समझें तो, निवेशकों को यह डर सता रहा है कि जो जटिल विश्लेषण और रणनीतिक काम पहले महंगे आईटी कंसल्टेंट हफ्तों में करते थे, वह काम अब आधुनिक एआई सिस्टम कुछ ही मिनटों में कर सकते हैं, जिससे इन आईटी कंपनियों की जरूरत और मुनाफा दोनों घट जाएंगे।

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आईटी सेक्टर पर एआई का साया - फोटो : amarujala.com

पश्चिम एशिया युद्ध का एक्सेंचर की कमाई और ग्लोबल ऑपरेशंस पर क्या असर पड़ा?

तकनीकी बदलाव के अलावा, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भी कंपनी के लिए एक बड़ा सिरदर्द साबित हो रहे हैं। एक्सेंचर की सीईओ जूली स्वीट ने कंपनी के इस निराशाजनक प्रदर्शन के लिए पश्चिम एशिया में चल रहे भयंकर युद्ध को भी आंशिक रूप से जिम्मेदार ठहराया है।

जूली स्वीट के मुताबिक, इस युद्ध के कारण कंपनी के राजस्व में उम्मीद से कहीं ज्यादा, करीब 100 मिलियन डॉलर का भारी नुकसान हुआ है। युद्ध का प्रभाव सिर्फ पश्चिम एशिया क्षेत्र के व्यवसायों तक सीमित नहीं रहा; बल्कि इसके कारण दुनिया भर में बैठे अन्य क्लाइंट्स (ग्राहकों) की निर्णय लेने की प्रक्रिया भी बहुत धीमी हो गई है। अनिश्चितता के दौर में बड़ी कंपनियां अक्सर अपने नए प्रोजेक्ट्स और बड़े खर्चों को टाल देती हैं, जिसका सीधा खामियाजा एक्सेंचर जैसी सर्विस देने वाली कंपनियों को उठाना पड़ा है।

इस भारी गिरावट और संकट के बीच कंपनी की सीईओ जूली स्वीट का क्या कहना है? 

शेयरों में 20% की इस भारी-भरकम गिरावट और बाजार में मचे हाहाकार के बावजूद कंपनी की सीईओ जूली स्वीट का रवैया काफी आशावादी है। उन्होंने बाजार के निवेशकों से स्पष्ट अपील की है कि वे अपना फैसला सुनाने में जल्दबाजी बिल्कुल न करें और कंपनी की स्थिति को सही नजरिए से देखें।

मीडिया को दिए एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि निवेशक एआई के सकारात्मक पहलुओं को पूरी तरह से नजरअंदाज कर रहे हैं। वे यह नहीं देख पा रहे हैं कि हम लंबी अवधि की ग्रोथ के लिए खुद को कितनी मजबूती से तैयार कर रहे हैं"। जूली स्वीट के अनुसार, क्लाइंट अब बड़े पैमाने पर अपनी कंपनियों का रीइन्वेंशन (एआई आधारित बदलाव के लिए एक्सेंचर का आंतरिक शब्द) कर रहे हैं, और इसी वजह से एक्सेंचर का कंसल्टिंग का काम वास्तव में बढ़ रहा है। कंपनी ने अपनी मैनेज्ड सर्विसेज रेवेन्यू से नौ अरब डॉलर की शानदार कमाई की है। स्वीट ने इस बात पर जोर दिया कि ग्राहकों को पूरी तरह से एआई स्केल करने और बड़े स्तर पर अपनाने में थोड़ा समय जरूर लगेगा, लेकिन भविष्य में यह एक्सेंचर के लिए ग्रोथ का एक बहुत बड़ा अवसर है।

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मार्फ एआई एरा। - फोटो : अमर उजाला।

एआई के नए दौर में अपनी बादशाहत बनाए रखने के लिए एक्सेंचर क्या रणनीति अपना रही है?

एआई की इस बड़ी चुनौती से निपटने के लिए एक्सेंचर मूक दर्शक बनकर केवल इंतजार नहीं कर रही है, बल्कि वह बाजार में एक बहुत आक्रामक रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। कंपनी नए और उभरते हुए क्षेत्रों में तेजी से ग्रोथ तलाश रही है। इसके लिए एक्सेंचर ने अन्य कंपनियों के अधिग्रहण का अपना बजट दोगुना कर दिया है, जो इस वित्तीय वर्ष में नौ अरब डॉलर के भारी-भरकम आंकड़े को छू लेगा।

दरअसल, नए एआई मॉडल्स के आने के साथ ही साइबर सुरक्षा में खामियों और हैकिंग का खतरा भी कई गुना बढ़ गया है। दुनिया भर की कंपनियों को इन नए साइबर खतरों से बचाने के लिए एक्सेंचर ने रनजीरो, नेटराइज और ड्रैगगोस जैसी मजबूत साइबर सुरक्षा फर्मों को खरीदने की बड़ी घोषणा की है। इन तीनों डील्स की कुल एंटरप्राइज वैल्यू 4.2 अरब डॉलर के करीब है। इसके अलावा, एआई की दौड़ में आगे रहने के लिए कंपनी ने इसी साल जनवरी में ब्रिटेन के एक एआई स्टार्ट-अप फैकल्टी को एक अरब डॉलर में खरीदने का महत्वपूर्ण समझौता किया था। रणनीति को धार देने के लिए पिछले साल ही कंपनी ने अपने सभी प्रमुख ऑपरेशंस- स्ट्रैटेजी, कंसल्टिंग, सॉन्ग, टेक्नोलॉजी और ऑपरेशंस को 'रीइन्वेंशन सर्विसेज' नाम की एक ही यूनिट में मिला दिया था, ताकि क्लाइंट्स के हर काम में एआई और डेटा को आसानी से जोड़ा जा सके।

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एंथ्रोपिक के एआई टूल से दुनियाभर में गिरे शेयर बाजार। - फोटो : अमर उजाला

इस पूरे वित्तीय संकट का एक्सेंचर के 7.8 लाख कर्मचारियों की सैलरी पर क्या प्रभाव पड़ा है?

कंपनी के वित्तीय आंकड़ों में आई इस उठापटक और शेयर बाजार के दबाव का सीधा असर एक्सेंचर के वैश्विक स्तर पर फैले 7,80,000 से अधिक कर्मचारियों पर भी साफ-साफ पड़ा है। कंपनी ने जून महीने के लिए अपने कर्मचारियों के वेतन वृद्धि के ढांचे में एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित बदलाव किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स में एक इंटर्नल मेमो के हवाले से दावा किया गया है कि नए नियमों के तहत अब कर्मचारियों को उनकी कुल अप्रूव्ड सैलरी हाइक (स्वीकृत वेतन वृद्धि) का 50% हिस्सा जून में एकमुश्त राशि के रूप में दिया जाएगा। बाकी बचा हुआ 50% हिस्सा ही उनकी बेस पे (मूल वेतन) में जोड़ा जाएगा। कंपनी ने इस मेमो में स्पष्ट किया है कि यह बदला हुआ वेतन ढांचा इसलिए तैयार किया गया है ताकि कर्मचारियों को तुरंत खर्च के लिए ज्यादा नकदी मिल सके, और इसके साथ ही कंपनी अपने कुल पेरोल खर्चों का भी संतुलन बनाए रख सके। हालांकि, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रमोशन से जुड़ी वेतन वृद्धि पहले की तरह पूरी तरह से बेस पे के माध्यम से ही दी जाएगी। यह कड़ा कदम दिखाता है कि कंपनी बाजार के भारी दबाव के बीच अपने खर्चों का प्रबंधन बहुत ही संभल कर और रणनीतिक तरीके से कर रही है।

एक्सेंचर के बिजनेस मॉडल और उसके शेयरों में हालिया भारी गिरावट यह साफ तौर पर दर्शाती है कि ग्लोबल शेयर बाजार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को लेकर इस समय बेहद संवेदनशील स्थिति में है। भले ही एक्सेंचर का कुल राजस्व पिछले साल के मुकाबले बढ़ रहा है, लेकिन भविष्य के लिए विकास दर के कम अनुमान और नई बुकिंग में दो प्रतिशत की गिरावट निवेशकों के मन में डर पैदा करने के लिए काफी है।

हालांकि, कंपनी की लीडरशिप का दृढ़ विश्वास है कि यह मंदी केवल एक अस्थायी दौर है और वे भविष्य के एआई संचालित नए बाजार के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। पूरे आईटी सेक्टर के लिए आगे की राह अब पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगी कि वे एआई को एक विनाशकारी चुनौती के बजाय एक बड़े मुनाफे वाले अवसर में कितनी जल्दी बदल पाते हैं। क्या आने वाले समय में आईटी कंपनियां एआई को अपनाकर निवेशकों का भरोसा फिर से जीत पाएंगी, यह देखना शेयर बाजार के लिए बेहद दिलचस्प होगा।

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